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वापस होंगी वक्फ में दर्ज सरकारी जमीन, योगी सरकार ने जांच का दिया आदेश

वापस होंगी वक्फ में दर्ज सरकारी जमीन, योगी सरकार ने जांच का दिया आदेश

लखनऊ: भारतीय सेना और रेलवे के बाद देश में तीसरा सबसे अधिक जमीन का मालिकाना हक रखने वाला ‘वक्फ बोर्ड’ एक बार फिर सुर्खियों में है। दरअसल, हुआ यूं कि उत्तर प्रदेश सरकार ने करीब 33 साल पुराने एक आदेश को रद्द करते हुए वक्फ बोर्ड की संपत्ति में दर्ज सरकारी जमीनों का परीक्षण करने का आदेश दिया है।

सार्वजनिक जमीन पर वक्फ बोर्ड का मालिकाना हक रद्द

केवल इतना ही नहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई सार्वजनिक जमीन वक्फ संपत्ति में दर्ज कर ली गई थी, तो उसे रद्द कर दिया जाएगा और वह राजस्व विभाग में मूल स्वरूप में दर्ज की जाएगी।

सभी भूखंडों की मांगी सूचना

यूपी सरकार के इस आदेश के परिप्रेक्ष्य में अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ अनुभाग के उप सचिव शकील अहमद सिद्दीकी ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर इस तरह के सभी भूखंडों की सूचना एक माह के भीतर मांगी है। साथ ही सभी अभिलेखों को भी दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

1989 में वक्फ को मिल गई थीं ये शक्तियां

ज्ञात हो, वर्ष 1989 में तत्कालीन सरकार ने एक आदेश जारी किया था जिसमें यह कहा गया था कि यदि सामान्य संपत्ति बंजर, भीटा, ऊसर आदि भूमि का इस्तेमाल वक्फ (मसलन कब्रिस्तान, मस्जिद, ईदगाह) के रूप में किया जा रहा हो तो उसे वक्फ संपत्ति के रूप में ही दर्ज कर दिया जाए। इसके बाद उसका सीमांकन किया जाए। इस आदेश के तहत प्रदेश में लाखों हेक्टेयर बंजर, भीटा, ऊसर भूमि वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कर ली गईं।

यूपी सरकार का क्या है कहना ?

अब यूपी सरकार का कहना है कि इन संपत्तियों के स्वरूप अथवा प्रबंधन में किया गया परिवर्तन राजस्व कानूनों के विपरीत है। बीते माह राजस्व परिषद के प्रमुख सचिव सुधीर गर्ग ने शासनादेश जारी कर बीती सरकार के शासनकाल में जारी आदेश को समाप्त कर दस्तावेजों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे।

वक्फ क्या है ?

उल्लेखनीय है कि वक्फ बोर्ड, भारतीय सेना और रेलवे के बाद देश में तीसरा सबसे अधिक जमीन का मालिक है। 07 फरवरी 2022 को पूर्व केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी द्वारा राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी गई जानकारी के अनुसार WAMSI (भारत की वक्फ संपत्ति प्रबंधन प्रणाली) नामक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के तहत, अब तक 7,85,934 अचल वक्फ संपत्तियों को पोर्टल पर पंजीकृत किया गया है।

वहीं मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक वक्फ मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया का कहना है कि देश के सभी वक्फ बोर्डों के पास कुल मिलाकर 8 लाख 54 हजार 509 संपत्तियां हैं जो 8 लाख एकड़ से ज्यादा जमीन पर फैली हैं। साल 2009 में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां 4 लाख एकड़ जमीन पर फैली थी। मतलब साफ है कि बीते 13 वर्षों में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां दोगुनी से भी ज्यादा हो गई हैं। जमीन का विस्तार तो नहीं होता, फिर वक्फ बोर्ड के हिस्से जमीन का इतना बड़ा हिस्सा, इतनी तेजी से कैसे जा रहा है ?

क्‍या कहता है वक्‍फ बोर्ड कानून

दरअसल, वक्फ बोर्ड देशभर में जहां भी कब्रिस्तान की घेरेबंदी करवाता है, उसके आसपास की जमीन को भी अपनी संपत्ति करार दे देता है। ऐसे में साफ है कि बीते कुछ साल में मजारें, नई-नई मस्जिदें बनाई गई हैं। इन मजारों और आसपास की जमीनों पर वक्फ बोर्ड का कब्जा हो जाता है। 1995 का वक्फ एक्ट कहता है कि अगर वक्फ बोर्ड को लगता है कि कोई जमीन वक्फ की संपत्ति है तो यह साबित करने की जिम्मेदारी उसकी नहीं, बल्कि जमीन के असली मालिक की होती है कि वो बताए कि कैसे उसकी जमीन वक्फ की नहीं है। 1995 का कानून यह जरूर कहता है कि किसी निजी संपत्ति पर वक्फ बोर्ड अपना दावा नहीं कर सकता, लेकिन यह तय कैसे होगा कि संपत्ति निजी है?

अगर वक्फ बोर्ड को केवल लगता है कि कोई संपत्ति वक्फ की है तो उसे कोई दस्तावेज या सबूत पेश नहीं करना है, सारे कागज और सबूत उसे देने हैं जो अब तक दावेदार रहा है। कौन नहीं जानता कि कई परिवारों के पास जमीन का पुख्ता कागज नहीं होता है। ऐसे में वक्फ बोर्ड को इसका फायदा मिल जाता है क्योंकि उसे कब्जा जमाने के लिए कोई कागज नहीं देना होता।

वक्‍फ बोर्ड एक्‍ट में क‍िए गए क्‍या संशोधन ?

वर्ष 1995 में तात्कालीन सरकार ने वक्फ एक्ट 1954 में संशोधन किया और नए-नए प्रावधान जोड़कर वक्फ बोर्ड को असीमित शक्तियां दे दीं। वक्फ एक्ट 1995 का सेक्शन 3(आर) के मुताबिक, कोई संपत्ति किसी भी उद्देश्य के लिए मुस्लिम कानून के मुताबिक पाक (पवित्र), मजहबी (धार्मिक) या (चेरिटेबल) परोपरकारी मान लिया जाए तो वह वक्फ की संपत्ति हो जाएगी। वक्फ एक्ट 1995 का आर्टिकल 40 कहता है कि यह जमीन किसकी है, यह वक्फ का सर्वेयर और वक्फ बोर्ड तय करेगा। दरअसल, वक्फ बोर्ड का एक सर्वेयर होता है। वहीं तय करता है कि कौन सी संपत्ति वक्फ की है और कौन सी नहीं। इस निर्धारण के तीन आधार होते हैं। अगर किसी ने अपनी संपत्ति वक्फ के नाम कर दी, अगर कोई मुसलमान या मुस्लिम संस्था जमीन का लंबे समय से इस्तेमाल कर रहा है या फिर सर्वे में जमीन का वक्फ की संपत्ति होना साबित हुआ।

बड़ी बात है कि अगर आपकी संपत्ति को वक्फ की संपत्ति बता दी गई तो आप उसके खिलाफ कोर्ट नहीं जा सकते। आपको वक्फ बोर्ड से ही गुहार लगानी होगी। वक्फ बोर्ड का फैसला आपके खिलाफ आया, तब भी आप कोर्ट नहीं जा सकते। तब आप वक्फ ट्राइब्यूनल में जा सकते हैं। वक्फ एक्ट का सेक्शन 85 कहता है कि ट्राइब्यूनल के फैसले को हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है।

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