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जम्मू-कश्मीर से 72 कंपनी केंद्रीय बल होंगे वापस, गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला

जम्मू-कश्मीर से 72 कंपनी केंद्रीय बल होंगे वापस, गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला

देश के बड़े हिस्से में #CAA_NRCProtests को लेकर चल रहे बवाल और हिंसा की खबरों के बीच गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर को लेकर बड़ा ऐलान किया है.

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
देश के बड़े हिस्से में #CAA_NRCProtests को लेकर चल रहे बवाल और हिंसा की खबरों के बीच गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर को लेकर बड़ा ऐलान किया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने धारा 370 की तैनाती के ठीक पहले  जम्मू-कश्मीर में तैनात की गई अतिरिक्त 72 कंपनी केंद्रीय सुरक्षा बलों को वापस बुलाने का फैसला किया है. केंद्रीय शासन के अधीन आ चुके जम्मू-कश्मीर से सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और एसएसबी की ये कंपनियां देश के दूसरे हिस्सों में तैनात हो सकती हैं.
5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से धारा-370 और 35ए के ऐलान के ठीक पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य में बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को भेजा था. धारा 370 हटने के बाद आशंका थी कि राज्य में बड़े पैमाने पर हिंसा हो सकती है. राज्य के लोग हिंसा कर सकते हैं लेकिन आशंकाओं के विपरीत राज्य में व्यापक शांति रही. छिटपुट घटनाओं और आतंकियों के गिनती के छोटे हमलों को छोड़कर एक भी बड़ी वारदात नहीं हुई हुई. विपक्षी राजनैतिक दलों के विरोध के बाद भी राज्य की जनता ने सुरक्षा बलों के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ना शुरू कर दिया है. आतंकियों की धमकियों का भी राज्य में ज्यादा असर नहीं हुआ.
हालांकि, आतंकियों ने सेब के बागान मालिकों और सेब लेकर निकलने वाले ट्रक चालकों पर भी हमले किए लेकिन उन्हें राज्य के अंदर कोई बड़ा समर्थन हासिल नहीं हुआ. शुरुआती दौर में शासन ने राज्य में व्यापक पैमाने पर प्रतिबंध लगाए थे लेकिन अब ज्यादातर प्रतिबंध खत्म हो चुके हैं. जनता को भड़काने में अहम भूमिका निभाने वाले राज्य के कुछ नेता अलबत्ता नजरबंद हैं. नेताओं के हिरासत में होने के कारण जनता भी खामोश है.
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर से केंद्रीय आर्मर्ड पुलिस बल से जुड़ीं सीआरपीएफ की 24 कंपनी, बीएसएफ की 12, आईटीबीपी की 12, सीआईएसएफ और एसएसबी की 12-12 कंपनियां वापस हो रही हैं. खुफिया रिपोर्ट में राज्य में शांति व्यवस्था लौटने की संभावना जताए जाने के बाद केंद्रीय सुरक्षा बलों को वापस बुलाने का फैसला हुआ है.
फिलहाल, वर्तमान में सीएए और एनआरसी के खिलाफ विपक्षी दलों के सहयोग से मुस्लिम संगठन हिंसक आंदोलन चला रहे हैं. हैरत इस बात की है कि विपक्ष के नेताओं ने सीएए और संभावित एनआरसी का विरोध कर रहे हैं लेकिन हिंसा के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोल रहे हैं. हालांकि, भाजपा शासित  उत्तर प्रदेश में हिंसा करने वालों और उनके समर्थकों के खिलाफ राज्य सरकार बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर रही है. अब तक करीब 10500 से ज्यादा एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं. साथ ही बड़ी संख्या में लोग गिरफ्तार भी हो रहे हैं.

 


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