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पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक हसन के खुलासे से अमेरिकी एजेंसियां हैरान, भारत में हुए हमलों की थी जानकारी

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद और इस्लामिक स्टेट के संपर्क में रहे पाकिस्तानी मूल के 35 वर्षीय एक अमेरिकी नागरिक वकार उल-हसन से पूछताछ में अमेरिकी खुफिया एजेंसियां भी हैरान हैं. अमेरिकी एजेंसी एफबीआई ने मंगलवार को उत्तरी कैरोलिना के चार्लोट डगलस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था.
गौरतलब है कि दोनों संगठन संयुक्‍त राष्‍ट्र द्वारा प्रतिबंधित है. हाल ही में फरवरी में हुए पुलवामा आतंकी हमले के आरोपी जैश-ए-मुहम्‍मद के प्रमुख मसूद अजहर को संयुक्‍त राष्‍ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित किया गया है, लेकिन ISIS और JeM से जुड़ें हसन की गिरफ्तारी ने कई नए सवाल खड़े कर दिए है. हसन ने कई तरह के खुलासे भी किए हैं.
बताते हैं कि वकार उल-हसन पाकिस्‍तान से 15 वर्ष की उम्र में अमेरिका चला गया था. अदालती दस्‍तावेजों के अनुसार वर्ष 2014 में संघीय जांच एजेंसी (एफबीआइ) को सूचना मिली कि हसन आतंकवादी संगठनों के संपर्क में है. वर्ष 2014 में उससे पहली बार पूछताछ हुई, लेकिन उसने आतंकवादी संगठनों से संपर्क की बात काे अस्‍वीकार कर दिया. एफबीआइ ने एक वर्ष बाद फिर हसन से पूछताछ की त‍ब उसने गुनाह कुबूल कर लिया. उसने यह स्‍वीकार किया वह आतंकी संगठनों के संपर्क में है. उसने स्‍वीकार किया कि वह जैश-ए-मुहम्‍मद व इस्‍लामिक स्‍टेट के संपर्क में था. अमेरिकी एजेंसियों की पूछताछ में हुए खुलासे के बाद भारतीय एजेंसियां भी हसन से मिली जानकारियों के लिए अमेरिका से संपर्क कर सकती हैं.

हसन का बड़ा कबूलनामा

  • पूछताछ में हसन ने दोनों आतंकी संगठनों के साथ व्‍यापक संपर्कों को स्‍वीकार किया. उसने जांच एजेंसी को बताया कि दोनों संगठनों के लिए भर्ती प्रक्रिया में मदद करता था. उसने आतंकी संगठनों में भर्ती होने वाले लोगों के फोन नंबरों के आदान-प्रदान की बात स्‍वीकर किया.
  • उसने दोनों संगठनों की चरमपंथी योजनाओं के बारे में भी बातचीत को स्‍वीकार किया है. हसन ने एजेंसियों को बताया है कि वह 2014 में दो या तीन दिनों तक जैश आतंकवादियों के साथ गुजारा है.
  • उसने बताया कि वर्ष 2013 में जैश-ए-मुहम्‍मद के आतंकियों की आर्थिक मदद और भोजन की व्‍यवस्‍था के लिए पाकिस्‍तान की यात्रा की.
  • हसन ने जांच एजेंसी को बताया कि पाकिस्‍तान के स्‍थानीय अखबार में जैश के लिए भर्तियां निकाली गईं. हसन ने स्‍वीकार किया कि वह जानता है कि जैश एक आतंकवादी समूह है.
  • अपने कबूलनामे में उसने बताया कि वर्ष 2013 एवं 2014 में गुजरात (पाकिस्‍तान) और उसके आसपास इलाके में जैश मुजाहिदीन के लिए तीन बार पैसा भेजा और उनके लिए भोजन का इंतजाम किया.
  • जैश मुजाहिदीन के साथ रहने के दौरान उन्‍होंने मुझे भारतीय हमले के बारे में जानकारी दी थी. उन्‍होंने आतंकी हमले का एक समाचार वीडियो भी दिखाया.
  • उसने बताया कि इस  बाबत उसने एक अखबार भी निकाला जो जैश मुजाहिदीन की भर्ती और पैसा इकट्ठा करने के लिए इस्‍तेमाल किया जाता था.

 

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