Kashmir, भारत पहुंचने से पहले जिनपिंग ने कश्मीर को बताया द्विपक्षीय मुद्दा, चेन्नई में होगी वुहान के आगे की बात

भारत पहुंचने से पहले जिनपिंग ने कश्मीर को बताया द्विपक्षीय मुद्दा, चेन्नई में होगी वुहान के आगे की बात

Kashmir, भारत पहुंचने से पहले जिनपिंग ने कश्मीर को बताया द्विपक्षीय मुद्दा, चेन्नई में होगी वुहान के आगे की बात
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 11 और 12 अक्टूबर को भारत पहुंच रहे हैं. वह चेन्नई इन्फार्मल समिति में हिस्सा लेंगे. उधर, भारत पहुंचने से पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पाकिस्तान को एक झटका दिया है. शी जिनपिंग ने कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा बताते हुए कहा है कि कश्मीर पर भारत और पाकिस्तान को मिलकर बातचीत करनी चाहिए. हालांकि, यह भी चर्चा है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के भाषण के जरिए खेले गए मुस्लिम कार्ड से चीन चिढ़ा हुआ है. चीन भी मानता है कि उसके उत्तरी राज्य में चरमपंथी उइगुर मुसलमानों को पाकिस्तान से ही खाद-पानी मिलती है. लेकिन भारत को घेरने के लिए वह इस मुद्दे को अब तक दरकिनार करता रहा है. हालांकि, डोकलाम विवाद के बाद बदले हुए कारोबारी हालात में चीन सीधे तौर पर भारत से रंजिश दिखाने की कोशिशों से बचने का प्रयास करने लगा है.

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार चेन्नई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी. जिनपिंग के बीच वुहान से आगे की बातचीत होगी. चेन्नई में शी जिनपिंग 24 घंटे रहेंगे. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चार सत्रों में उनकी बातचीत होगी. यह बातचीत 7 घंटे तक अलग-अलग सत्रों में होगी.
वुहान में दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर ठोस नतीजे की ओर आगे बढ़ने पर सहमति बनी थी. कारोबार में भी कई मामलों में भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क को कम किया था. हालांकि, अब भी व्यापार असंतुलन चीन के पक्ष में है. दोनों देशों के बीच करीब 58000 करोड़ रुपये का व्यापार असंतुलन बताया जा रहा है.
वुहान समिति से आगे चेन्नई समिति में द्विपक्षीय, क्षेत्रीय, बहुराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी. दोनों देशों के दिग्गज नेता संयुक्त प्रेस वार्ता के जरिए बातचीत के नतीजों को भी दुनिया के सामने रखेंगे. इसके अलावा इंडिया-चाइना क्लोजर डेवलपमेंट पार्टनरशिप पर भी दोनों देशों के बीच चर्चा होगी. इसमें प्रधानमंत्री मोदी की ओर से भारतीय उत्पादों को चीन में प्राथमिकता देने का मुद्दा उठाया जा सकता है. साथ ही चीन की ओर से भारत की आधारभूत परियोजनाओं में निवेश और 5जी मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध कराने वाली कंपनी हुवावेई पर भी चर्चा हो सकती है. हुवावेई की तकनीक को नोकिया और दूसरे अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों से बेहतर कहकर एयरटेल के सीएमडी उसाक समर्थन कर चुके हैं. हालांकि, अमेरिका ने हुवावेई के उपकरणों को सुरक्षा कारणों से अनुमति नहीं दी है. भारत भी अब तक इस प्रकरण में कोई ठोस फैसला नहीं ले सका है.

 

 


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