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राहुल गांधी का हमला- अरुण जेटली झूठे, हम सत्ता में आए तो राफेल डील की जांच कराएंगे

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स       
नई दिल्‍ली। लोक सभा में राफेल मुद्दे को उठाने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सदन के बाहर भी इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली और गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर पर हमला बोला. प्रेस कांफ्रेंस में राहुल ने कहा कि राफेल वि मान का दाम बदलकर 526 से 1600 करोड़ रुपये किया गया.
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को 20 मिनट की सीधी बहस की चुनौती दी. साथ ही कहा कि अरुण जेटली झूठ बोल रहे हैं. अगर हम सत्ता में आए तो राफेल डील की जांच कराएंगे. राहुल ने कहा कि राफेल में नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं. जनता पूछ रही है कि प्रधानमंत्री जी ने 30 हजार करोड़ रुपये उद्योगपति अनिल अंबानी को क्‍यों दिए. आज पूरा देश प्रधानमंत्री से सवाल कर रहा है.
लोक सभा के अंदर जिस टेप को बिना प्रमाण के अध्यक्ष ने जारी करने की अनुमति नहीं दी, कांग्रेस अध्यक्ष ने मीडिया के सामने उस टेप जारी करते हुए कहा कि इसमें गोवा के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा है कि पर्रिकर ने कैबिनेट मीटिंग में कहा था कि राफेल की फाइल मेरे पास है. मुझे कोई कुछ नहीं कर सकता है. सवाल है कि पर्रिकर के बेडरूम में कैसी फाइल है.
उन्‍होंने कहा कि हम राफेल की क्षमता पर सवाल नहीं उठा रहे हैं, हम सिर्फ सौदे पर सवाल उठा रहे हैं. राफेल मुद्दे पर लोकसभा में अरुण जेटली प्रधानमंत्री का बचाव किया, प्रधानमंत्री क्‍यों नहीं सामने आते हैं. रक्षा मंत्री क्‍यों नहीं सामने आती हैं.
 राहुल गांधी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ये नहीं कह रहा है कि राफेल मामले में जांच नहीं होनी चाहिए या इसमें कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ. सुप्रीम कोर्ट ये कह रहा है कि ये हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सवाल यह है कि यह किसने किया.
राहुल के सवाल
-मनोहर पर्रीकर के पास राफेल से जुड़े कैसे राज है
-राफेल विमान का दाम बदल कर 526 से 1600 करोड़ किया गया, सवाल यह है कि यह किसने किया
-अनुभवहीन कंपनी को कांट्रैक्‍ट क्‍यों दिया गया, अनिल अंबानी को कांट्रैक्‍ट क्‍यों दिया गया
-राफेल मुद्दे पर लोकसभा में प्रधानमंत्री ने क्‍यों नहीं दिया जवाब, रक्षा मंत्री ने क्‍यों नहीं दिया जवाब
-विमान सस्‍ता तो 126 विमान क्‍यों नहीं खरीदे
-एचएएल 70 साल से हवाई जहाज बना रही है। एचएएल को हटाने का निर्णय किसका था?

 

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