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#Article370: मियां इ क्या हो रिया है…… चलो कश्मीर चलबो 

#Article370: मियां इ क्या हो रिया है…… चलो कश्मीर चलबो 
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

अमरीश मनीश शुक्ल

कश्मीर में आज संसदीय उलट फेर हुआ है, किसी को पच रहा है और किसी को मुंह से भी दस्त शुरू हो गयी है। अचानक से सबकुछ हिला हिला सा मुझे नजर आ रहा है। बड़ा झोल है, वो लोग जो कल तक उट पटांग बात करना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते थे, अचानक से उनमे देश भक्ति की हिलोर जग गयी है। देवरस सम्मान वाले लोग राजनीती से परे आज गजब ही अलाप दे रहे हैं। सुबह सुबह मुर्गे की तरह देश कि जय बोलने की सीख दे रहे हैं ।
फिलहाल पुराना कश्मीर का हिस्सा हो या हम लोगों के इधर का इलाका और चाहे वह पाकिस्तान ही क्यों न हो हर तरफ के ठलुओं को काम मिल गया। सब तो ठीक है ये सीमा पार का कंगाल देश, जो कल तक कटोरा लेकर अमेरिका तक चला गया तो वह भी आज चिल्ला रहा है, कि कश्मीर विवादग्रस्त क्षेत्र है। अरे ओ फोडे के नासूर तुम लोग कह रहे हो कि कश्मीर के भौगोलिक बदलाव को तुम नहीं स्वीकार करोगे। अमां मियां हमें यह बताओ तो होते कौन हो स्वीकार करने वाले। अब्बू तो तुम्हारे हम हैं और फैसला हम कर रहे हैं। तुम अपनी लुंगी और लुगाई संभालों। खैर तुम अगर पी ओ के तक कुछ कहते तो समझ में आता, यह तुम कराची तक जुलूस निकाल कर कर क्या रहे हो? भारत के खिलाफ ये तुम्हारा जुलूस है क्या? कुछ खोपड़ी में है, या उसमें भी भूसा भरा है। चलो ये तो रहे तुम्हारी बात, खैर हमारे तरफ भी पहलवानों की भारी भीड़ लंगोट बांधकर मैदान में आ गयी है। कल तक जो लोग 2 किलोमीटर का भी बस से मुफ्त सफर करने के लिये ट्रफिक हवलदार से चिरौरी करते थे और नाम प्लेट में पांडे, मिश्रा देखकर पैर पर कूछ पड़ते थे, वह सीधे लद्दाख जाने की बात कर हैं।

