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#नूपुर_शर्मा: बदनाम जो होंगे तो क्या नाम नहीं होगा ?

#नूपुर_शर्मा: बदनाम जो होंगे तो क्या नाम नहीं होगा ?

प्रमोद शुक्ल

प्रयागराज: पार्टी से निलंबित भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के पैगंबर पर दिए बयान को लेकर पूरे देश में कट्टरपंथी हिंसा के साथ विरोध कर रहे हैं। नूपुर शर्मा ने भी एक डिजिटल पत्रकार पर तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत कर बवाल कराने का मुकदमा कराया है। गलत-सही का फैसला अब न्यायालय से होना है। इस बीच ज्योतिषीय संसार में भी नूपुर शर्मा के भविष्य को लेकर विमर्श रोचक हो चुका है।

गूगल बाबा के अनुसार यह कुंडली उसी की बताई जा रही है जिसके एक बयान से पूरी दुनिया में ‘तूफान’ आ गया। जिज्ञासा हुई कि आखिर ग्रहों के ऐसे कौन से योग हैं जो एक-दो हफ्ते में ही पूरी दुनिया में चर्चित कर सकते हैं ?
सबसे पहले तो यह जान लीजिए कि यदि यह कुंडली सही है तो महादशा गुरु की और अंतर्दशा संभवतः पिछले पखवाड़े ही बुध की शुरू हुई है।
एक जुमला है कि “बदनाम जो होंगे तो क्या नाम नहीं होगा ?” अमिताभ बच्चन ने बताया है कि “जो है नाम वाला, वही तो बदनाम है” लेकिन इसकी दूसरी लाइन भी आज बहुतों की ज़ुबां पर है, “#मेरे_अंगने_में तुम्हारा क्या काम है ?” अब इनका काम है या नहीं है और कितना काम अभी बचा है, आइये समझने की कोशिश करते हैं थोड़ा ज्योतिष के माध्यम से…

यह कुंडली देखने पर सबसे पहले तो इस ओर ध्यान जाता है कि इसमें 3 ग्रह उच्च के और दो ग्रह नीच के हैं। सूर्य, चंद्रमा और शुक्र उच्च के हैं। मजेदार बात यह है कि उच्च का सूर्य जहां भाग्य भाव में लग्नेश हो कर बैठा है, वहीं उच्च का चंद्रमा कर्म स्थान में अपने मित्र मंगल के साथ है। ऐसा मंगल जो सिंह लग्न की कुंडली में सबसे ज्यादा कारक यानीकि प्रभावशाली ग्रह माना गया है। यह मंगल शनि के साथ समसप्तक राजयोग बनाता हुआ अपनी चतुर्थ शुभ दृष्टि से लग्न को भी देख रहा है। मंगल क्योंकि राजयोगकारी है इसलिए इसने अपने साथी चंद्रमा को भी राजयोगकारी बना दिया है, क्योंकि सिद्धांत यही कहता है कि द्वादश स्थान का स्वामी जिसके साथ बैठता है या जिसके घर में बैठता है उसी के सारे गुण आत्मसात कर लेता है। अर्थात उच्च का चंद्रमा भी कर्म स्थान में राजयोगकारी हो गया है।

जो दो ग्रह नीच के हैं, उनमें से एक बृहस्पति का नीचभंग राजयोग भी है, क्योंकि गुरु की नीच राशि मकर का स्वामी शनि केंद्र स्थान में बैठा है और मकर राशि पर उच्च का होने वाला मंगल भी केंद्र स्थान में बैठा है। इससे बृहस्पति का नीचभंग राजयोग बन गया है। #नीचभंग_राजयोग के बारे में ऋषियों का कथन है कि ऐसा जातक बहुत ही जमीन से उठता है और आसमान तक का सफर तय करता है।

