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अयोध्या की चौरासी कोसी परिक्रमा प्रारंभ, 10 मई तक अनवरत चलेगी यात्रा

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
अयोध्याः विश्व हिन्दू परिषद के उपाध्यक्ष चम्पतराय ने शुक्रवार को कहा कि पंचकोसी, चौदह कोसी या फिर चौरासी कोसी परिक्रमा यह सभी भक्तो के उद्धार तथा भगवद् प्राप्ति का माध्यम है। वही सामाजिक समन्वय भी स्थापित करती है। इस परम्परागत सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखना जन-जन का कर्तव्य है।अयोध्या के चौरासी कोस मे स्थापित अनेकों धार्मिक एवं पौराणिक तीर्थ हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुये है। इनके दर्शन पूजन से भक्तों को अवलौकिक शक्ति प्राप्त होती है। इस परम्परागत परिक्रमा और तीर्थ का संरक्षण संवर्धन आवश्यक है।
हनुमान मंडल के संयोजन में 19अप्रैल से 10 मई तक चलने वाली चौरासी कोसी परिक्रमा को विहिप केन्द्रीय सलाहकार सदस्य पुरूषोत्तम नारायण सिंह ने केसरिया ध्वज दिखा कर रवाना किया। इससे पूर्व विहिप उपाध्यक्ष चंपतराय ने अपने विचार उपस्थित परिक्रमार्थियो के बीच प्रकट करते हुये कहा देवदर्शन बड़े ही कठिनाइयो से प्राप्त होता है। जप, तप, परिक्रमा आदि इसके माध्यम है। यहां आयोजित होने वाला पारम्परिक मेला उत्सव तथा परिक्रमा अयोध्या के धार्मिक स्वरूप को जीवंत प्रदान करते है।
कार्तिक माह में पंचकोसी और चौदहकोसी परिक्रमा में लाखो भक्त अयोध्या पहुंचकर इस पवित्र भूमि की परिक्रमा करके इसके “रज ” को मस्तक पर ग्रहण करते हुये भगवान श्रीराम के प्रति अपनी श्रद्धानिवेदित करते है। उन्होंने कहा कि अयोध्या चौदहकोस में ही सीमित नहीं है। इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक सीमा तो चौरासी कोस में है, जिसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है। उन्होंने कहा कि अयोध्या की चौरासी कोस की परिक्रमा भी होती हैं। यह जानकारी भी सीमित लोगों तक ही रही। विगत वर्ष 2013 में विहिप और संतों ने इसका सम्पूर्ण देश मे प्रचार-प्रसार किया।
उन्होंने कहा कि हम यह कभी नहीं भूलेंगे कि इस धार्मिक और सांस्कृतिक परिक्रमा को पूर्ववर्ती अखिलेश यादव की सरकार ने प्रतिबंधित कर संतों और विहिप कार्यकर्ताओं को कारागार मे डालकर इसको देश भर मे प्रचारित करा दिया।
उन्होंने प्रदेश और केन्द्र सरकार से आशान्वित होते हुये कहा कि वृंदावन और कामदगिरी की भांति ही अयोध्या के इस चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग मे पड़ने वाले एतिहासिक पौराणिक स्थलों का जीर्णोद्धार करके इसे तीर्थाटन केन्द्र के रूप में विकसित करने की जरूर है। ताकि, अयोध्या आने वाले भक्त इसका भी दर्शन कर सकें।
कारसेवकपुरम् में आयोजित महाआरती करने के उपरान्त परिक्रमा मणिराम दास जी की छावनी पहुंच कर परिक्रमार्थियों ने श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास महाराज का आशिर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भगवद्च्चिन्तन और राष्ट्र समाज का उद्धार ही हम सभी भक्तों का संकल्प है। परिक्रमा ईश्वर प्राप्ति का साधन मात्र नही है यह लोककल्याण करने का महाअनुष्ठान है। चौरासी कोस की परिक्रमा से सामाजिक समरस्ता को व्यापक बल मिलता है। उन्होंने विहिप के प्रयास को प्रशंसनीय बताते हुये कहा कि हनुमान मंडल के बैनर तले निकल रही यह परिक्रमा सामाजिक तथा धार्मिक वातावरण को विस्तार प्रदान करते हुये भविष्य मे व्यापक स्वरूप ग्रहण कर लेगी।

ये है परिक्रम का मार्ग
परिक्रमा के प्रभारी सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि यह परिक्रमा आज अयोध्या से मखोड़ा (मखभूमि) प्रस्थान करेगी। रात्रि विश्राम के उपरांत प्रातःकाल दर्शन पूजन करके पूज्य संत आगे रजवापुर रामगढ़खास, छावनी रामरेखा, देवकली हनुमान मंदिर, विशेषरगंज हनुमानबाग बस्ती से सरयू पारकर फैजाबाद के शेरवाघाट, श्रृंगीश्रृषि आश्रम महबूबगंज गोसाईगंज, टिकरी तारून, रामपुर भगन, सूर्यकुंड, दराबगंज, हेमा सराय आस्तिकन, अमानीगंज, रौजागांव, पटरंगा से बाराबंकी जनपद के बेलखरा में प्रवेश करेगी। यहां से गोंडा जनपद के देवीगंज, दुलारेगंज, जम्मूदीप ,भौरीगंज, राजापुर पस्का (संत तुलसीदास की जन्मभूमि) बखरिया, उमरी डिक्सिर अमदही, जमदग्नि आश्रम तुलसीपुर, नवाबगंज से जनपद बस्ती मे पुनः वापसी होगी. रेहली, सिकंदरपुर होते हुये 9 मई को मखोड़ा वापस पहुंचेगी। उन्होने बताया 10 मई को सायंकाल तक अयोध्या पहुंचकर दूसरे दिन 11 मई को सरयू स्नान करने के पश्चात राजकोट की परिक्रमा वा सीता कुंड पर हवन पूजन करके परिक्रमा समाप्त होगी.
परिक्रमा प्रस्थान के दौरान महंत महंत कमलनयन दास महाराज, महंत कृष्णाचार्य, कृपालु रामदास संत जानकी दास, राम दास, राघव दास, दयाल दास, रामकिशन दास, गया शरण विहिप केन्द्रीय मंत्री राजेन्द्र सिंह पंकज, विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा, अनिल पांडेय, पवन तिवारी बब्लू,घनश्याम ,राजा वर्मा विनोद कुमार, आचार्य नारद भट्टाराई, वीरेन्द्र कुमार, सैकड़ो संत धर्माचार्य समलित हुए.

 

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