आराध्य राम को सुप्रीम कोर्ट में फिर टली सुनवाई, नई तारीख का पता नहीं

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स       
सुप्रीम कोर्ट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए सरकार की परेशानी बढ़ाने वाली खबर निकली है. सुप्रीम कोर्ट में 29 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर मामले पर होने वाली सुनवाई फिर टल गई है. इस बार तारीख के बारे में भी कोई सूचना नहीं है. इस बार सुनवाई हाल ही में अयोध्या मामले पर सुनवाई के लिए गठित पांच जजों की संविधान पीठ में शामिल जस्टिस एसए बोबेड की गैरमौजूदगी के कारण टली है. पांच जजों की इस बेंच में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोवडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अब्दुल नजीर हैं.

लोकसभा चुनाव के मुहाने पर खड़ी मोदी सरकार की मुश्किलें सुप्रीम कोर्ट में लगातार इस मामले के आगे खिसकते जाने के कारण बढ़ सकती हैं. विश्व हिन्दू परिषद और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ इसे लेकर लगातार सरकार को आंखें दिखा रहे हैं. इसी बीच 30 जनवरी से प्रयागराज कुंभ मेला में विहिप शिविर में संत सम्मेलन भी होना है. माना जा रहा है कि इस सम्मेलन में राम मंदिर को लेकर कोई फैसला हो सकता है. संतों और विहिप पदाधिकारियों में फैली नाराजगी के कारण यह आशंका भी खड़ी हो गई है कि चुनाव को देखते हुए संत सम्मेलन कोई ऐसा फैसला भी कर सकता है जो सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दे. आम जनता में भी यह संदेश जा रहा है कि राम मंदिर मामले में सरकार कोई प्रभावी कदम नहीं उठा रही है. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरे मंत्री भी सुप्रीम कोर्ट में इस मामले के लटकने का दोष कांग्रेस पर मढ़ते आ रहे हैं.
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या 2.77 एकड़ भूमि विवाद से संबंधित मामले में 14 अपीलें दायर की गई है. यह सभी अपील 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2:1 के बहुमत के फैसले के खिलाफ है. इस फैसले में हाईकोर्ट ने विवादित भूमि को भूमि सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान के बीच बराबर- बराबर बांटने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मई, 2011 को स्टे का ऑर्डर दिया था. पिछले दिनों मामले की सुनवाई के लिए पांच जजों की बेंच का गठन किया गया था. इस बेंच में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा अलावा जज जस्टिस एसए बोवडे, जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल थे.
बेंच में शामिल जस्टिस यूयू ललित को लेकर मुसलिम पक्षकारों के अधिवक्ता राजीव धवन ने सवाल उठा दिए थे. दरअसल, जस्टिस यूयू ललित अयोध्या विवाद से ही संबंधित एक अन्य मामले में अधिवक्ता की हैसियत से पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की ओर से पेश हो चुके हैं. इस सवाल के बाद खुद जस्टिस यूयू ललित ने अपने आपको बेंच से अलग कर लिया था. इसके बाद उनकी जगह पर जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस एनवी रमन्ना की जगह पर जस्टिस अब्दुल नजीर को बेंच में शामिल किया गया था.
बीते दिनों चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने नई बेंच का गठन किया था और मामले की सुनवाई के लिए 29 जनवरी का दिन मुकर्रर किया था. इससे पहले इस मामले में अधिवक्ता हरी नाथ राम ने एक याचिका दायर करते हुए कहा था कि इस मामले की अनिश्चितकाल के लिए टाला नहीं जा सकता और सुप्रीम कोर्ट को इस पर जल्द सुनवाई करे.

 

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