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बैंकों को करोड़ों रुपये का चूना लगा रहे थे चाचा-भतीजे, दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार


Delhi Police : दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने आधार कार्ड अपडेशन सेंटर के जरिए फर्जी बैंक अकाउंट खोलकर बैंक को करोड़ों का चूना लगाने वाले चाचा-भतीजे की जोड़ी के कारनामे पकड़े हैं. एक आरोपी को दिल्ली से गिरप्तार किया गया है. जबकि दूसरा आरोपी लॉरेंस बिश्नोई के भाई का फर्जी पासपोर्ट बनवाने के आरोप में पहले से ही जेल में बंद है.

दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट ने फर्जी दस्तावेजों के जरिये एक बैंक में 33 अकाउंट खुलवाकर बैंक को करीब 1 करोड़ 26 लाख का चूना लगाने वाले 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों में से एक को हाल ही में दिल्ली पुलिस ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई  के भाई और एक गुर्गे का फर्जी पासपोर्ट बनवाने के आरोप में गिरफ्तार किया था. गिरफ्तार आरोपियों से पुलिस ने 17 मोबाइल फोन, 3 कार्ड स्वाइप मशीन, 19 फेक आधार कार्ड, 43 फेक वोटर आईडी, 33 फर्जी पैन कार्ड, 87 चेक बुक, 74 पासपोर्ट, 20 डेबिट कार्ड और 4 गाड़ियों सहित 9 टूव्हीलर बरामद किए है.

इस तरीके से करते थे धोखाधड़ी

दिल्ली  पुलिस ने बताया कि एक बैंक के क्रेडिट कंट्रोल एंड इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी. शिकायत में कहा गया था कि संदिग्ध बैंक अकाउंट्स की जांच के दौरान पता चला कि 35 अलग-अलग बैंक अकाउंट पर  2 आदमी के फोटो और हस्ताक्षर मिले हैं. बैंक की जांच में ये भी पता चला कि 12 अकाउंट्स डिजिटल आधार वेरिफिकेशन के जरिये खोले गए थे. जिनमें एक ही शख्स की फोटो लगी हुई थी. आरोपियों ने बैंक से क्रेडिट कार्ड, जम्बो लोन, पर्सनल लोन और व्हीकल लोन लेकर करीब 1 करोड़ 26 लाख का बैंक को चूना लगा दिया था.

मनी ट्रेल और सीडीआर की मदद से हुई गिरफ्तारी

दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ यूनिट ने आरोपियों की फाइनेंसियल ट्रेल और सीडीआर की मदद से एस प्रजापति नाम के आरोपी को दिल्ली से ही गिरफ्तार कर लिया. जिसके बाद इसके साथी एन प्रजापति की भी गिरफ्तारी हुई. जो फिलहाल गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई और एक साथी का फर्जी डॉक्यूमेंट की मदद से पासपोर्ट बनवाने के आरोप में तिहाड़ जेल में बंद था.

आरोपियों ने यह दी जानकारी

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे लोग आधार अपडेशन केंद्र चलाते थे. जब भी अनपढ़ या कम पढ़ा लिखा शख्स इनके सेंटर पर आधार अपडेट करवाने आता तो ये उसके बॉयोमेट्रिक डिटेल्स का इस्तेमाल कर अपनी फोटो और कोई दूसरा एड्रेस अपडेट कर देते. आधार कार्ड अपडेट  होने के बाद ये ऑनलाइन आधार की कॉपी निकालकर उस शख्स की तस्वीर वापस एडिट करके उसे उसका आधार दे देते थे. लेकिन आधार के डेटा बेस में इनकी ही तस्वीर और पता रहता.ये दोनों ऑनलाइन बैंक एकाउंट खोलने की फैसिलिटी का इस्तेमाल कर इन आधार कार्ड की मदद से फर्जी बैंक अकाउंट खोल लेते थे. जिनके जरिये आधार के डेटा बेस में दर्ज डिटेल्स वेरीफाई हो जाती थी. इनका बैंक एकाउंट खुल जाता था.

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