#AllahabadUniversity यौन उत्पीड़न में प्रोफ़ेसर पति के निलंबन पर प्रोफेसर पत्नी का कुलपति के खिलाफ साजिश

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
वैसे तो उच्च शिक्षण संस्थाओं की चर्चा एकेडमिक सफलताओं को लेकर ज्यादा होती है लेकिन कभी पूरब का ऑक्सफोर्ड कही जाने वाली #AllahabadUniversity इन दिनों एक ऐसे मामले को लेकर चर्चित हो गई है जो किसी भी शिक्षण संस्था काला धब्बा जैसी है. यह प्रकरण विश्वविद्यालय के एक ऐसे युगल प्रोफेसर की है जो हिन्दी विभाग में अध्यापन का कार्य करते हैं. दोनों के बीच में एक तीसरी महिला का भी जिक्र है. आरोप है कि तीसरी महिला ने गेस्ट फैकेल्टी के तौर पर विभाग ने पढ़ाना शुरू किया तो प्रोफेसर पति ने उस पर डोरे डालने की कोशिश की. शिकायतों की जांच के दौरान ही प्रोफेसर पति निलंबित हो गए तो प्रोफेसर पत्नी ने पति के समर्थन में कुलपति के खिलाफ ही अभियान छेड़ दिया. बुधवार को वायरल हुए इस ऑडियो में प्रोफेसर पत्नी दिल्ली की एक महिला से बातचीत कर यह कहते हुए सुनी जा रही हैं कि कुलपित को हटाने के लिए वह दिल्ली आने को तैयार हैं. दिल्ली की जिस महिला से बातचीत का जिक्र है वह भी कुलपति डॉ रतनलाल हांगलू के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा चुकी हैं लेकिन उनका आरोप राष्ट्रपति कार्यालय से लौट चुका है.
गौरतलब है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कार्य परिषद् ने मंगलवार को हिंदी हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर सूर्यनारायण सिंह को यौन उत्पीड़न के आरोप में दोषी पाने पर सर्वसम्मति से निलंबित कर दिया. निलंबन की जानकारी मिलते ही हिंदी विभाग में ही प्रोफ़ेसर के पद पर कार्यरत उनकी पत्नी प्रो लालसा यादव ने दिल्ली की एक महिला से बातचित की. लालसा यादव ने दिल्ली की महिला से फ़ोन पर 14 मिनट बात की. दिल्ली की महिला से फ़ोन पर इनकी आपसी बातचीत का ऑडियो कल रात को वायरल हो गया. लालसा यादव ने अपने ऑडियो में कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति को मिलकर हटाना होगा, इसके लिए वह दिल्ली जाने को भी तैयार हैं.
अब प्रो लालसा यादव के इस ऑडियो को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में तरह-तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं. सवाल यह भी है कि क्या प्रोफेसर लालसा यादव एक औरत की पीड़ा समझने के बजाए अपने पति को बचाने के लिए साजिश कर रही हैं? सामान्यतौर पर लोगों का कहना है कि पीड़ित महिला की शिकायत पर शुरुआती जांच में आरोपों में दम देखते हुए विश्वविद्यालय कार्यपरिषद ने सराहनीय कार्य किया है.
बता दें कि लंबे समय से चल रहे इस प्रकरण में अब तक आरोपों से बच निकलने वाले अन्य शिक्षकों की तरह हिन्दी विभाग के अध्यापक डॉ सूर्य नारायण सिंह सौभाग्यशाली नहीं रहे. विश्वविद्यालय प्रशासन ने डॉ सूर्य नारायण को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया है. उनके खिलाफ कर्नलगंज थाने में पुलिस जांच भी चल रही है. निलंबन अवधि में वह डीन कार्यालय से संबद्ध रहेंगे. संभवतः प्रोफेसर सूर्य नारायण चाहे/अनचाहे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उन चुनिंदा शिक्षकों के क्लब में शामिल हो गए हैं जो यौन उत्पीड़न के आरोप में निलंबित किए गए हैं. इस निर्णय से जेंडर जस्टिस को बल मिला है.
गौरतलब है कि हिन्दी विभाग के प्रोफेसर सूर्य नारायण के खिलाफ एक गेस्ट टीचर ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. यह मामला करीब 3 साल पुराना है. मामले की जांच के लिए कुलपति डॉ रतन लाल हांगलू ने तीन महिला टीचर्स की कमेटी बनाई थी. कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने डॉ सूर्य नारायण को निलंबित करने का फैसला किया है.
सूत्रों के मुताबिक डॉ सूर्य नारायण के खिलाफ हिन्दी विभाग में ही अध्यापन कार्य के लिए आई युवती ने यौन शोषण का आरोप लगाया था. उसने प्रकरण की शिकायत कुलपति से की है. महिला ने न सिर्फ विश्वविद्यालय प्रशासन से सूर्यनारायण के खिलाफ यौन उत्पीड़न शिकायत की थी बल्कि उसने कर्नलगंज थाने में इस मामले ने एफआईआर भी दज करवाई थी. इसके आधार पर पिछले दिनों पुलिस ने प्रो सूर्यनारायन के खिलाफ चार्जशीट भी दायर कर दी है.
इस मामले में प्रोफेसर सूर्य नारायण के बचाव में प्रोफेसर पत्नी लालसा यादव के कूद पड़ने से विश्वविद्यालय परिसर में हलचल मचना तय है. ऐसी भी चर्चा है कि विश्वविद्यालय में कुलपति के विरोधी गुट के रूप में सक्रिय कुछ शिक्षक भी इस मुद्दे पर लालसा यादव के साथ खड़े होकर पूर्व की तरह परिसर में हंगामा करा सकते हैं.

 

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