अच्छा बाकी तो समझ में आ भी गयाा, ये लोग जो बेटियों का जिस्म नोचने वाले हैं अब क्या कश्मीर जायेंगे ? और इन युवाओं को क्या कहूं हर कोई अब कश्मीरी लड़कियों से शादी करने के लिए इतना उतावला लग रहा है, जैसे सारे रिश्ते बस इनका ही इंतजार कर रहे हैं। इधर गली से गुजरो तो कम अक्ल वाले गलियों में आतिशबाजी कर रहे हैं, जैसे बस बारात निकलने ही वाली है। अजी इस समय जब पूरा देश आर्थिक मंदी की ओर बढ रहा है, बेरोजगारो की फौज बढ़ रही है, उद्योग धंधे चौपट हो रहा है, तो सारा इलाज अब कश्मीर में ही होता सबको दिखाई पड़ रहा है। अपने लिये कभी अंडरवियर न खरीद पाने वाले कश्मीर में सीधे प्लाटिंग की बात कर रहे हैं और कभी तहसील की रजिस्ट्री आफिस न देखने वालों ने कश्मीर में प्लाट उपलब्ध है का बोर्ड भी बनवाना शुरू कर दिया है। गजब है मियां पर ये हो क्या रिया है।
मियां कुछ तुमहू जान लो
मियां एक बात जानो, कश्मीर में धारा 370 को हटाया नहीं गया है, बस उसके तहत जो प्रतिबंध थे वही हटाये गये हैं। इसका मतलब अब आपको क्या लगा रहे है, यह मुझे नहीं पता, लेकिन मियां इससे बस इतना है कि कश्मीर को जो स्वायत्तता मिलती थी, जो अलग अधिकार मिलते थे, वे सब हट गए हैं। खैर आप इतने से भी खुश हो सकते हो। क्योंकि हुआ तो बहुत कुछ है। खैर अब एक देश में दो निशान, दो विधान, दो प्रधान खत्म हो गये है और भारत का अभिन्न अंग जम्मू-कश्मीर अब आधुनिक शल्य चिकित्सका द्वारा बढिया से प्लांट कर दिया गया है। दूसरी बात ये है कि अब भारतीय संसद के हर संवैधानिक फैसले सीधे कश्मीर पर उसी तरह से लागू होंगे जैसा कि अन्य राज्यों पर लागू होते हैं। राष्ट्रपति के नोटिफिकेशन में भी अब यह स्पष्ट हो गया है और अब जम्मू-कश्मीर में जो संविधान सभा थी, उसका नाम विधानसभा कर दिया गया है। पहले यहां हेकड़ी बहुत चलती थी, जो चाहेंगे वह लागू करेंगे। जो चाहेंगे लागू नहीं करेंगे, पर मियां अब ये नहीं हो सकेगा। जो भारत का संविधान चाहेगा वही होगा। यानी अब कश्मीरी सेब भले ही कश्मीरी कहलाये, वहां के नागरिक हिंदुस्तानी ही होंगे।
अपने दिल्ली के सीएम केजरीवाल तो आपको याद ही होंगे, मियां अब कश्मीर में भी कुछ वैसा ही होगा। वहां भी सरकार बनेगी और जैसे केजरीवाल जी आजकल केंद्र पर टूट पड़ते हैं, बस अधिकतम वही किया जा सकेगा वहां की सरकार द्वारा। यानी हर निर्णय पर उपराज्यपाल फैसला देंगे। पर मियां एक बात तो है अब यूपी बिहार की गालियां कश्मीर में भी गूंजेंगी। सब बसेंगे, व्यापार करेंगे, पर्यटन बढेगा और कमाई के साथ देश तरक्की करेगा। मियां अब तो बस संसद में पुनर्गठन विधेयक पारित होगा। जिसमें जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को ऐसे अलग किया जायेगा, जैसे यूपी से बिछड कर उत्तराखंड, जैसे बिहार से जुदा होकर झारखंड और मध्य प्रदेश से बेवफाई कर छत्तीसगढ़ बना था। हालांकि यह पूर्ण राज्य न होकर के केंद्र शासित होगा।
मियां अभी तक जो हम देखे हैं उससे यह तो साफ है कि आज़ादी के बाद से ही कश्मीर घाटी वाला इलाके को बडी मोहब्बत अलगाववादियों ने दी है कि लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। लगभग 20 साल से अलगाववाद की खद्दर कुर्ती ने ऐसा मजहबी चोला पहना है, जो चुभता है, दुखता है, पर दिखाने की मनाही है।
मेरी राय
मियां, हमारी तो एक ही प्रार्थना और राय है वो हम तुमको बता रहे हैं। हमारी भगवान, अल्लाह, गाड सबसे एक ही उम्मीद और प्रार्थना है कि अब शायद कश्मीर में शांति आ जाये।शायद कश्मीर विवाद पर पाकिस्तान से टकराव खत्म हो जाये और अगर ऐसा होता है तो इससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता। लेकिन ये जो बडे बडे जुलूस, पटाखे, नारे और जश्न मनाने वाले जन्मजाती विद्वान लोग हैं, इनके पल्ले तो कुछ आने से रहा नही।
मियां, मेरा तो मानना है कि अगर अलगाववादियों की ओर कश्मीरियों को कोई वजह खीचे तो यह देश के हित में नहीं। इसलिये अलगाववादियों की न रस्सी रहे और न ही अलगाववादी तब तो कुछ अच्छा हो भी सकता है। खैर आज आप सब लोग नारे लगा रहे हो, एक तरह से खिसियान बंदरिया को परेशान कर रहे हो, इसके आगे का सोंचो, बंदरिया बिदक सकती है। नोच खरबोट सकती है। और नुकसान किसका है! देश का।
मियां सब लोग थोडा धैर्य रखो, कोई बड़ी बात न बोलो जो तुम्हारे कद से बड़ी हो। कश्मीर में हमारी सेना है, फोर्स चप्पे चप्पे पर है। अगर आप भडकाउ बात करेंगे तो वहां कत्लेआम की तैयारी की जायेगी और यही फासिस्ट चाहते हैं, पाकिस्तान भी यही दुआ कर रहा है और इजराईल की भी यही इच्छा है। महबूबा से लेकर अबदुल्ला तक धमकी दे रहे हैं। मेरे हिसाब कुछ मित्र देशों को छोड़कर पुरी दुनिया की आंखों में भारत खटकता है। जो विश्व की महाशक्ति बनने को आतुर है। ऐसे में देश की एकता अखण्डता को बनाये रखने में देश के साथ रहे।

 

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