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बोले परिवहन आयुक्त चंद्रभूषण-डीएल प्रक्रिया को बनायेंगे आसान

बोले परिवहन आयुक्त चंद्रभूषण-डीएल प्रक्रिया को बनायेंगे आसान

सीनियर आईएएस चंद्र भूषण सिंह ने परिवहन आयुक्त कार्यालय पर संभाला कार्यभार

कहा, सड़क सुरक्षा अभियान पर फोकस, डीएल प्रणाली को बनाना है सुलभ

सौरभ सिंह सोमवंशी,

 

 

लखनऊ। मंगलवार को परिवहन आयुक्त कार्यालय की आबोहवा कुछ बदली हुई नजर आयी। विभागीय मुख्यालय पर तैनात वरिष्ठ से लेकर अधीनस्थ अधिकारी व कर्मचारी सभी अपने-अपने कक्ष, कार्यालय और सीटों पर काम करते दिखें। कहीं आला अफसर अपने अधीनस्थों के साथ गहन मंथन करते दिखे तो कहीं बाबू लोग फटाफट फाइलों के पन्ने उलटते-पलटते दिखायी दिये। सिपाही से लेकर चपरासी तक अपनी-अपनी कुर्सियों पर बडे ही मुस्तैदी के साथ ड्यूटी करते दिखें। कुछ देर में पता चला कि मंगलवार 12 बजे के करीब नवागत परिवहन आयुक्त चंद्र भूषण सिंह ने बकायदा कार्यालय में अपना कार्यभार संभाला। कुछ देर विभागीय अधिकारियों के साथ औपचारिक बातचीत की और फिर अपने काम में लग गये। बता दें कि सीनियर आईएएस चंद्र भूषण इससे पूर्व मुजफ्फरनगर में डीएम रहें और वहां से परिवहन विभाग में अपर परिवहन आयुक्त के पद पर स्थानांतरित हुए। उनके पास ही परिवहन आयुक्त का एडिशनल चार्ज भी है। परिवहन आयुक्त ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप ही कामकाज होगा। आगे कहा चूंकि अभी वर्तमान समय में राजधानी सहित पूरे प्रदेश में वृहद स्तर पर सड़क सुरक्षा माह जनजागरुकता अभियान चल रहा है, ऐसे में इस विषय को लेकर भी वो काफी गंभीर हैं। श्री सिंह ने कहा अकेले जागरुकता अभियान से काम नहीं चलेगा, बल्कि हर खासोआम पब्लिक को भी रोड सेफ्टी और ट्रैफिक रूल्स को लेकर सजग होना पड़ेगा। बताया कि हर किसी को वाहन चालकों को हेल्मेट और कार चालकों को सीट बेल्ट के लिये टोकना होगा, तभी वो बातें उसकी रूटीन आदतों में आयेंगी। आखिर में उन्होंने विभागीय अधिकारियों से यही कहा कि उनके स्तर से कोई भी फाइल नहीं रुकेगी, बस इतना जरूर है कि अधिकारी व कर्मी अपना-अपना काम पूरी तल्लीनता से करें। आगे कहा कि उनका यही मत है कि जब किसी विभाग में प्राथमिकता के साथ उच्चस्थ स्तर पर क्रमवार फाइलों का निपटारा होगा, तब फिर त्वरित निर्णय भी होगा और इसका सकारात्मक परिणाम यह होगा कि विभाग से जुड़ी योजनायें व परियोजनायें समय से क्रियान्वित होती जायेंगी…और आमजन को इसका लाभ मिलने लगेगा।

परिवहन आयुक्त ने उदाहरण देते हुए कहा कि आज लखनऊ से किसी भी रूट पर आगे बढ़िये तो हाईवे व एक्सप्रेस वे मार्गों का पूरा नेटवर्क है। ऐसे में प्राय: यह देखा जाता है कि लोग जब इन हाईवे पर चलते हैं तो जहां आपकी गाड़ी 100 से 110 स्पीड से ऊपर गई तो अचानक आगे कोई चीज आयी तो वाहन अनियंत्रित होगा और फिर सड़क हादसा होने से कोई नहीं रोक सकता तो इसलिये गति नियंत्रण भी बेहद जरूरी है। इसके अलावा सड़क पर चलने वाले पैदलगामी लोगों को भी सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा। यानी सरकार, संगठन और जनता का समूह जब मिलकर सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति खुद जागरुक होगा, दूसरों को करेगा…गलती करने पर रोकेगा, टोकेगा तो निश्चित तौर पर सड़क हादसों पर अपेक्षित अंकुश लग सकता है।

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