नासा, नासा के अनुसार शुन्य ग्रेविटी क्षेत्र का अंतरिक्ष यात्रियों पर पड़ता है बुरा असर

नासा के अनुसार शुन्य ग्रेविटी क्षेत्र का अंतरिक्ष यात्रियों पर पड़ता है बुरा असर

नासा, नासा के अनुसार शुन्य ग्रेविटी क्षेत्र का अंतरिक्ष यात्रियों पर पड़ता है बुरा असर
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
नासा के अनुसार अगर हम अंतरिक्ष की दुनिया को ज्यादा से ज्यादा समझना चाहते हैं। चाहे फिर हमें मंगल पर जाना हो या चांद पर, इसके लिए हमें पहले शुन्य ग्रेविटी क्षेत्रों में अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर पर पड़ने वाले असर को समझना होगा। बहुत अधिक समय तक शुन्य ग्रेविटी क्षेत्र में रहने से अंतरिक्ष यात्रियों के शारीरिक तथा मानसिक स्थिति पर प्रभाव पड़ता है। यह तो तय है, इसे समझने के लिए नासा प्रयासरत है। इसके लिए नासा द्वारा किए गए प्रयोगों से यह तो सिद्ध हो गया की,मांसपेशियों के भार तथा हड्डियों पर गुरुत्वाकर्षण या शुन्य गुरुत्वाकर्षण का कोई विपरीत असर नहीं पड़ता है। लेकिन मानव मस्तिष्क और रक्त के प्रवाह पर शून्य गुरुत्वाकर्षण का असर पड़ता है। यह किस हद तक मानव शरीर को प्रभावित करता है, इसे समझने के लिए नासा के द्वारा एक प्रयोग किया गया।
अगर हम रक्त प्रवाह की बात करें तो नासा के शोधकर्ताओं का कहना है, कि बहुत लंबे समय तक शुन्य गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में रहने से अंतरिक्ष यात्री अपने शरीर के ऊपरी हिस्सों में रक्त के जमने का असर अनुभव कर सकते हैं। खासतौर पर यह मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है। इसके साथ ही शुन्य गुरुत्वाकर्षण से रक्त का प्रवाह उल्टा भी होने लगता है। इसे समझने के लिए नासा के शोधकर्ताओं ने 11 स्वस्थ अंतरिक्ष यात्रियों के ऊपर अल्ट्रासाउंड परीक्षण कर डाटा इकट्ठा किया। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अंतरिक्ष जैसा वातावरण बनाया गया था।
इन अंतरिक्ष यात्रियों ने पूरे 6 माह यहां पर बिताये। 50 वें दिन में अंतरिक्ष यात्रियों को रक्त प्रवाह में रुकावट या रक्त के उल्टे बहने का अहसास हुआ। इनमें से कई के रक्त में थक्का भी जमने लग गया था। अगर इनमे थक्का बनने लगे तो हृदय से मस्तिस्क तक ऑक्सीजन का पहुंच पाना असंभव हो जाएगा। यह बहुत ही असामान्य है, पृथ्वी में ऐसा होने पर ट्यूमर का खतरा भी हो सकता है।

 


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