कुंभ की आभा देखने प्रयाग पहुंचे 61 देशों के प्रतिनिधि, संगम पर फहराया झंडा

राजीव जायसवाल           

मोदी और योगी की सरकार में प्रयागराज का कुंभ पहली बार दुनिया की निगाहों में ऐसे भव्य तरीके से पहुंचने जा रहा है. शनिवार को 61 देशों के राजदूत प्रयाग पहुंचे. संगम की रेती पर सभी देशों के झंडे शान-ओ-शौकत के साथ लहराए गए. सभी देशों के प्रतिनिधियों ने अपने देशों के झंडों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाई. 

विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह के साथ पहुंचे विदेशी राजनयिक सुबह एयरपोर्ट से संगम लाए गए. यहां से क्रूज बोट से नैनी क्षेत्र में अरेल घाट ले जाए गए. अरेल घाट पर ही 64 देशों के झंडे लगाए गए थे. इनमें तीन तिरंगे लहरा रहे थे. बाकी 61 देशों के झंडे लगाए गए. इसके पहले समारोह पूर्वक उद्घाटन किया गया. प्रदेश सरकार की ओर से स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने सभी मेजबानों की आगवानी की. बाद में सभी को संगम की प्राचीनता, धार्मिकता और ऐतिहासिकता से परिचित कराया गया. 
इसके पहले एयरपोर्ट पर सभी राजनयिकों का स्वागत किया गया. स्कूलों की बच्चियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए विदेशी मेहमानों का स्वागत किया.

पर्यटन और रोजगार को बढ़ाने की पहल

संगम की रेती पर डेढ़ महीने तक बसने वाले अस्थाई पवित्र धार्मिक कुंभ नगर को प्रदेश और केंद्र की सरकारें पहली बार दुनियाभर में प्रचारित कर रही हैं. देश के कई बड़े एयरपोर्ट पर चलो कुंभ-2019 की ओर… जैसे स्लोगन पर्यटन विभाग पहले ही लगा चुका है. विदेशी पर्यटकों को प्रयागराज की धरती तक खींचकर लाने और संगम को पर्यटन सिटी के रूप में स्थापित करने का सरकार प्रयास कर रही है. सरकार का दावा है कि इससे प्रयागराज के बेरोजगार युवकों को रोजगार का नया आयाम मिलेगा. साथ ही शहर के विकास में भी यह अहम योगदार देगा.

इन देशों के पहुंचे राजनयिक

अंगोला, अर्जेंटीना, आस्ट्रिया, अजरबैजान, बोलीविया, बुर्किनाफासो, बुरुंडी, कनाडा, कंबोडिया, कोस्टारिका, क्रोएशिया, क्यूबा, जुबैती, डोमिनीशन रिपब्लिक, इजिप्ट, ईआई सल्वाडोर, ईक्वैट्यूरियल जीनिया, ईरीट्रिय़ा,  ईथोपिया, गेबान, गैंबिया, जार्जिया, ग्रीक, ज्यूनिया, कोरिया, किर्गिस्तान, इंडोनेशिया, ईराक, लिसोथो, लीबिया, लिथ्यूनिया, लग्जमबर्ग, मेडागस्कर, मालावी, मलेशिया,  माली, माल्टा, मारीशस, मैक्सिको, मोरक्को,  न्यूजीलैंड, नाइजीरिया,  नार्वे,  पैलेस्टाइन, पैराग्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, सेनेगल, सर्बिया, स्लोवोक रिपब्लिक, दक्षिण अफ्रीका, सूडान, सोमालिया, सूरीनाम, तंजानिया, त्रिनिदाद, ट्यूनीशिया,  यूक्रेन, वेजेजुएला, उज्बेकिस्तान, वियतनाम, जांबिया और जिंबाबे.

इसके साथ ही अफगानिस्तान के मौलाना खैरुल्लाह आजाद, बांग्लादेश के सैयद मोज्जम अली, भूटान के मेजर जनरल वेत्सुप, नेपाल के भरत कुमार रेग्मी, श्रीलंगा के आस्टिन फर्नांडो शामिल हैं. चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के राजनियक नहीं पहुंचे हैं.

 

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