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भगवा की आड़ में सीएम योगी तक पहुंच गए भूमाफिया

भगवा की आड़ में सीएम योगी तक पहुंच गए भूमाफिया

 

ओम प्रकाश सिंह

अयोध्या। रामजन्मभूमि मंदिर पुनरुद्धार शुरू होने के बाद अयोध्या को नया धार्मिक हब बनाने की कोशिशें भूमाफियाओं के लिए अनंत अवसर लेकर आई हैं। राम नगरी अयोध्या में भूमि के सौदागर कुकुरमुत्तों की तरह उग आए हैं। संगठित तौर पर अयोध्या की पावन भूमि खंड खंड नोची और बेची जा रही है और जब कभी मामला उठता है तो उसे आस्था के आवरण में ढंक दिया जाता है। सत्ता का सरंक्षण हासिल सौदागरों की जुगत ऐसी कि उनकी पहुंच मुख्यमंत्री दरबार तक हो जाती है। भूमाफियाओं ने भगवा के आड़ में मुख्यमंत्री तक पहुंच बना ली है।
अयोध्या विवादों की भूमि बनती जा रही है, कारण भी भूमि है। मंदिर मस्जिद का विवाद भी भूमि के लिए ही था। प्रदेश में बढ़ते अपराधों व मुकदमों के पीछे भूमि के राजस्व मुकदमे ही हैं। धर्म नगरी अयोध्या के साधु संत भी इस विवाद से परे नहीं है और सैकड़ों मुकदमे न्यायालय में विचाराधीन है।
भू-माफियाओं के गठजोड़ से मुक्ति की भूमि अयोध्या अब माया की भूमि बन गई है। जिसे देखकर हर कोई भ्रमित है कि झूठा कौन है और सच्चा कौन। एक तरफ सत्ता दल के शह पर बड़े-बड़े भूमि सौदे हो रहे हैं, तो दूसरी ओर इसके विरुद्ध आवाज उठाने पर अपने ही सांसद को ‘विपक्ष’ कह दिया जा रहा है। भूमि के बंदरबांट के इस खेल में पक्ष-विपक्ष का विचार सरयू में बह गया है। शेष बचा एक ही सत्य है कि कौन कितना लूट पाया। आज अयोध्या की पवित्रतता के सौदेबाज ही उसके सबसे बड़े रामभक्त बने हुए हैं।
भारत रत्न, स्वर कोकिला लता मंगेशकर के निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में उनके नाम पर एक भव्य चौराहे का निर्माण व नामकरण की घोषणा किया था। यह कार्य प्रारंभ हुआ तो अयोध्या के साधु संतों ने एक बैठक कर बन रहे चौराहे का नामकरण लता के नाम पर ना करके रामानंदाचार्य के नाम पर करने की मांग किया और ना होने पर विरोध की चेतावनी भी दिया। मामला अखबारों की सुर्खियां बना, बात मुख्यमंत्री के दरबार तक पहुंची तो डैमेज कंट्रोल की कोशिश शुरू हुई।
साधु संतों का एक प्रतिनिधिमंडल कल जब मुख्यमंत्री से मिला तो अयोध्या के सांस्कृतिक, पौराणिक विकास की बात छनकर सामने आई। साधु संतों के मुख्यमंत्री से मिलने के समय की कुछ तस्वीरें वायरल कराई गई, जिसमें राम नगरी का एक प्रॉपर्टी डीलर भी उसमें शामिल है। इस प्रॉपर्टी डीलर पर सत्ता का वरद हस्त हासिल होने की चर्चा आम है। तस्वीर वायरल होते ही सोशल मीडिया पर राम नगरी की बिक रही जमीनों और सांसद लल्लू सिंह के लिखे गए पत्र पर कार्रवाई ना होने संबंधित खबरें चलने लगी। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री जी के साथ प्रॉपर्टी डीलर की तस्वीर इस मकसद से वायरल कराई गई है कि विकास प्राधिकरण अदब में रहे।
युद्धों में अजेय रही अयोध्या भू-माफियाओं के आगे पस्त है। इस पावन भूमि के पग-पग की बोली लग रही है। भूमि खरीद में न कोई नियम है, न आचार। राम नाम की लूट है। जिसकी गठरी भारी है, वह पौराणिकता के महत्व की भूमि भी खरीद सकता है। यह अनाचार की आत्यंतिकता तब है, जब मुख्यमंत्री महीने में दो बार अयोध्या आते हैं और हर गतिविधि पर नजर रखते हैं।
अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद यहां की पावन भूमि खंड-खंड नोची जा रही है। नजूल से लेकर पौराणिक महत्व तक के भूमि की बोली लग चुकी है। जब कभी मामला उठता है तो उसे आस्था के आवरण में ढक दिया जाता है।सत्तापक्ष सांसद के पत्र पर कार्रवाई ना होने और जमीन के सौदागरों की पहुंच मुख्यमंत्री दरबार तक होने से अयोध्या चकित, भ्रमित है।

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