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100 वैज्ञानिक 6 महीने से मिशन मोड में कर रहे थे काम तब भारत बना अंतरिक्ष की चौथी ताकत

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
अमेरिका, रूस और चीन के बाद सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता हासिल करने वाला भारत चौथा देश बन चुका है. मिशन शक्ति से अंतरिक्ष में दिखाए गए दमखम से हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा है, लेकिन यह जितना आसान दिख रहा है वैसा नहीं था. इसकी गंभीरता और जटिलता को नीति आयोग के वर्तमान सदस्य और डीआरडीओ के पूर्व महानिदेशक वीके सारस्वत के शब्दों से समझा जा सकता है. सारस्वत का दावा है कि सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता विकसित करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन और सरकार की मंजूरी आवश्यक थी, जिसे मनमोहन सरकार ने नहीं दी. तब मंजूरी मिल गई होती तो 2015 तक एंटी सैटेलाइट मिसाइल क्षमता हासिल हो गई होती.
अंतरिक्ष में चलाए गए ऑपरेशन ‘मिशन शक्ति’ की सफलता पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के चेयरमैन जीएस रेड्डी ने एएनआई से बताया कि पिछले 6 महीने से मिशन मोड में इसके लिए काम चल रहा था, जबकि दो साल पहले ही प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया था.

उन्होंने बताया कि 6 महीने से करीब 100 से अधिक वैज्ञानिक लगातार इस पर काम रहे थे और लक्ष्य ओर आगे बढ़ रहे थे. जीएस रेड्डी के मुताबिक वह लगातार इस प्रोजेक्ट पर काम कर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल को रिपोर्ट कर रहे थे. अजित डोभाल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके बारे में पूरी जानकारी दे रहे थे.
उन्होंने बताया कि हमने अपने टारगेट को ‘काइनेटिक किल’ यानी सीधा सैटेलाइट को ही हिट किया था. जीएस रेड्डी ने बताया कि इसके लिए कई टेक्नॉलोजी का इस्तेमाल किया गया और सभी भारत में ही डेवलेप हुई थीं, जो पूरी तरह सफल साबित हुआ.
यहां यह साफ करने की भी जरूरत है राजनैतिक इच्छाशक्ति उन्हीं परियोजनाओं के लिए दिखाने की जरूरत पड़ती है जिन्हें विदेशी ताकतें रोकना चाहती हैं. विदेशी ताकतों की रूचि इसमें होती है कि कोई नया देश ताकतवर न बने. इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गनाइजेशन (इसरो) के पूर्व प्रमुख जी.
माधवन नायर ने भी कहा कि तत्कालीन सरकार ने राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाया. उनका साफ कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने इसके लिए पहल की और परिणाम सामने है. नायर का दावा है कि नरेंद्र मोदी के पास राजनीतिक इच्छा शक्ति के साथ इस बात का साहस भी है कि यह हम करेंगे. वीके सारस्वत भी कहते हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी और एनएसए अजीत डोभाल ने इस तकनीक की जरूरत समझी.
A-SAT मिसाइल के बारे में जानकारी देते हुए जीएस रेड्डी ने कहा कि ये मिसाइल लो अर्थ ऑर्बिट यानी LEO सैटेलाइट को टारगेट बनाने में सक्षम है. उन्होंने कहा कि हमारे पास इससे बड़े लक्ष्य को हासिल करने की भी ताकत है, लेकिन हमने पहले LEO को टारगेट बनाने की ठानी क्योंकि हम किसी भी अन्य देश को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते थे.
हालांकि, लोकसभा चुनाव के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन कर इस ऐतिहासिक और देश को गर्व से भर देने वाली खुशी सुनाने के लिए विपक्षी पार्टियों ने निर्वाचन आयोग में शिकायत दर्ज करा दी है. आयोग ने प्रधानमंत्री के संबोधन की रिकार्डिंग की जांच शुरू कर दी है. विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि चुनाव के वक्त पीएम के संबोधन से आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है.

 

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