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इस देश में हिन्दू होना गुनाह है, सन्यासियों को भारत रत्न क्यों नहीं- रामदेव

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स       
पतंजलि योगपीठ के योग गुरु बाबा रामदेव ने भारत रत्न को लेकर प्रयागराज कुंभ क्षेत्र से बड़ा बयान दिया है. रामदेव ने भारत में हिन्दुओं की अनदेखी को लेकर भी तल्ख लहजे में राजनेताओं पर सवाल दागे हैं. उन्होंने कहा कि इस देश में हिन्दू होना गुनाह है.
रामदेव ने भारत रत्न देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए तंज कसा कि महर्षि दयानंद स्वामी और स्वामी विवेकानंद का योगदान नेताओं और कलाकारों से कम है? आज तक एक भी सन्यासी को भारत रत्न क्यों नहीं मिला? मदर टेरेसा को दे सकते हैं, क्योंकि वे एक ईसाई हैं. लेकिन सन्यासियों को नहीं, क्योंकि वो हिन्दू हैं. हिन्दू होना गुनाह है इस देश में?

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने पांच लोगों को भारत रत्न प्रदान किया है. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पूर्व प्रधानमंत्री प्रणव मुखर्जी, समाजसेवी नानाजी देशमुख और संगीतकार व असमिया गायक भूपेन हजारिका को भारत रत्न देने का ऐलान किया है. इसके पहले सरकार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न दिया था.
इन्हें मिल चुका है भारत रत्न
इससे पहले 2015 में मदन मोहन मालवीय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न दिया गया था. अब तक सी राजगोपालाचारी, सर्वपल्ली राधाकृष्णन, चन्द्रशेखर वेंकटरमन, भगवान दास, एम विश्वेश्वरैया, जवाहर लाल नेहरू, गोविन्द बल्लभ पन्त, धोंडो केशव कर्वे, बिधान चंद्र रॉय, पुरुषोत्तम दास टंडन, राजेंद्र प्रसाद, जाकिर हुसैन, पांडुरंग वामन काणे, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, वीवी गिरि, के. कामराज, मदर टेरेसा, विनोबा भावे, ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान, एमजी रामचन्द्रन, डॉ. बीआर अम्बेडकर, नेल्सन मंडेला, राजीव गांधी, वल्लभ भाई पटेल, मोरारजी देसाई, अबुल कलाम आजाद, जेआरडी टाटा, सत्यजित राय, गुलजारी लाल नंदा, अरुणा आसफ अली, एपीजे अब्दुल कलाम, एमएस सुब्बुलक्ष्मी, चिदम्बरम सुब्रमण्यम, जयप्रकाश नारायण, अमर्त्य सेन, गोपीनाथ बोरदोलोई, रवि शंकर, लता मंगेशकर, बिस्मिल्लाह खान, भीमसेन जोशी, सीएनआर राव, सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिया गया है.
क्या है भारत रत्न सम्मान
1954 में इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान की शुरुआत की गई थी. भारत रत्न सम्मान राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है. इन सेवाओं में कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और खेल शामिल है. इसकी स्थापना तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी. शुरुआत में इसे मरणोपरांत नहीं देने का प्रावधान था, लेकिन 1995 में इस प्रावधान को बदला गया था.

 

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