National Wheels

योगी के नेतृत्व में अपराध व भ्रष्टाचार मुक्त होने की राह पर उत्तर प्रदेश

योगी के नेतृत्व में अपराध व भ्रष्टाचार मुक्त होने की राह पर उत्तर प्रदेश

सुरेश बहादुर सिंह, लखनऊ

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पांच वर्ष के बाद दूसरे कार्यकाल के भी छह महीने पूरे हो चुके हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव का जो परिणाम आया निश्चित रूप से नरेंद्र मोदी के चेहरे पर प्राप्त हुआ था। परंतु यह भी सत्य है कि 2022 विधानसभा चुनाव का परिणाम योगी आदित्यनाथ के चेहरे के कारण सामने आया। जिसमें एक योगी की या कहा जाए कि 37 साल बाद उत्तर प्रदेश में किसी मुख्यमंत्री की दोबारा वापसी हुई। जिसका प्रमुख कारण है कि सीएम योगी ने जब 2017 में शपथ ली तब उनकी प्राथमिकता में उत्तर प्रदेश को अपराध, गुंडाराज व भ्रष्टाचार मुक्त बनाना था।और उन्होंने उस दिशा में पहले ही दिन से काम करना शुरू कर दिया।और पांच साल तक किया, योगी आदित्यनाथ का अपराध व भ्रष्टाचार के ऊपर लगातार प्रहार का सिलसिला आज भी जारी है।आज योगी के दूसरे कार्यकाल के छह महीने बीत जाने के बाद आलम यह है कि मुख्तार अंसारी,अतीक अहमद व विजय मिश्रा अभी भी जेल में हैं। सीएम योगी के दूसरे कार्यकाल की सरकार अपने लक्ष्य एवं विकास कार्यों को त्वरित गति से पूरा कर रही है। विकास कार्यों को लेकर सरकार में जनता का विश्वास बढ़ा है। उपचुनाव जो रामपुर और आजमगढ़ में हुए व विधान परिषद के चुनाव के परिणामों ने यह दिखाया कि राज्य सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी उतर रही है । यह परिणाम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सफलता की तस्दीक करते हैं।

योगी आदित्यनाथ को जिस तरह का बहुमत देकर उत्तर प्रदेश की सरकार ने दोबारा मुख्यमंत्री बनाया उसके बाद विधान परिषद के 36 सीटों में से 33 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी की विजय हुई और उत्तर प्रदेश के विधान परिषद के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब यूपी विधान परिषद कांग्रेस मुक्त हो गया। निश्चित रूप से योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली का ही परिणाम है जो प्रदेश पहले अपराध, भ्रष्टाचार, परिवारवाद ,दंगों और अराजकता के लिए जाना जाता था वह अब बेहतर पुलिसिंग व ला एंड आर्डर के लिए जाना जाता है।केंद्र सरकार और राज्य सरकार में अंतर होने की वजह से सामंजस्य नहीं बैठ पाता था। यह समस्या भी अब दूर हो गई है। इसका फायदा भी योगी आदित्यनाथ को मिला है।