ऐसे ही राजयोग पर वह गाना पूरी तरह से फिट बैठता है, “बैठा दिया फलक पे, मुझे ख़ाक से उठाकर…” जी हां, ऐसे ही ग्रह होते हैं जो खाक से उठाकर फलक तक बैठाने की ताकत रखते हैं। खासतौर से नीचभंग राजयोग यदि मजबूत हो तो बहुत ही जमीन का आदमी आसमान तक की ऊंचाई हासिल करता है… और आप देख ही रहे हैं कि पिछले 2 सप्ताह के भीतर यह जातक विश्व स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है। वह बात अलग है कि जहां एक ओर इनके चाहने वालों की तादाद राकेट गति से बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर इनसे नफरत करने वाले भी अचानक हजारों लाखों की संख्या में पैदा हो गए हैं।

यह नफरत क्यों है, इसे भी आप आसानी से समझ सकते हैं। जब लग्नेश सूर्य अपने शत्रु राहु के साथ भाग्य भाव में हो,, तो राहु के जातक सूर्य के इस जातक से नफरत तो करेंगे ही करेंगे और आला दर्जे की नफरत करेंगे,, सूर्य और राहु का यह प्रत्यक्ष टकराव पिछले एक सप्ताह में जगह-जगह, शहर-शहर में अनेक स्थानों पर प्रत्यक्ष रूप में देखा जा रहा है।

खास बात यह है कि राहु और सूर्य के इस ‘युद्ध’ का नतीजा क्या होगा… जब नतीजे के बारे में सोचते हैं तो वर्तमान महादशा और अंतर्दशा को देखना जरूरी हो जाता है। महादशा तो बृहस्पति की जरूर है, परंतु अंतर्दशा जिसकी है वह बुध नीच का होकर अष्टम स्थान में बैठा है। नीच के इस बुध ने वाणी स्थान को देखकर वाणी को जो चपलता दी है, उसी वाणी के कारण ही यह जातक अचानक लाखों-करोड़ों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

आखिर बुध की अंतर्दशा क्या फल दे सकती है,, इसके बारे में जब मैंने शास्त्रों में देखा तो पता चला कि जातक के लिए इस अंतर्दशा के दौरान जीवन के खतरे तो बहुत ही गंभीर हैं, क्योंकि यह बुध अष्टम में बैठकर करीब करीब मार्केश जैसी भूमिका में आ गया है।

#धैर्य_रखिए… अभी और भी बहुत कुछ शेष है इस कुंडली में… यदि इस जातक की चंद्र कुंडली का बारीकी से निरीक्षण करेंगे तो पाएंगे कि चंद्र कुंडली में बुध और शुक्र की युति राजयोग बना रही है। यह राजयोग जिस मीन राशि पर बना है उस मीन राशि का स्वामी गुरु भी इस #राजयोग_के_गुणों_से_अमृतमय हो गया है। अर्थात महादशा का स्वामी गुरु सिर्फ नीचभंग राजयोग ही नहीं बना रहा है बल्कि उसके घर में बुध और शुक्र की युति भी चमत्कारी है। #नवमांश_चार्ट पर भी एक निगाह जरूर डालिए, क्योंकि वहां नीच का यही गुरु अपनी उच्च राशि कर्क पर विराजमान है।

अब एक और #राज_की_बात … लग्नेश यदि भाग्य भाव में राहु या केतु के साथ हो तो जीवन के किसी मोड़ पर अचानक ऐसा ही तूफान जरूर आता है। वह तूफान जातक को कहां से कहां पहुंचाएगा, इसका अनुमान लगाना बड़े-बड़े ज्योतिषाचार्यों के लिए भी कठिन हो जाता है। इस जातक के लिए यह उसी तूफान का दौर है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि लग्नेश सूर्य अपने प्रबल शत्रु राहु के साथ होने के कारण जितना ज्यादा घातक है, उतना ही शुभ फल देने वाला भी है,, क्योंकि सूर्य और राहु की यह युति भी राजयोगकारी है और जब आप #सूर्य_कुंडली देखेंगे, तब वहां तो यह प्रचंड राजयोग अपने विकराल रूप में उभर कर सामने आ जाता है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं ज्योतिषाचार्य हैं।)

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