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शिक्षकों ने मांगी पुरानी पेंशन, बेसिक शिक्षा विभाग लेकर दौड़ा ‘प्रान’

शिक्षकों ने मांगी पुरानी पेंशन, बेसिक शिक्षा विभाग लेकर दौड़ा ‘प्रान’

प्रयागराज  : राजस्थान और पंजाब में कर्मचारियों को पुरानी पेंशन वापस मिल जाने के साथ चुनावी मुद्दा बन चुकी ‘ओपीएस’ की मांग ने उत्तर प्रदेश में सरगर्मी बढ़ा दी है। बेसिक शिक्षकों ने पिछले दिनों लखनऊ में प्रदर्शन कर ओपीडी की आवाज बुलंद की तो बेसिक शिक्षा विभाग की तंद्रा भी अचानक टूट गई। बेसिक के वित्त विभाग ने न्यू पेंशन स्कीम को सख्ती से अम्ल में लाने का ऐसा आदेश जारी किया है जो शिक्षकों के लिए बवाले-जान बन सकता है। वित्त नियंत्रक ने ‘प्रान’ रजिस्ट्रेशन न कराने वाले शिक्षकों का वेतन रोक देने का आदेश दिया है।

01 अप्रैल 2005 से लागू न्यू पेंशन स्कीम को सरकारों ने लागू तो कर दिया लेकिन इसका पालन कहां हुआ ? और कहां नहीं, इसकी निगरानी और समन्वय का कोई प्लेटफॉर्म नहीं बना। नतीजतन अब तक अकेले उत्तर प्रदेश में लाखों ऐसे सरकारी शिक्षक और कर्मचारी हैं जो पेंशन विहीन हैं। पुरानी पेंशन इन्हें मिल नहीं रही है और नई पेंशन के लिए जरूरी प्रान (परमानेंट रिटायर्मेंट एकाउंट नंबर) अब नहीं बना है। इसी बीच चुनावी मुद्दा बन पुरानी पेंशन राजनीतिक दलों के लुभावनी नारे तक पहुंच गई। बीते यूपी विधानसभा चुनाव में भी यह बड़ा मुद्दा था। विपक्ष ने शिक्षकों पर डोरे डाले। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विपक्षी धार को कुंद करने के लिए हर संभव जाल डाले।

फिलहाल, बेसिक शिक्षा के वित्त नियंत्रक रवींद्र कुमार ने सूबे के सभी बीएसए को आदेश दिया है कि बीआरसी पर कैंप लगाकर एक अप्रैल 2005 से नियुक्त शिक्षकों, अशासकीय शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का प्रान बनाया जाए। लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए शासन में लिखा-पढ़ी कर दी जाएगी।

रोचक और गंभीरता यह है कि कैंपों में शिक्षकों और कर्मचारियों को नई पेंशन के फायदे बताकर इसके लिए तैयार करने की जिम्मेदारी भी खंड शिक्षाधिकारियों को सौंपी गई है। शिक्षक या कर्मचारी यदि प्रान रजिस्ट्रेशन से पीछे हटते हैं तो उनके खिलाफ भी वेतन रोकने जैसी कार्रवाई संभव है।

हालांकि, यह सब इतना आसान भी नहीं है। कई पेचों को भी विभाग को सुलझाना होगा। शिक्षामित्र से शिक्षक बने, फिर शिक्षामित्र बन गए कार्मिकों की छंटनी भी होना है। साथ ही कुछ कार्मिक यह भी चाहते हैं कि प्रान आवंटन के साथ अप्रैल 2005 से ही न्यू पेंशन में उनके अंश की कटौती कर दी जाए। साथ ही राज्यांश भी नियुक्ति तिथि से ही जमा किया जाए। नियुक्त तिथि से कटौती होना संभव है या नहीं, इसे लेकर विवाद भी संभव है।

प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला कोषाध्यक्ष अजय सिंह का कहना है कि वर्तमान में जिन शिक्षकों की एनपीएस कटौती की बात हो रही है, उन्हें उनकी नियुक्ति तिथि से राज्यांश भी मिलना चाहिए। भले ही उनकी एनपीएस की कटौती वर्तमान माह से शुरू हो, तभी उसका उद्देश्य पूरा होगा।

 

 

 

 

 

 

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