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नीली अर्थव्यवस्था से 100 मिलियन रोजगार का लक्ष्य, 20050 करोड़ की पीएम मत्स्य संपदा योजना

नीली अर्थव्यवस्था से 100 मिलियन रोजगार का लक्ष्य, 20050 करोड़ की पीएम मत्स्य संपदा योजना
आत्‍मनिर्भर भारत अभियान की घोषणा के तुरंत बाद कैबिनेट ने मत्स्य पालन क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को मंजूरी दे दी। यानी कोरोना के कहन के बीच नीली अर्थव्‍यवस्था को मजबूत करने की ओर भारत ने अपने कदम बढ़ा दिए हैं। दरअसल यह योजना केंद्र सरकार के ब्‍लू इकोनॉमी के क्षेत्र में की गईं उन घोषणाओं के लिए इम्‍युनिटी बूस्‍टर का काम करेगी, जिसकी घोषणा 2020-21 के बजट में की गई थी। भारत की अर्थव्यवस्था का 4.1 प्रतिशत भाग नीली अर्थव्यवस्था से आता है।
क्या है मत्स्य संपदा योजना?
हम सभी जानते हैं कि भारतीय महासागर में उच्च स्तर की न्यूट्रीशन वैल्‍यू वाले खाद्य पदार्थ मौजूद हैं। साथ ही पेट्रोलियम संसाधन और मत्स्य उत्पादन आय के बड़े साधन हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना इसी आय को बढ़ाने का काम करेगी।
इस योजना का उद्देश्य नीली क्रांति के माध्यम से देश में मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत और जवाबदेह विकास को सुनिश्चित करना है। कुल 20,050 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली यह योजना, केन्द्रीय येाजना और केन्द्र प्रायोजित योजना के रूप में लागू की जाएगी। इसमें केन्द्र की हिस्सेदारी 9,407 करोड रूपए, राज्यों की हिस्सेदारी 4,880 करोड़ रुपए तथा लाभार्थियों की हिस्सेदारी 5,763 करोड़ रुपए होगी।
इस योजना को वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक पांच वर्षों की अवधि में लागू किया जाएगा। इसके तहत उत्पादन और उत्पादकता को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ अवसंरचना और उत्पादन बाद प्रंबधन और मत्स्य पालन प्रबंधन और नियामक फ्रेमवर्क स्थापित किया जाएगा।
इस योजना से मछुआरों को निम्न लाभ होंगे
• मत्स्य पालन क्षेत्र की गंभीर कमियो को दूर करते हुए उसकी क्षमताओं का भरपूर इस्तेमाल होगा
• मत्स्य पालन क्षेत्र में 9 प्रतिशत की सालाना दर से वृद्धि के साथ 2024-25 तक 22 मिलियन मेट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।
• मत्स्य पालन के लिए गुणवत्ता युक्त बीज हासिल करने तथा मछली पालन के लिए बेहतर जलीय प्रबंधन को बढावा मिलेगा।
• मछली पालन के लिए आवश्यक अवसंरचना और मजबूत मूल्य श्रृंखला विकसित की जा सकेगी।
• शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मछली पालन से सीधे या परोक्ष रूप से जुडे हुए सभी लोगों के लिए रोजगार और आय के बेहतर अवसर बनेंगे।
• मछली पालन क्षेत्र में निवेश आकर्शित करने में मदद मिलेगी जिससे मछली उत्पाद बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
• वर्ष 2024 तक मछली पालन से जुडे किसानों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी
• मछली पालन क्षेत्र तथा इससे जुडे किसानों और श्रमिकों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलेगी
नीली क्रांति की ओर भारत के कदम
संयुक्त राष्‍ट्र ने 2014 में एक लक्ष्‍य निर्धारित किया था, जिसके अंतर्गत 2030 तक समुद्री संसाधनों का उपयोग कर अर्थव्यवस्‍था को गति प्रदान करने का है। इससे न केवल अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि रोजगार के अवसरों में तेज़ी से वृद्धि होगी। यही नहीं छोटे-छोटे द्वीपों के विकास की गति भी बढ़ेगी। नीली अर्थव्‍यवस्‍था से सीधा तात्पर्य है समुद्र का। समुद्र में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किस तरह से देश की अर्थव्यवस्‍था को मजबूत बनाने में किया जा सकता है, इस पर न केवल भारत पर काम हो रहा है, बल्कि दुनिया के हर वो देश, जो समुद्र से सटे हुए हैं, वहां अलग-अलग माध्‍यम से प्राकृतिक संपदा का उपयोग करने में जुटा है। शर्त है प्राकृतिक संसाधन का उपयोग बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए।
भारत के लिए स्कोप
भारत के 9 राज्य और दो केंद्र शासित प्रदेश समुद्र से लगे हुए हैं। भारत के पास 12 प्रमख और 187 छोटे बंदरगाह हैं। भारत की नीली अर्थव्यवस्था में ट्रांसपोर्टेशन, तेल और पेट्रोलियम का करीब 95 प्रतिशत योगदान है।
• समुद्र में व्यापारिक गतिविधियों में निरंतर इज़ाफा हो रहा है। जैसे कि कोस्टल टूरिज्म, मछली पकड़ने का काम, फिश प्रोसेसिंग, बंदरगाहों से निर्यात का काम आदि।
• समुद्र तटों पर चलने वाली तेज़ हवाओं का उपयोग ऊर्जा संयंत्रों के माध्‍यम से बिजली बनाने में हो रहा है।
• सी-फूड यानी समुद्र में पाये जाने वाले खाद्य उत्पादों की वृद्धि दर पूरे देश में करीब 35 प्रतिशत है।
• केरल, गुजरात, आंध्र प्रदेश, केरल से भारी मात्रा में निर्यातित उत्पाद अमेरिका, दक्षिण पूर्वी एशिया और यूरोपीय देशों में भेजे जाते हैं।
• सी-फूड, ऊर्जा व अन्‍य उत्पादों की मांग पूरे विश्‍व में तेज़ी से बढ़ रही है।
• ब्लू इकोनॉमी के अंतर्गत मत्स्‍य पालन, समुद्री ऊर्जा, रसायन, जैव-उत्पाद, ओशियन स्‍टडीज़, मरीन बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत तेज़ी से काम कर रहा है। खास कर शोध के क्षेत्र में।
• पर्यटन के क्षेत्र में कोरल डाइव, बोट सर्फिंग, डाइविंग, स्‍वीमिंग, आदि गतिविधियां तेज़ी से बढ़ी हैं।
• समुद्र में कहां-कहां संसाधन मौजूद हैं, उनकी मैपिंग सेटेलाइट के माध्‍यम से की जाती है।
• 21वीं सदी में भारत के अलावा ऑस्‍ट्रेलिया, यूरोपीय संघ और चीन इस दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।
भारत की योजनाएं
• भारत ने नीली अर्थव्यवस्था के अंतर्गत अगले 10 वर्षों में 100 इन्नोवेशन, 100 मिलियन नौकरियों को सृजित करने का लक्ष्‍रू रखा है।
• 2024-25 तक मत्‍स्‍य निर्यात को एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।
• 2022-23 तक देश में 200 लाख टन मत्‍स्‍य उत्‍पाद का लक्ष्‍य भारत ने रखा है।
• 3,477 मित्रों और 500 मत्‍स्‍य पालन कृ‍षक संगठनों द्वारा युवाओं को मत्‍स्‍य पालन क्षेत्र से जोड़ा जाएगा।
• शैवालों और समुद्री खरपतवारों की खेती तथा केज कल्‍चर को प्रोत्‍साहित करने का कार्य शुरू हो चुका है।
• समुद्री मत्‍स्‍य संसाधनों के विकास प्रबंधन और संरक्षण के लिए फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा।
• भारत सरकार ने 9000 किलोमीटर का इकोनॉमिक कॉरीडोर स्‍थापित कर रही है। इसके साथ 2000 किलोमीटर का कोस्टल कॉरीडोर और स्ट्रैटेजिक हाईवे तैयार किया जाएगा।

 


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