Nationalwheels

जिस तरह से मक्का में मंदिर नहीं बन सकता, वैसे ही अयोध्या में राममंदिर के अलावा कुछ नहीं बन सकता- उमा भारती

जिस तरह से मक्का में मंदिर नहीं बन सकता, वैसे ही अयोध्या में राममंदिर के अलावा कुछ नहीं बन सकता- उमा भारती
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
देश में आम लोकसभा चुनाव की सरगर्मी बढ़ गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले करीब दस दिनों से प्रतिदिन देश के किसी न किसी हिस्से में शुभारंभ, शिलान्यास और रैलियां कर रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत दूसरे विपक्षी दल भी अपने दमखम के आधार पर रोजाना राजनैतिक कार्यक्रमों में हिस्सेदारी कर रहे हैं. पहले अनुमान लगाया गया था कि आम चुनाव की तिथियां मार्च के पहले सप्ताह में घोषित हो जाएंगी लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि आदर्श आचार संहिता मार्च के तीसरे या चौथे सप्ताह तक खिसक सकती हैं.
इस बीच देश के सबसे गर्म मुद्दों में से एक अयोध्या राम मंदिर विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता पर जोर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सभी हिन्दू और मुस्लिम पक्षकारों ने मध्यस्थों के नाम सौंप दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के मामले में जल्द फैसले की बात कही है.
राजनीतिक गलियारों में भी अब यह मुद्दा गरमाने की संभावना है. केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने राम मंदिर मामले पर बड़ा बयान दिया है. बुधवार को सागर में एक कार्यक्रम में उमा भारती ने कहा कि जिस तरह से मक्का एवं वैटिकन सिटी में मंदिर नहीं बन सकता, उसी प्रकार अयोध्या में राममंदिर के अलावा कुछ नहीं बन सकता.
अयोध्या मामले पर कोई टिप्पणी नहीं
उधर, विवादास्पद रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद मामले पर अदालत में चल रहे मुकदमें के बारे में पूछे गये सवाल के जवाब में उमा भारती ने कहा कि इस पर हम कुछ भी नहीं कह सकते. सुप्रीम कोर्ट पर मैं किसी प्रकार की कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती हूं.
बाबर ने जो किया उसे बदल नहीं सकतेः सुप्रीम कोर्ट 
गौरतलब है कि 6 मार्च 2019 को अयोध्या विवाद मामले में मध्यस्थता के प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी. सुनवाई के दौरान हिंदू पक्षकार हिंदू महासभा  और निर्मोही अखाड़ा ने मध्‍यस्‍थता से इनकार कर दिया था लेकिन बाद में दोनों ने रजामंदी दे दी. पक्षकारों की शुरुआती आनाकानी पर सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा था कि विकल्प आज़माए बिना मध्यस्थता को खारिज क्यों किया जा रहा है? कोर्ट ने कहा कि अतीत पर हमारा नियंत्रण नहीं है, लेकिन हम बेहतर भविष्य की कोशिश जरूर कर सकते हैं.
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसए. बोबड़े, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डी. वाई. चन्द्रचूड़ और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय पीठ कर रही है. जस्टिस एसए बोबड़े ने सुनवाई के दौरान कहा कि बाबर ने जो किया उसे बदल नहीं सकते. हमारा मकसद विवाद को सुलझाना है. इतिहास की जानकारी हमें भी है. उन्‍होंने आगे कहा कि मध्‍यस्‍थता का मतलब किसी पक्ष की हार या जीत नहीं है. ये दिल, दिमाग, भावनाओं से जुड़ा मामला है. हम मामले की गंभीरता को लेकर सचेत हैं.
Nationalwheels India News YouTube channel is now active. Please subscribe here

(आप हमें फेसबुकट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंकडिन पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *