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ज्योतिषः मोदी का “बाली योग” और कूटनीतिक चतुराई दिलाएगी सत्ता?

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

प्रमोद शुक्ल

तुला लग्न और बृश्चिक राशि वाली कुंडली ही चायवाले की असली जन्मपत्री है। यह कुंडली चीख-चीख कर कहती है कि जातक शुरुआती जिंदगी में चाय ही बेचेगा। नीच का चंद्रमा द्वितीय स्थान में ज्योतिष के इस सिद्धांत का उद्घोष करता साफ नजर आता है नमो की कुंडली में, बशर्ते एक जानकार और निष्पक्ष ज्योतिषी की नजर से उसे देखा जाय।
अगले ही क्षण ये जन्मपत्रिका जब चंद्रमा के नीचभंग राजयोग की घोषणा करती है तब ये भी स्पष्ट हो जाता है कि ये जातक समाज में बहुत नीचे से जीवन की शुरुआत कर के सर्वोच्च ऊंचाई तक पहुंचेगा। यह नीचभंग राजयोग मंगल की चंद्रमा के साथ युति के कारण बना है। जोकि चलित चार्ट में लग्न में आ पहुंचा है। छठें घर में मीन राशि पर बैठे राहु [ल] को बारहवें घर में बैठा हुआ सूर्य व बुध पूर्ण दृष्टि देख रहा है। जाहिर है कि ये बुधादित्य राजयोग अपराजेय होकर अपने शत्रु राहु को देख रहा है और चलित से आय भाव में खिसक आया है। जहां उसका साथ देने के लिए महाराज शुक्राचार्य जी खुद भी अपने परम शिष्य शनि के साथ विराजमान हैं। शनि अस्त होकर भी न सिर्फ अपने गुरु के साथ राजयोग बना रहे हैं बल्कि भाग्येश बुध से गलबैंया करते हुए वहां भी एक अति बलशाली राजयोग का निर्माण कर रहे हैं।
अब कोई ज्योतिष का जानकार बताये कि शत्रु स्थान पर छठे घर में अकेला बैठा राहु [ल] भला क्या बिगाड़ सकता है। इतने सारे राजयोगकारी ग्रहों के सामने…. राहु मीन राशि पर है और मीन के गुरु पंचम स्थान में बैठ गये हैं। इस कारण ये राहु बुद्धिजीवी कहलाता है, क्योंकि पर्दे के पीछे से गुरु महाराज अपने घर में बैठे राहु की पूरी मदद कर रहे हैं। गुरु महाराज तुला लग्न के कारण ईर्ष्यावश खुद भी जातक से शत्रुता रखते हैं, परंतु चलित से लग्न में विराजित अजेय स्वगृही मंगल पर दृष्टि पड़ते ही उन्हें अपना धर्म याद आ जाता है कि मंगल तो धर्म की पुनर्स्थापना के लिए ही युद्धरत है। यह ख्याल आते ही गुरु महाराज की लग्न और मंगल पर दृष्टि शुभ हो जाती है।
इस तरह से ग्रहों के अधीन राहु-गुरु से प्रेरित जातक नरेंद्र मोदी को जितना ही गाली देते हैं, वह गाली नमो के लिए विटामिन और पुष्टाहार का काम करती हुई जातक को अजेय बनाती चली जाती है। दरअसल गुरु महाराज अपने स्वभाव से बचनबद्ध हैं कि जहां उनकी दृष्टि जाएगी वहां शुभत्व प्रदान करते हुए उत्तम फल देगी। तो इस कारण लग्न, आय भाव और भाग्य भाव पर दृष्टिपात करते हुए गुरु महाराज इन स्थानों और यहां बैठे हुए सभी ग्रहों को पूरा पुष्टाहार सप्लाई करते हैं, भले ही वो पुष्टाहार गालियों के रूप में होता है।
गुरु ब्रहश्पति की ये मजबूरी इस कारण है क्योंकि उनके घर मीन राशि में राहु (ल) बैठा है। पर गुरु महाराज की नेकनीयती के कारण हर गाली मोदी की लोकप्रियता में चार चांद लगाती चली जाती है। उनको गाली देने वाले ही एक तरह से उनके मुख्य प्रचारक बन जाते हैं, क्योंकि उन गालियों का जवाब देने के लिए आम आदमी कमर कस लेता है। ग्रहों के हिसाब से वह आम आदमी आखिर कौन है? क्या दिल्ली वाले सर जी? जी नहीं। कुंडली का चतुर्थेश शनि जो ग्यारहवें घर में अपने गुरु शुक्राचार्य महाराज के साथ होते हुए भी सूर्य यानीकि राजा से अस्त है, अर्थात नितांत कमजोर होकर भी सर्वाधिक बली हो गया है।
ये आम आदमी छठें घर में बैठे राहु (ल) अर्थात शत्रु को पूरी दृष्टि से देख रहा है। जानकार जानते हैं कि शनि की ऐसे दृष्टि जब किसी पर भी पड़ती है तो उसे नेस्तनाबूत करके ही शांत होती है, भले ही वो राहु कितना भी रावण जैसा शक्तिशाली और मायावी क्यो न हो। यह प्रचंड शनि यहां से अपनी दसवीं खास दृष्टि भाग्य भाव पर भी डाल रहा है और भाग्येश बुध से राजयोगकारी युति भी बनाये हुए है।
ये गठबंधन तो गजब का है। रूस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान पुतिन द्वारा ऐसे चुनावी माहौल में प्रदान करना इसी राजयोग के प्रकाश में देखा जाना चाहिए। क्या अब वामपंथी ये कहेंगे कि पुतिन भी “संघी होकर खाकी निक्कर पहन लिये…” शनि की ये फिरकी सारे मोदी विरोधियों पर “भीगी पनही” की बरसात जैसी साबित हो रही है। शनि महाराज ऐसे ही भिगोकर मारते हैं। क्योंकि मोदी की साढ़े-साती भी चल रही है और शनि महाराज को अपना भी योगदान निभाना ही है उनकी सर्वोच्च कुर्सी को और ज्यादा मजबूती देने के लिए।
मोदी की कुंडली की सबसे खास बात ये है कि नीच के चंद्रमा की महादशा आने पर ही उनकी लोकप्रियता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख्याति मिलनी शुरू हुई। कारण स्पष्ट है, चंद्रमा का मंगल द्वारा नीचभंग राजयोग होना। छठें में बैठा शत्रु राहु जब चंद्रमा पर कुदृष्टि डालकर उसे और जितना कमजोर करने की कोशिश करता है तो चंद्रमा का राजयोग उतना ही प्रबल होता जाता है। इसीलिए जब चंद्रमा में राहु की अंतरदशा आयी तो उस दशा ने मोदी को प्रधानमंत्री बना दिया। यही राजयोग बताया जाता है कि सुग्रीव के अग्रज बाली की कुंडली में था।
मान्यता है कि बाली को ललकार कर उसका कितना ही प्रतापी शत्रु जब उस पर प्रहार करने जाता था तो उसकी आधी ताकत बाली में ट्रांस्फर हो जाती थी। मोदी के साथ भी अब तक ऐसा ही होता आया है। जिसे इस बात का ज्ञान नहीं है वो चुनौती देता है। नीतीश कुमार और ठाकरे जैसे अनुभवी चतुर राजनेता समय की नजाकत और वास्तविकता को समझकर दोस्ती गांठ लेते हैं।
वर्तमान में मोदी की दशा चंद्रमा में बुध की है। चूंकि बुधादित्य राजयोग शनि व शुक्राचार्य के सहचर्य से और ज्यादा प्रबल हुआ है, इस कारण ज्योतिष के सिद्धांत चीख-चीखकर कहते हैं कि ये ‘चायवाला’ इस बार ज्यादा मजबूती से वापस आएगा और भ्रष्टाचारियों के “सीने पर अब तक मूंग दलने वाला ये चौकादार इस बार पत्थर तोड़ने के लिए घन चलाएगा।”
रूस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान इस बात का इशारा है कि पुतिन जैसा घाघ नेता भी मोदी की हकीकत को भलीभांति समझ चुका है, ट्रंप तो पहले से ही मोदी के सामने पलक-पांवड़े बिछाते हुए उनकी पीठ पर हांथ रखे हुए हैं। आतंकवाद के मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस और ब्रिटेन को भी साथ लेते हुए यूएनओ के सुरक्षा परिषद में बार-बार टांग अडाने वाले चीन को आखिरी चेतावनी दे ही दी है।
यूएई का भी सर्वोच्च नागरिक सम्मान पा चुके मोदी का विरोध करने की हिम्मत अब किसी अरब देश में भी नहीं बची है। वास्तविकता ये है कि मोदी के इस “बाली योग” ने अपनी कूटनीतिक चतुराई के बल पर पाकिस्तान के आड़ में चीन की भी भरपूर घेराबंदी कर ली है। मोदी की पहल के बाद चीन के खिलाफ अमेरिका सहित अन्य देश भी लगातार आक्रामक होते जा रहे हैं। ये है मोदी के ग्रहों का कमाल…
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और ज्योतिषाचार्य भी हैं। संपर्क- 9452110307) 

 

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