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सीएनजी बोट रैली में नावों ने 90 मिनट में तय की 12 किमी की दूरी

सीएनजी बोट रैली में नावों ने 90 मिनट में तय की 12 किमी की दूरी

वाराणसी। नमो घाट से रविदास घाट तक रविवार को सीएनजी का आयोजन किया गया। बोट रैली की समाप्ति के बाद चेत सिंह घाट पर भव्य लेजर शो प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। लेजर लाइट्स की मदद से चेत सिंह किला की दीवारों पर काशी की छवि को प्रदर्शित किया गया। इस दौरान केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री मंत्री हरदीप पुरी, राज्य में ऊर्जा मंत्री समेत तमाम नेताओं का काफिला दो क्रूज और सैकड़ों बोट के साथ चेत सिंह घाट पर मौजूद था। रैली में शामिल मंत्री और नाविकों समेत अधिकारियों ने चेत सिंह घाट पर भव्य लेजर लाइट शो का लुत्फ उठाया।

इसके पहले रविवार को गंगा में नमो घाट से शुरू हुई सीएनजी बोट रैली संत रविदास घाट पर आकर समाप्त हुई। 100 से ज्यादा सीएनजी बोट ने गंगा में 12 किमी की लंबी दूरी 90 मिनट में तय की। वहीं रैली से पहले वाराणसी में रविवार को दोपहर एक बजे से रात आठ बजे तक गंगा पर बोटिंग प्रतिबंधित कर दी गई थी।

वाराणसी के नमो घाट पर आयोजित सीएनजी बोट रैली को हरी झंडी केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने दिखाई। इस दौरान उन्होंने कहा कि वाराणसी में गंगा किनारे रविदास घाट पर दूसरा सीएनजी टर्मिनल बनेगा।

उत्तर प्रदेश सरकार से जमीन सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी होते ही पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से कार्य शुरू कर दिया जाएगा। हरदीप पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री की चाह थी कि वाराणसी में नाव डीजल की जगह सीएनजी से चले। आज बताते हुई खुशी हो रही है कि वाराणसी में 580 नावें सीएनजी में तब्दील हो गईं हैं।

डीजल की तुलना में सीएनजी अधिक कुशल ईंधन होने के कारण नाविकों के लिए काफी बचत होती है। सीएनजी डीजल की तुलना में 18 फीसदी ज्यादा माइलेज देती है। नाविक समुदाय ने इसका उपयोग कर पैसे बचाए हैं। वाराणसी में नाव अभी सीएनजी से चल रहे हैं। वो समय जल्द आएगा जब यहां पर हाइड्रोजन बोट चलती दिखेंगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में विश्वगुरु बनने की दहलीज पर खड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन की बदौलत आजादी के 100वें वर्ष में इसके 26 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की संभावना है।

कहा कि भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए और 2070 तक शुद्ध कार्बन शून्य प्राप्त करने के लिए चार-आयामी रणनीति के माध्यम से कार्य कर रहा है। दुनिया के पहले नदी सीएनजी रिफिलिंग स्टेशन नमो घाट से संत रविदास घाट के बीच में तीन स्टेशन पर पांच पांच मिनट का रेस्ट टाइम था।

वहीं केरल के कोट्टायम से छह विशेष बोट संचालकों की टीम को बुलाया गया था। संचालन उनके ही हाथों में था। गंगा में इस रैली को करने के पीछे वजह लोगों को ग्रीन एनर्जी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जागरूक करना है। साथ ही गंगा नाविकों को सीएनजी बोट्स चलाने की प्रेरणा मिलेगी जिससे गंगा में प्रदूषण कम होगा। रैली करा रहे गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के अधिकारियों के मुताबिक रैली में भाग लेने के लिए नाविकों को सीएनजी गैस निशुल्क दी गई।

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