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22 दिन पैदल चलकर मुंबई से सुल्तानपुर पहुंचा, घर पहुंचने से पहले हुआ क्वारेन्टीन

22 दिन पैदल चलकर मुंबई से सुल्तानपुर पहुंचा, घर पहुंचने से पहले हुआ क्वारेन्टीन

सुल्तानपुर। परदेश गए तो थे सपने संवारने लेकिन कोरोना का कहर ऐसा बरपा कि अपनो की याद में कुछ भी कर गुजरने की ठान ली

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
जीतेन्द्र श्रीवास्तव
सुल्तानपुर। परदेश गए तो थे सपने संवारने लेकिन कोरोना का कहर ऐसा बरपा कि अपनो की याद में कुछ भी कर गुजरने की ठान ली। ऐसा ही एक युवक सोमवार को सुबह सुलतानपुर पैदल चलकर आया। लेकिन घर पहुंचने से पहले जिम्मेदारों की नजर पड़ी। युवक अब 14 दिन के लिए क्वारेन्टीन हो गया है।
बात सुबह आठ बजे की है। कंधे पर बैग लटकाए एक नवयुवक पुलिस लाइन्स से होकर कुड़वार की ओर जा रहा था। फ्लाईओवर के पास पहुंचा तो निराला नगर चौकी इंचार्ज मंजू देवी की उसपर नजर पड़ी। उसकी झूमती थकी हारी चाल पर कुछ शक हुआ। वे मातहत सिपाही के साथ जब तक पीछा करती वो निरालानगर सभासद सुधीर तिवारी के मकान तक पहुंच गया।
वहीं वर्दीधारियों ने उसे रोककर पूछ ताछ शुरू कर दी। तब तक सभासद तिवारी व उनके पिता शिवकुमार तिवारी भी घर से निकल आये। दोनों ने गौर से देखा तो लड़का जाना पहचाना लगा। पूछते ही बताया कि वह उन्हीं के गांव कुड़वार थानांतर्गत निरसहिया के कालीचरण निषाद का बेटा राजेश निषाद है। फिर पैदल यात्रा से थके व भूख से विह्वबल युवक को पहले भोजन दिया गया।
तभी नेशनल व्हील प्रतिनिधि वहां आ गए। जब कुछ हिम्मत बनी तब राजेश ने बताया कि वह पिछले साल कमाई करने मुम्बई गया था। लॉकडाउन हुआ तो काम धंधा ठप हो गया। खाने रहने की समस्या होने लगी तो घर आने का फैसला किया रेल बन्द होने के कारण 22 दिन पैदल ही चल पड़ा उनके साथ गाजीपुर व गोरखपुर के दो युवक थे। जो अभी पीछे रह गए हैं।

प्रयागराज में पुलिस ने पकड़ा तो जांच व भोजन करवा कर छोड़ दिया। वहां से चला तो रास्ते मे मोतिगरपुर थाने के पांडे बाबा व कोतवाली देहात के दोमुंहा निवासी दो लड़के भी मिल गए। सब साथ ही आये।
पयागीपुर से सब अलग हुए तो वह यहां आ गया। अपने घर गांव के लोग मिले है तो जान में जान आयी है। यह कहानी सुनते ही दरोगा मंजूरानी ने कंट्रोल में सूचना देकर युवक को क्वारेन्टीन करने की व्यवस्था करने लगीं। वह साथ लेकर चौकी की ओर चल पड़ीं। राजेश ने बताया कि रास्ते मे बहुत लोग मिले। कई स्थानों पर भोजन कराया गया पर जो सुकून अब मिल रहा वो परदेश में कमाई गयी रकम से गुना ज्यादा है। कम से कम घर वाले यह तो जान गए कि जिंदा हूँ और दो हफ्ते बाद मिलूंगा भी… चायनीज वायरस कोरोना के संक्रमण पर काबू पाने के लिए सबसे कारगर उपाय लॉकडाउन से यह तो तय है कि इसमें जिंदगी संकट में जरूर है पर जान सुरक्षित है।

हरियाणा से पहुंचे 103 श्रमिक

हरियाणा से बसों के जरिए सुल्तानपुर पहुंचे 103 श्रमिक समेत अन्य नागरिक। पयागीपुर चौराहा स्थित गनपत सहाय महाविद्यालय में ठहराए गए श्रमिक। एसडीएम सदर रामजीलाल मौके पर, की जा रही श्रमिकों की खानपान की व्यवस्था। जिला अधिकारी व पुलिस अधीक्षक पहुंचे गनपत सहाय महाविद्यालय, लिया व्यवस्था का जायजा। स्वास्थ्य विभाग की टीम कर रही स्क्रीनिंग। ‌ 14 दिन श्रमिकों के क्वॉरेंटाइन की सूचना।

 


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