hindi news, #Kashmir में 100 फीसदी टेलीफोन लाइनें और दो जिलों में मोबाइल सेवाएं भी बहाल, यूरोपीय यूनियन का भी मिला साथ

#Kashmir में 100 फीसदी टेलीफोन लाइनें और दो जिलों में मोबाइल सेवाएं भी बहाल, यूरोपीय यूनियन का भी मिला साथ

hindi news, #Kashmir में 100 फीसदी टेलीफोन लाइनें और दो जिलों में मोबाइल सेवाएं भी बहाल, यूरोपीय यूनियन का भी मिला साथ
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को खत्म किए जाने के बाद लागू प्रतिबंधों में अब काफी ढील मिल चुकी है. मोहर्रम के कारण तीन दिनों तक लागू प्रतिबंध भी ढीले कर दिए गए हैं. जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से दावा किया गया है कि पूरी घाटी में 100 फीसदी टेलीफोन लाइनें चालू कर दी गई हैं. साथ ही उत्तरी कश्मीर के दो पुलिस जिलों कुपवाड़ा और हंदवाड़ा में मोबाइल सेवाएं भी बहाल कर दी गई हैं. दूसरी ओर से यूरोपीय के पूर्व प्रमुख ने भी कहा है कि कश्मीर से धारा 370 खत्म होने के बाद स्थानीय लोगों को नौकरी, कारोबार और विकास के ज्यादा मौके हासिल होंगे. उधर, कश्मीर मुद्दे को लेकर पाकिस्तान की कुटिल साजिशें यथावत जारी हैं.
जम्मू-कश्मीर प्रशासन के प्रवक्ता रोहित कंसल ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि घाटी में 100 फीसदी टेलीफोन लाइनें चालू कर दी गई हैं. मोबाइल सेवाओं में भी धीरे-धीरे ढील दी जा रही है. उत्तरी कश्मीर के दो जिलों कुपवाड़ा और हंदवाड़ा में मोबाइल सेवाएं भी चालू कर दी गई हैं. रोहित ने उम्मीद जताई कि चरणबद्ध तरीके से स्थिति सामान्य होने के दौरान मोबाइल सेवाएं भी पूरी तरह से बहाल कर दी जाएंगी. हालांकि, आतंकी घटनाओं की आशंका के मद्देनजर सुरक्षा के तगड़ॉे बंदोबस्त अभी जारी रहेंगे. अतिरिक्त सुरक्षा बलों की वापसी का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है.
दूसरी ओर यूरोपियन कमीशन के पूर्व डायरेक्टर ब्रायन टोल ने गिलगित-बाल्टिस्तान को तकनीकी रूप से भारत का हिस्सा बताया है. टोल ने यह बयान अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद इस मुद्दे पर बोलते हुए दिया. उन्होंने आगे कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाने से वास्तव में कश्मीर के लोगों को आर्थिक अवसर मिलेंगे.
टोल ने कहा कि यह बहुत जरूरी है कि गिलगित-बाल्टिस्तान के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जगह मिले. यह पूरा मुद्दा बहुत ही जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि यहां के लोगों को अपनी आवाज मिलनी चाहिए. इस आवाज को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के जरिए नियंत्रित नहीं किया जाना चाहिए.

पाक ने छीन रखे हैं गिलगित-बाल्टिस्तान के अधिकार

टोल ने गिलगित-बाल्टिस्तान के इलाके के बारे में कहा, आर्थिक अवसरों के अलावा इलाके के लोगों को प्रासंगिक राजनीतिक संगठनों में प्रतिनिधियों के तौर पर चुना जाए, यह भी जरूरी है. जबकि पाकिस्तान भारत के जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के मुद्दे पर रोना-पीटना मचाए हुए है. जबकि उसने गिलगित-बाल्टिस्तान के इलाके में लोगों के अधिकार भी छीन रखे हैं. पिछले साल 21 मई को इमरान खान के नेतृत्व वाली पीटीआई सरकार ने ‘गिलगित-बाल्टिस्तान ऑर्डर, 2018’ जारी किया था. इस तरह से ‘गिलगित-बाल्टिस्तान इंपावरमेंट एंड सेल्फ-गवर्नेंस ऑर्डर ऑफ 2009’ को खत्म कर दिया गया था. इस कदम का गिलगित-बाल्टिस्तान निवासियों ने जमकर विरोध किया था क्योंकि यह कदम बिना उनकी सलाह के उठाया गया था. भारत ने भी पाकिस्तान के इस कदम का उस वक्त जमकर विरोध किया था. यह बदलाव गिलगित-बाल्टिस्तान के इलाके पर प्रधानमंत्री इमरान खान और इनकी सरकार को पूरी तरह से कानून बनाने और उनमें बदलाव करने का अधिकार देता था.

 

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