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लद्दाख में डटे रहने के लिए सेना ने शुरू कर दीं सर्दियों की तैयारियां, -50 सेंटीग्रेड तक रहता है तापमान

लद्दाख में डटे रहने के लिए सेना ने शुरू कर दीं सर्दियों की तैयारियां, -50 सेंटीग्रेड तक रहता है तापमान

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत-चीन के बीच गतिरोध बना हुआ है। इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारतीय सेना ने 12,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर लंबे समय तक कठोर सर्दी से निपटने के लिए विशेष कपड़े, आहार और आश्रय का प्रबंध किया है।

लद्दाख में कई ऊंचाई वाले स्थानों पर सर्दियों में तापमान शून्य से 50 डिग्री सेल्सियस नीचे तक चला जाता है, इसलिए प्रतिकूल परिस्थितियों से निटपने के लिए भारतीय सेना विशेष तैयारी कर रही है।

रक्षा मंत्री @rajnathsingh ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) स्पष्ट रूप से चित्रित नहीं है और चीन भारत की सीमा से लगे लगभग 90 हजार वर्ग किलोमीटर की जमीन को भी अपनी बताता है।बातचीत के बीच चीन ने यथास्थिति बदलने का प्रयास किया।

रक्षा मंत्री @rajnathsingh ने कहा कि चीन ने मई और जून में यथास्थिति को बदलने की कोशिश की, मगर भारतीय सेना ने उसके प्रयासों को विफल कर दिया। राजनाथ सिंह ने कहा, “हमने चीन से कहा है कि ऐसी घटनाएं हमें स्वीकार्य नहीं होंगी।”

गौरतलब है कि रक्षा मंत्री ने सदन में कल जानकारी दी थी कि चीनी सेना की सक्रियता की रिपोर्ट अप्रैल से ही मिलने लगी थी। जून में हुई खूनी झड़प में भारत के जवानों ने शहादत दी, लेकिन बदले में चीन को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

अमेरिकी पत्रिकाओं की रिपोर्ट के अनुसार इस झड़प में चीन के करीब 60 सैनिक मारे गए हैं। यही नहीं 29 और 31 अगस्त की रात में एलएसी के निकट कई महत्वपूर्ण चोटियों पर भारतीय सेना ने अपने ठिकाने बनाकर चीन को चौंका दिया है। चीन के अंदरूनी हिस्से तक भारतीय सेना निगरानी कर रही है। इससे बौखलाई चीनी सेना तमाम बातचीत के बाद भी एलएसी के आस पास बैठी हुई है।

लाल सेना भारतीय सेना के इस कदर निकट है कि किसी भी वक्त जरा सी भी चूक मामले को गंभीर बना सकती है। दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों और विदेश मंत्रियों के साथ सैन्य स्तर पर भी हुई बातचीत का अब तक कोई ठोस नतीजा एलएसी पर दिखाई नहीं दिया है।

रक्षा मंत्री ने माना था कि चीन ने एलआईसी के निकट भारी साजो सामान जुटाया है। इसके जवाब में भारतीय सेना ने भी अपनी तैयारी पूरी की है। सर्दियों में जवानों को एलएसी के निकट डटे रहने के लिए हर वह सुविधा मुहैया कराई जा रही है जिसकी जरूरत उन्हें पड़ सकती है।

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