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मुलायम की आजमगढ़ सीट से लड़ेंगे अखिलेश यादव, रामपुर से जयाप्रदा के सामने आजम खां

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
बसपा प्रमुख मायावती ने भले ही लोकसभा चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया हो, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने पिता मुलायम सिंह यादव की सीट आजमगढ़ से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. सपा-बसपा-आरएलडी गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में अखिलेश यादव आजमगढ़ से 17वीं लोकसभा के लिए किस्मत आजमाएंगे. समाजवादी पार्टी की आज जारी सूची में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ वरिष्ठ नेता आजम खां का भी नाम है. आजम खां रामपुर से चुनाव लड़ेंगे.
इससे पहले खबरें थीं कि समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव अगला लोकसभा चुनाव अपनी पत्नी की सीट कन्नौज से लड़ सकते हैं. हालांकि, अखिलेश यादव इसके पहले यह दावा कर चुके हैं कि डिंपल यादव इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगी. ऐसा कहा जा रहा है कि अखिलेश ने अब इस चर्चा पर विराम लगा दिया है. हालांकि, कन्नौज से प्रत्याशी कौन होगा, अभी यह नहीं हुआ है.
आजमगढ़ से अभी मुलायम सिंह यादव सांसद हैं. मुलायम सिंह यादव इस बार मैनपुरी से चुनाव मैदान में उतरेंगे. अखिलेश यादव ने पहले ही संकेत दे दिया था कि वह आजमगढ़ से लोकसभा के प्रत्याशी होंगे. उन्होंने कहा था कि वहां की जनता की बेहद मांग है और वह इससे इनकार नहीं करेंगे. अखिलेश ने कहा कि मैं लोकसभा चुनाव लड़ूंगा, आजमगढ़ की जनता कहेगी तो वहां से लड़ूंगा. वो सीट मेरे घर जैसी है. अखिलेश यादव ने 2009 में कन्नौज सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी. उन्होंने 2012 में मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद सीट छोड़ दिया था. आजमगढ़ से अखिलेश यादव के उतरने से यहां लड़ाई मजबूत होनी तय है.
मोदी लहर के बावजूद 2014 में अखिलेश के पिता मुलायम सिंह यादव ने इस सीट से जीत दर्ज कर समाजवादियों के इस गढ़ पर अपनी पार्टी का कब्जा बरकरार रखा था. तब, भाजपा से रमाकांत यादव ने ताल ठोकी थी और मुलायम सिंह लगभग 63 हजार वोटों से ही चुनाव जीत सके थे. आजमगढ़ को समाजवादियों का गढ़ भी माना जाता है. यहां लंबे समय तक समाजवादी नेताओं का राज रहा है. 70 के दशक तक यहां कांग्रेस का राज रहा लेकिन बाद में समाजवादियों ने इस सीट पर कब्जा किया. बीच में यह सीट सपा और बहुजन समाज पार्टी में भी बंटती रही. 2009 में इस सीट पर बीजेपी भी कमल खिलाने में कामयाब रही थी.
उधर, रामपुर में भारतीय जनता पार्टी ने जयाप्रदा को चुनाव मैदान में उतारा है. सपा सांसद रहते हुए ही जयाप्रदा और आमज खां में छत्तीस के रिश्ते हो गए थे. बाद में यह रिश्ते और तल्ख हो गए. 2019 के लोकसभा चुनाव में जयाप्रदा और आजम खां के आमने-सामने होने से यह चुनाव रोचक होना तय है.

 

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