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अयोध्या राम मंदिर केसः मध्यस्थता के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आरएसएस निराश, कहा- हिन्दुओं की उपेक्षा

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के मध्यस्थता वाले फैसले पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने निराशा जताई है. आरएसएस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्यजनक रुख अपनाया है. हिन्दू समाज की गहरी आस्था से जुड़ा यह संवेदनशील विषय सुप्रीम कोर्ट की प्राथमिकता में नहीं है.
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार #RSS ने कहा है कि राम-जन्मभूमि मामले में लंबे खींचे गए विवाद को समाप्त करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया को तेज किया जाना चाहिए था. इसके बजाए सुप्रीम कोर्ट ने मामले में एक आश्चर्यजनक रुख अपनाया है. हिंदू समाज की गहरी आस्था से जुड़े इस संवेदनशील विषय के लिए SC की कोई प्राथमिकता नहीं है.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कहा कि हम अनुभव कर रहे हैं कि हिंदुओं की लगातार उपेक्षा हो रही है. संघ ने कहा कि न्यायिक प्रणाली में पूरा सम्मान करते हुए हम सशक्त रूप से यह कहना चाहेंगे कि विवाद पर निर्णय शीघ्र होना चाहिए. साथ ही एक भव्य मंदिर निर्माण में आने वाली बाधाओं को दूर करना चाहिए.
आरएसएस ने कहा कि सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित संस्थाओं और रीति-रिवाजों को ध्यान में रखते हुए पीठ की अकेली महिला सदस्य ने अलग राय पर विचार किए बिना भी एक निर्णय दिया.

संघ ने कहा कि किसी भी निर्धारित समय सीमा में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लागू करने के लिए राज्य सरकार के लिए बाध्य नहीं था. प्रकरण में निर्णय की बारीकियों को समझे बिना राज्य सरकार ने गैर-हिंदू और गैर-भक्त महिलाओं के मंदिर में जबरन प्रवेश की सुविधा देकर हिंदू समाज के प्रति अनुचित जल्दबाजी और राजनीतिक दुर्भावना दिखाई.
उधऱ, विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा ने एक प्रतिक्रिया में कहा श्रीराम जन्मभूमि के विवाद को लेकर मध्यस्थता का औचित्य समझ से परे है. पहले भी एक दर्जन बार हो चुकी इस प्रकार की मध्यस्थता की पहल का परिणाम क्या निकला? यह संपूर्ण राष्ट्र को मालूम है. सर्वोच्च न्यायालय का इस देश की जनता सम्मान करती है. उनका जो भी प्रयास श्रीरामजन्म भूमि को लेकर है यह करके वह भी देख लें हम प्रतीक्षा करेंगे. फिलहाल, श्रीराम जन्मभूमि को प्राप्त करने के लिए लाखो हिंदुओं ने जिसके लिए आहुति दी जिसके लिए न्यायिक प्रक्रिया मैं 70 वर्षों से हिंदू समाज उलझा हुआ है. उसे इस मध्यस्थता से क्या प्राप्त होगा?
उन्होने कहा श्रीरामलला जहां विराजमान हैं वह उनकी ही जन्मभूमि है. जिस पर आक्रमणकारियों ने बलात रूप से बाबरी नामक ढांचे को खड़ा कर हिंदू भावनाओं पर कुठाराघात किया. अपमानित करने के लिए इस प्रकार का षड्यंत्र किया. अब भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के अलावा किसी भी प्रकार का ढांचा हिंदू समाज स्वीकार करने वाला नहीं है.

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