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वित्त आयोग को आयुष मंत्रालय ने गिनाईं जड़ी-बूटी उत्पादन की दुश्वारियां, आयुर्वेद का बढ़ेगा दायरा

वित्त आयोग को आयुष मंत्रालय ने गिनाईं जड़ी-बूटी उत्पादन की दुश्वारियां, आयुर्वेद का बढ़ेगा दायरा
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
केंद्र सरकार योग के बाद आयुर्वेदिक इलाज को बढ़ावा देने की योजना भी तैयार की है। आयुष मंत्रालय़ ने गुरुवार को वित्त आयोग के सामने दवाओं में इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटी के उत्पादन में आने वाली समस्याओं को गिनाया है। आयुष मंत्री श्रीपद येसो नाइक के नेतृत्व में मंत्रालय ने आयुष स्वास्थ्य प्रणाली के जरिये राष्ट्रीय स्वास्थ्य के लक्ष्यों को हासिल करने के बारे में 15वें वित्त आयोग के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति दी। आयोग के अध्यक्ष श्री एन के सिंह की अगुवाई में आयोग को मंत्रालय की उपलब्धियों के विभिन्न पहलुओं और उन मुद्दों के बारे में जानकारी दी गई जहां मंत्रालय ने आयोग से हस्तक्षेप करने को कहा है।
आयोग को बताया गया कि वर्तमान में राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में निम्नलिखित आयुष स्वास्थ्य सेवाएं और उससे जुड़ी संरचना मौजूद है :-
  • अकेले चल सकने योग्य आयुष सुविधाएं- 30897 (आयुष अस्पताल 3893, डिस्पेंसरी 27004)
  • निश्चित क्रम में एक स्थान पर सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाएं – 10955 (राज्यों/ संघ शासित प्रदेशों में वर्तमान कुल 32053 सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में से)
  • राज्य औषधीय पौधा बोर्ड
  • आयुष प्रणालियों के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए प्रत्येक राज्य/संघ शासित प्रदेश की अपनी प्रशासनिक व्यवस्था है।
मंत्रालय का मानना है कि आयुष स्वास्थ्य सेवा और इस क्षेत्र से जुड़े अन्य कार्यों को हाथ में लेने के लिए औषधि गुणवत्ता नियंत्रण और जड़ी-बूटियों को उगाने में राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के सामने निम्नलिखित परेशानियां आती हैं –
  • अपर्याप्त बजटीय सहायता : राज्य की वार्षिक योजना के अंतर्गत राज्य आयुष विभाग द्वारा प्राप्त निधि अक्सर पर्याप्त नहीं होती। अधिकतर राज्य आयुष विभागों को विशेष स्रोतों जैसे 14वें वित्त आयोग द्वारा प्रदान राशि नहीं मिलती। राष्ट्रीय आयुष मिशन योजना का आकार छोटा होने के कारण राज्यों/संघ शासित प्रदेशों को राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत आवंटित केंद्रीय सहायता अनुदान अपर्याप्त होता है।
  • अधिकतर राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में राज्य स्तर पर आयुष स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर्याप्त नहीं होती इससे आयुष स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मात्रा बुरी तरह से प्रभावित होती है।
मंत्रालय ने आयोग से निम्नलिखित सिफारिशें कीं –
  • 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत तय स्वास्थ्य क्षेत्र की कम से कम 10 प्रतिशत सहायता राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में आयुष विभागों को समर्पित हो।
  • वर्तमान सीएसएस (एनएएम) को अधिक विस्तृत उद्देश्यों और बढ़े हुए निधियन को जारी रखने की इजाजत दी जाए।
  • वर्तमान में सीएसएस के अंतर्गत धन का प्रवाह सरकारी खजाने के रास्ते होता है। राज्यों के खजानों से कार्यान्वयन एजेंसियों को दी जाने वाली धन राशि जारी होने में देरी के कारण उत्पादन और योजनाओं के नतीजे मिलने में देरी होती है। सरकारी खजाने के रास्ते के बजाय निधियों को सीधे कार्यान्वयन एजेंसियों के पास रखा जाए।
  • इन सब बातों के साथ आयुष के विकास के संकेतकों को राज्यों के निधियन के हस्तांतरण के एक मानदंड के रूप में अपनाया जा सकता है।
आयोग ने आयुष मंत्रालय द्वारा रखे गए सभी मुद्दों को ध्यान से सुना और आयुष को संसाधनों के हस्तांतरण के बारे में सरकार को अपनी सिफारिशें देते समय अनुकूल विचार देने का वादा किया।

 

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