Nationalwheels

जरा सी जागरूकता अचानक कार्डियक अरेस्ट के बाद भी धड़का सकता है किसी का दिल

जरा सी जागरूकता अचानक कार्डियक अरेस्ट के बाद भी धड़का सकता है किसी का दिल
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
प्रयागराज: अचानक पड़े दिल के दौरे के 95 फीसदी पीड़ित जीवन का सुनहरा अध्याय खो देते हैं. एक अध्ययन के अनुसार भारत में प्रत्येक वर्ष दिल की बीमारियों से होने वाली मौतों में से लगभग तीन फीसदी का कारण अचानक कार्डियक अरेस्ट बनता है यानी करीब सात लाख लोग प्रत्येक वर्ष अचानक कार्डियक अरेस्ट के शिकार हो जाते हैं. जबकि थोड़ी सी जागरूकता होने पर इनमें से बहुतेरे लोगों का जीवन बचाया जा सकता है.
तीन फीसदी इन मौतों को रोकने के लिए इंडिया मेडट्रॉनिक प्राइवेट लिमिटेड, मेड्ट्रोनिक पीएलसी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ने ‘चिरंजीव हृदय: सीपीआर सीखो, दिल धड़कने दो’ अभियान की शुरुआत की है. इस अभियान का उद्देश्य अचानक हृदय की गति बंद होने यानी अचानक कार्डियैक अरेस्ट  (एससीए) के बारे में जागरूकता बढ़ाना और लोगों को केवल हाथों से सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी पुनर्जीवन) में प्रशिक्षित करना है. इस अभियान में लोगों को स्वचालित बाहरी डिफिब्रिलेटर (AED) का उपयोग करने के लिए भी प्रशिक्षित किया जा रहा है. यह अभियान #कुंभ2019 में लगभग 10,000 लोगों को कार्डिएक अरेस्ट के दौरान सीपीआर की जीवनरक्षक आपातकालीन प्रक्रिया करने के लिए प्रशिक्षित करने का बीड़ा उठाया.

यह है समस्या

बताया गया कि अचानक कार्डियक अरेस्ट (एससीए) दिल की एक विद्युत समस्या है जो खतरनाक रूप से तेज हृदय गति (वेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया) या अनियमित लय (वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन) को ट्रिगर करती है. अगर तुरंत इलाज न किया जाए तो एससीए घातक हो सकता है. एससीए के संकेतों में बेहोशी और अनियमित सांस लेना या सांस नहीं लेना शामिल है. सीपीआर या कार्डियो-पल्मोनरी रिससिटेशन, एक मरीज की धड़कन को फिर से शुरू करने में मदद करने के लिए एक तकनीक है. हाथों से सीपीआर को तुरंत शुरू किया जा सकता है. प्रदाता को केवल मरीज की छाती के केंद्र में लगभग 2-2.4 इंच की गहराई में तेज धक्का देने की आवश्यकता होती है. ये क्रियाएं जीवित रहने की श्रृंखला में महत्वपूर्ण हैं और जितनी जल्दी हो सके, लागू करने की आवश्यकता होती है. यह मदद न मिलने पर पीड़ित की मौत मिनटों में हो सकती है.

फौरन करें यह काम

नई दिल्ली स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल साकेत की इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट और सीनियर डायरेक्टर कैथ लैब डॉ. विवेका कुमार ने कहा, “अगर आपके पास बैठा व्यक्ति जमीन पर गिर जाए और सांस लेना बंद कर दे, तो आप क्या करेंगे? क्या आप एम्बुलेंस को कॉल करेंगे और उसके आने का इंतजार करेंगे? अथवा आप अपने घुटनों पर बैठ जाएंगे और मरीज की छाती को संकुचित करना शुरू कर देंगे. यदि ऐइडी पास होता, तो क्या आपको इसका उपयोग करने का विश्वास होगा? यह जानना लाजिमी है कि हृदय संबंधी आपात स्थिति में क्या करना चाहिए और मदद के लिए क्या कदम बढ़ाना चाहिए. भारत में कोई स्पष्ट डेटा उपलब्ध नहीं है, लेकिन अध्ययनों के माध्यम से यह अनुमान लगाया जाता है कि अचानक कार्डियक अरेस्ट के कारण होने वाली मौतों का वार्षिक आंकड़ा देश में लगभग 7 लाख है. यही नहीं, अचानक कार्डियक अरेस्ट का अनुभव करने वाले 95% लोग मर जाते हैं क्योंकि उन्हें छह मिनट तक कोई जीवन रक्षक चिकित्सा नहीं मिलती है.”
मेडट्रोनिक इंडियन सब कॉन्टिनेंट के वाईस प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर मदन कृष्णन ने कहा,” हैंड्स-ओनली सीपीआर एक शक्तिशाली उपकरण है. जिसे सीखने में केवल 30 मिनट लगते हैं और पीड़ित के बचने की संभावना को दो या तीन गुना बढ़ जाती हैं. दिव्य कुम्भ 2019 के अवसर पर चिरंजीव ह्रदय जैसे अनोखे  अभियान को शुरू करने में मेडट्रॉनिक बहुत गौरवान्वित है. इस अभियान का उद्देश्य रहा कि कुम्भ मेले में 10,000 लोगों को सीपीआर ट्रेनिंग देना.
मुख्य तौर पे फर्स्ट रेस्पॉन्डर्स जैसेकि पुलिस और अग्नि विभाग के कार्यकर्ताओं को सीपीआर ट्रेनिंग दी गई. मदन कृष्णन के अनुसार अगले 6 महीनों में इन प्रशिक्षणों को देशभर के कई शहरों में दिया जाएगा. 20,000 से अधिक लोगों सीपीआर ट्रेनिंग देने की योजना हैं. हमारी दृष्टि भारत में गैर-संचारी रोगों के लिए निदान, उपचार और पुनर्प्राप्ति में सुधार पर सरकार के फोकस के साथ संरेखित है. हमारे सहयोगियों के साथ हमारे पास अचानक कार्डियैक अरेस्ट के बारे में जागरूकता बढ़ाने और अधिक लोगों को प्रशिक्षित करने का अवसर है जो उन क्षणों में जीवन-रक्षक देखभाल प्रदान करते हैं जो सबसे ज्यादा मायने रखते हैं. यह दूसरों के साथ साझेदारी में काम करने के लिए मरीज के परिणामों में सुधार के प्रति चल रही हमारी प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है.”

 

Nationalwheels India News YouTube channel is now active. Please subscribe here

(आप हमें फेसबुकट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंकडिन पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *