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हंगामा है क्यूं बरपा, थोड़ी सी जो खलबली है

हंगामा है क्यूं बरपा, थोड़ी सी जो खलबली है

प्रमोद शुक्ल

शनि महाराज बक्री हुए हैं तो कुछ न कुछ तो होगा ही। पर एक बात जरूर परेशान करने वाली है कि आगाज इतना धमाकेदार है, तो अंजाम कैसा होगा.? पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं, अपनी कुंभ राशि में #वक्री_होते_ही_शनि ने इस बार भयंकर हंगामा मचा दिया है।
18 जनवरी 2023 तक वक्री रहेंगे। उल्टी चाल चलते हुए ही अपनी मकर राशि में पहुंचेंगे। उल्लेखनीय है कि 30 साल पहले 1992 में भी जब मकर राशि पर कुछ इसी तरह से शनि पहुंचे थे तब अयोध्या में हुई घटना से पूरे देश में हंगामा मच गया था।

इस बार भी उथल-पुथल के योग हैं। अग्निकांड, युद्ध जैसे वातावरण बनेंगे, रूस यूक्रेन युद्ध और भीषण स्वरूप लेगा। अनेक देशों के आपसी संबंधों में खटास बढ़ेगी। नये नये दोस्त दुश्मन और गठबंधन आकार लेंगे। यह शनि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुंडली में फिलहाल चौथे स्थान में गोचर कर रहे हैं और उनकी छठे (शत्रु) स्थान पर तीसरी वक्र दृष्टि पड़ रही है, इसलिए राष्ट्र के शत्रुओं का कठोरता से दमन होगा।

सप्तम राज्य भाव पर शत्रु दृष्टि आंतरिक समस्याओं की वृद्धि के संकेत देती है। किंतु यही शनि मोदी की कुंडली में पराक्रमेश भी है, इसलिए वह पराक्रम को कम नहीं होने देगा। नयी समस्याओं के नये-नये कूटनीतिक समाधान तलाशने में मददगार भी होगा। पंचम भाव के गुरु बहुत धैर्य देंगे। गुरु की लग्न और नवम पर दृष्टि आत्मबल को बढ़ाने वाली है। कुल मिलाकर गोचर के यह ग्रह नेतृत्वकर्ता की दृष्टि और रणनीति को व्यापक बनायेंगे, जिससे भारत के लिए बहुत शुभ भविष्य का निर्माण होगा।

उधर, मोदी की कुंडली के अनुसार चंद्रमा की महादशा में सूर्य की वर्तमान अंतर्दशा क्या कह रही है, उसे आप स्वयं ही (चित्र में) देख सकते हैं,, फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है, जो भी हो रहा है वह भारत के भविष्य के लिए अच्छा ही हो रहा है। बिना चुनौतियों के योद्धाओं की मजबूती नहीं निखरती हैं, उनका शौर्य खिलता नहीं है। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय चुनौतियां भी महत्वपूर्ण हैं। इन चुनौतियों से होकर भारत और ज्यादा मजबूत होकर सामने आने वाला है, बहुत जल्दी ही.. देखते रहिए…

लेखक ज्योतिषाचार्य और वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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