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#BankOfBaroda का हिस्सा बने देना बैंक और विजया बैंक, ग्राहक करें ये काम

#BankOfBaroda का हिस्सा बने देना बैंक और विजया बैंक, ग्राहक करें ये काम
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक के ग्राहक एक हो गए हैं. देना बैंक और विजया बैंक के ग्राहक अब बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम और शाखाओं का इस्तेमाल अपने बैंक की तरह कर सकते हैं. बैंक ऑफ बड़ौदा ने पहली अप्रैल की सुबह ट्वीट कर कहा कि बैंक के तीनों बैंकों को पी3 यानी पॉवर3 के नाम से प्रमोट किया जाएगा.

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने देश में छोटे बैंकों के बड़े बैंकों में विलय की प्रक्रिया को तेज करते हुए 2018 की चौथी तिमाही में इसे मंजूरी दे दी थी. इसके बाद से ही विलय की यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी. पहली अप्रैल से देना बैंक और विजया बैंक पूर्ण रूप से बैंक ऑफ बड़ौदा का हिस्सा बन गए हैं. इस विलय के साथ ही बैंक ऑफ बड़ौदा, एसबीआई के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन गया है.
देश के उत्तरी राज्यों में यह एसबीआई और आईसीआईसीआई के बाद तीसरा सबसे बड़ा बैंक भी बन गया है. बैंक की ओर से कहा गया है कि देना बैंक और विजया बैंक के एटीएम और सेवाएं भी बॉब का हिस्सा हो गई हैं. साथ ही अब तीनों बैंकों के एटीएम बॉब के एटीएम बनकर कार्य करेंगे.
रिजर्व बैंक ने शनिवार को एक बयान में कहा, ‘विजया बैंक और देना बैंक के उपभोक्ताओं को एक अप्रैल से बैंक ऑफ बड़ौदा का उपभोक्ता माना जाएगा.’ केंद्र सरकार ने अतिरिक्त खर्च की भरपाई के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा को 5,042 करोड़ रुपये देने का पिछले सप्ताह निर्णय लिया था. विलय की योजना के तहत विजया बैंक के शेयर धारकों को प्रत्येक एक हजार शेयरों के बदले बैंक ऑफ बड़ौदा के 402 शेयर मिलेंगे.

एलआईसी का हुआ आईडीबीआई बैंक

देना बैंक के शेयरधारकों को उनके प्रत्येक एक हजार शेयर के बदले बैंक ऑफ बड़ौदा के 110 शेयर मिलेंगे. विलय के बाद संयुक्त निकाय का कारोबार 14.82 लाख करोड़ रुपये का होगा. इस विलय के बाद देश में सरकारी बैंकों की संख्या कम होकर 18 रह जाएगी.
देश के बैंकिंग क्षेत्र में 31 मार्च 2019 को समाप्त हो रहे इस वित्त वर्ष के दौरान कई अहम पहल की गईं. विजया बैंक और देना बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय करने के साथ ही सरकारी क्षेत्र के आईडीबीआई (IDBI) बैंक में सरकार की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी को भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को हस्तांतरित कर दिया गया.
वित्त सेवाओं के विभाग ने वर्ष के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में रिकॉर्ड 1.06 लाख करोड़ रुपये की पूंजी भी डाली. इसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ इंडिया, कारपोरेशन बैंक, इलाहाबाद बैंक सहित पांच बैंक रिजर्व बैंक की त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई निगरानी से बाहर निकल आए. इस दौरान बैंकों की गैर-निष्पादित राशि (NPA) राशि में 2018-19 की अप्रैल- सितंबर तिमाही में 23,860 करोड़ रुपये की कमी आई.

 

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