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भारतीय-चीनी सैनिकों के बीच 7 और 8 सितंबर को भी चलीं 100 राउंड गोलियां, टैंक-तोप भी तैनात

भारतीय-चीनी सैनिकों के बीच 7 और 8 सितंबर को भी चलीं 100 राउंड गोलियां, टैंक-तोप भी तैनात

1962 के बाद लद्दाख में युद्ध के मुहाने पर खड़े चीनी सैनिकों की कोई भी उकसाने वाली हरकत बड़े युद्ध का कारण बन सकती है। 7 और 8 सितंबर को भी चीनी सैनिकों के उकसावे पर भारतीय सेना ने फायरिंग की।समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि दोनों देशों के सैनिकों के बीच करीब 100 राउंड फायर हुए हैं। हालांकि, अब तक यह जानकारी नहीं मिली है कि इसमें कोई हताहत भी हुआ है या नहीं।

रिपोर्ट के अनुसार पिछले 45 साल तक जिस वास्तविक नियंत्रण रेखा एलएसी पर एक भी गोली नहीं चली थी, वहां पिछले 20 दिन में दोनों देशों के सैनिकों के बीच तीन बार गोलियां चल चुकी है। इसके पहले 29 और 31 अगस्त के बीच पैंगोग झील के दक्षिणी क्षेत्र में चीनी सेना के अतिक्रमण की कोशिशों के दौरान गोलियां चली थी जिसमें भारतीय जवानों ने चीनी साजिश को विफल कर दिया था।

यही वह दिन था जब भारतीय सेना ने पैंगोग झील के आसपास की कई ऊंची चोटियों पर अपना कब्जा मजबूत कर लिया था। इसे लेकर चीनी सेना बौखलाई हुई है। ऐसी खबरें भी आई हैं कि भारतीय सेना उन चोटियों पर भी पहुंच चुकी है जहां चीनी सैनिक डटे थे। इस घटना के बाद से चीन लगातार इन कोशिशों में जुटा हुआ है कि भारतीय सेना को इन चोरियों से पीछे हटाया जाए। 7 और 8 सितंबर को हुई फायरिंग के पहले भी कई हिस्सों में दोनों सेनाओं के आमने-सामने फायरिंग रेंज में पहुंच जाने की सूचनाएं मिल चुकी है। इन घटनाओं से दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण हालात का अंदाजा लगाया जा सकता है।

बोफ़ोर्स तोपें भी तैनात

लद्दाख में चीनी सेना के भारी जमावड़ा और हथियारों को इकट्ठा करने के बाद भारतीय सेना ने भी जवाबी तैयारी पूरी कर ली है। नई बोफोर्स तोपों के साथ पुरानी तो पर भी चीन के होश उड़ाने के लिए तैयार हो गई हैं। होवित्जर- 777 (बोफोर्स) तो पहले से ही पर्वतीय क्षेत्रों में काफी कारगर साबित हो चुकी हैं। कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को गहरे जख्म दे चुकी बोफोर्स तोपें चीनी सैनिकों की ओर अग्नि वर्षा करने को तैयार हैं।

सेना के अफसरों का कहना है कि सेना का तकनीकी स्टाफ ग्रुप पिन से लेकर टैंक का इंजन असेंबल करने की जिम्मेवारी संभालता है। मोबाइल रिपेयर वैन के जरिए अग्रिम इलाकों में वाहनों से लेकर तोप, टैंक का इंजिन असेंबल करने और मरम्मत की जिम्मेदारी संभालता है। एलएसी पर तोपों से पहले टैंक, मिसाइल, युद्धक विमान समेत अन्य साजो सामान पहले ही रणनीतिक इलाकों में तैनात किए जा चुके हैं। गोला बारूद और खाद्यान्न का स्टोरेज भी भारी मात्रा में किया जा रहा है, जिससे कड़कड़ाती ठंड के दिनों में भी चीनी सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।

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