पिछले छह माह के भीतर अपराध और अपराधियों के प्रति जिस तरह की कार्यवाही की गई।उसका परिणाम यह हुआ कि आज उत्तर प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था है। अपराधी या तो जेल में है या तो उत्तर प्रदेश छोड़ कर चले गए। साफ नियत स्पष्ट नीति और दृढ़ निश्चय से योगी आदित्यनाथ ने देश की राजनीति में अपने आप को इस तरह से स्थापित किया है कि अब वह एक अपराजेय योद्धा की तरह से दिखाई दे रहे हैं। निश्चित रूप से 2022 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में पूरी भारतीय जनता पार्टी चुनाव प्रचार में लगी हुई थी लेकिन वास्तविकता यही है की बाजी सिर्फ और सिर्फ योगी आदित्यनाथ व उनकी कार्यशैली ने पलटी। उत्तर प्रदेश में कुछ ऐसा हुआ जो पिछले 37 साल में कभी नहीं हुआ था और योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
दूसरी बार जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने तो यह स्पष्ट हो गया कि अब उत्तर प्रदेश में उनका कोई विकल्प नहीं है 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद जिन योगी आदित्यनाथ को प्रशासनिक अनुभव व राजनीतिक अनुभव में कम आंका जाता था और यह कहा जाता था कि सरकार में प्रशासनिक अधिकारियों का दखल अधिक है। दूसरे कार्यकाल में योगी आदित्यनाथ ने उन सब कमियों को दूर कर दिया और दिखा दिया की वह एक परिपक्व राजनेता बन गए हैं खास तौर से पिछले दिनों के दौरान जिस तरह का घटनाक्रम हुआ उससे उन्होंने संदेश दिया कि वह नौकरशाही के इशारे पर नहीं नाचेंगे। यह तब और स्पष्ट हो गया जब उन्होंने दो जिला अधिकारी और एक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निलंबित कर दिया।
यह भी सत्य है कि योगी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के छह माह में अपराधियों और माफियाओं की अवैध संपत्तियों को बुलडोजर के द्वारा ध्वस्त किया।उत्तर प्रदेश में छेड़खानी को रोकने के लिए एंटी रोमियो स्क्वायड को दोबारा शुरू किया गया। मुख्यमंत्री आवास पर एक बार फिर से जनता दर्शन की शुरुआत की गई और जिस राशन योजना के बारे में कहा जाता है कि भाजपा की जीत में उसका सबसे बड़ा योगदान था सरकार बनते ही योगी आदित्यनाथ ने उसको और आगे बढ़ाया जिसके तहत सरकार ने यह घोषणा की कि मुफ्त राशन लोगों को मिलता रहेगा ।
योगी आदित्यनाथ ने अपने दुसरे कार्यकाल के पहली कैबिनेट मे ही कानून व्यवस्था को पुख्ता बनाने पर जोर दिया। नशा कारोबारियों पर नकेल कसने के लिए योगी आदित्यनाथ ने एक टीम तैयार की है जिसे एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का नाम दिया गया है यह 250 से अधिक अधिकारियों वाली टीम होगी जिसकी कमान पुलिस उप निरीक्षक स्तर के अधिकारी संभालेंगे ।
यह सब दिखाता है योगी आदित्यनाथ एक बेहतर उत्तर प्रदेश बनाना चाहते हैं।
जहां तक बात विकास के साथ राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की है तो यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि लगभग तीन दशक के बाद भाजपा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रूप में एक नया हिंदू हृदय सम्राट मिल गया है प्रधानमंत्री की “राम काज कीजे बिना मोहि कहां विश्राम” की अवधारणा को नए युवा हृदय सम्राट ही असली जामा पहचान बनायेंगे ।
ऐसा नहीं है कि योगी आदित्यनाथ इसमें रातों-रात सफल हुए हैं इसके लिए उन्होंने अथक प्रयास किया है । चाहे प्रयागराज में भव्य कुंभ का आयोजन हो, दर्शनार्थियों और स्थानार्थी के ऊपर पुष्प वर्षा हो या कांवरियों के लिए व्यवस्था हो सब में उत्तर प्रदेश सरकार का कार्य अति सराहनीय रहा है।
ज्ञात हो 90 के दशक में भारतीय जनता पार्टी के पास कई बड़े-बड़े नेता ऐसे थे जो प्रखर हिंदुत्ववादी माने जाते थे जिसमें लाल कृष्ण आडवाणी ,मुरली मनोहर जोशी, डॉक्टर प्रवीण तोगड़िया, कल्याण सिंह, उमा भारती, अशोक सिंघल व विनय कटियार थे। परंतु यह दौर योगी आदित्यनाथ का है। राजनीतिक रूप से राष्ट्रीयता का शंखनाद, त्वरित कार्यवाही, शिक्षा में समग्रता, बेहतरीन होती सड़कें व अन्य चीजों की बेहतरी इस बात की ओर इशारा कर रही है कि योगी आदित्यनाथ कुछ बेहतर कर रहे हैं व करना चाहते हैं इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में अभी बहुत कुछ करना बाकी है परंतु यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है यह योगी आदित्यनाथ ही कर सकते हैं शायद इसीलिए जनता ने उनके ऊपर दोबारा विश्वास जताया है।अब आने वाले निकाय चुनाव उसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ और उनके सरकार की परीक्षा होगी।

लेखक सुरेश बहादुर सिंह जी वरिष्ठ पत्रकार हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.