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मेडिकल इमरजेंसी के लिए हाइवे पर बनेंगे हेलीपैड

मेडिकल इमरजेंसी के लिए हाइवे पर बनेंगे हेलीपैड

सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को सही समय पर अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी होता है। घायल व्यक्ति अगर वक्त रहते अस्पताल पहुंच जाए तो उनकी मृत्यु होने की संभावनाएं कम हो जाती है। विशेष तौर पर राष्ट्रीय राजमार्गों पर फर्राटे भरने वाली गाड़ियां जब एक्सीडेंट का शिकार होती है तब वहां एंबुलेंस पहुंचने में काफी वक्त लग जाता है। इन्हीं स्थितियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार के द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों पर हेलीपैड बनाने की पहल शुरू कर दी गई है। इसकी जानकारी केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के उड्डयन मंत्रियों के सम्मेलन में दी।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच चर्चाएं हुई संपन्न

राष्ट्रीय राजमार्गों पर हेलीपैड बनाने के लिए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के साथ चर्चाएं संपन्न कर ली है। नेशनल हाईवे पर हेलीपेड होने से त्वरित राहत पहुंचाना संभव हो सकेगा। साथ ही सड़क दुर्घटना जैसी स्थिति में घायलों को समय पर इलाज मुहैया कराया जा सकेगा जिससे मृतकों की संख्या में भी कमी आएगी। इससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलने का अनुभव और सुरक्षित हो जाएगा।

गोल्डन आवर होता है महत्वपूर्ण

देश में वर्ष 2020 के दौरान कुल 3,66,138 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई। इन दुर्घटनाओं में 1,31,714 लोगों की मौत हुई और 3,48,279 लोग घायल हुए। सड़क दुर्घटनाओं में सर्वाधिक प्रभावित आयु वर्ग 18-45 वर्ष है। जाहिर है ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में घायल लोगों को अगर गोल्डन आवर में उपचार मुहैया करवा दिया जाए तो वे बच सकते हैं। गोल्डन आवर, दुर्घटना होने के बाद अगले 1 घंटे को कहा जाता है जिसमें सही मेडिकल ट्रीटमेंट मिलने से घायलों के बचने की संभावनाएं सबसे अधिक होती है।

जल्द शुरू होगी ‘प्रोजेक्ट संजीवनी’

केंद्र सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों पर हेलीपैड बनाने के अलावा आपातकालीन चिकित्सा सेवा यानि हेलिकॉप्टर इमरजेंसी मेडिकल सर्विस की दिशा में विशेष ध्यान दे रही है। देश में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हेलीकॉप्टर एंबुलेंस सेवा एम्स ऋषिकेश में शुरू की जाएगी। सरकार की कोशिश है कि पहली कॉल के 20 मिनट के अंदर हेलीकॉप्टर मरीज तक पहुंच जाए। हेलीकाप्टर में एक मरीज को ले जाने के लिए स्ट्रेचर और एक डॉक्टर की व्यवस्था होगी। एक पायलट के पास आवश्यक चिकित्सा उपकरण मौजूद होंगे। हेलीकाप्टर बिना ईंधन भरे लंबी दूरी तक उड़ान भरने में सक्षम होगा।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपने मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों पर कहा था कि सड़क दुर्घटनाएं मृत्यु, विकलांगता और अस्पताल में भर्ती होने के प्रमुख कारणों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक दुनियाभर में सड़क दुर्घटना में मारे गए 10 में से कम से कम एक व्यक्ति भारत से है। ऐसे में जागरूकता एवं नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। केंद्रीय मंत्री ने पीएम मोदी के आह्वान का जिक्र करते हुए कहा था‌‌ कि पीएम ने भी अपने “मन की बात कार्यक्रम” में सड़क दुर्घटनाओं पर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत के बारे में देशवासियों से अपील की थी।

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