National Wheels

प्रो. केबी पांडेय की पुस्तक ‘अवधी लोकगीत माला’ का विमोचन

प्रो. केबी पांडेय की पुस्तक ‘अवधी लोकगीत माला’ का विमोचन

प्रयागराज : राम और कृष्ण की गाथा जितनी शास्त्रीय रूपों से आगे बढ़ी है, उससे कहीं ज्यादा लोक गाथाओं के विभिन्न माध्यमों से आगे बढ़ी है। लोक के जुड़ाव ने ही राम, कृष्ण की गाथा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती हुई आज हमारे पास तक पहुंची है।

यह बात संस्कार भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री अभिजित गोखले ने प्रदेश के 4 विश्वविद्यालयों के कुलपति और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रह चुके प्रो. केबी पांडेय द्वारा लिखित अवधी लोकगीत माला पुस्तक का विमोचन करते हुए कही। माघ मेला में संस्कार भारती के सांस्कृतिक शिविर में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में बोलते हुए श्री गोखले ने इस पुस्तक में राम और कृष्ण के जीवन पर आधारित लोकगीतों की सराहना करते हुए पुस्तक को बहुउपयोगी बताया।

लोकगीत रचयिता प्रो. केबी पांडेय ने इन गीतों का उत्स अपने पिता को बताते हुए कहा कि यह उनकी सांस्कृतिक विरासत है, जो उनके बचपन में बीज रूप में आ गई और अब जीवन के नवें दशक में प्रस्फुटित हुई।

मंच संचालन और पुस्तक के बारे में बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार डॉ प्रदीप भटनागर ने इसे सार्थक पहल बताते हुए कहा कि यह धारणा गलत है कि लोकगीत का मतलब गांव और कम पढ़े लिखे लोगों की चीज होता है। इस भ्रांत धारणा के कारण ही हमारे लोकगीत संभ्रांत लोगों द्वारा उपेक्षित होकर द्विअर्थी संवादों और अश्लीलता से भर गए हैं।

डॉ प्रदीप भटनागर ने कहा कि आज लोकगीत रचने और गाने वाला ग्रामीण परिवेश का सामान्य पढ़ा लिखा व्यक्ति है और धर्म ग्रंथों को पढ़ने वाला बौद्धिक समाज लोकगीत लिखता नहीं, नतीजतन दोनों के बीच एक बड़ी खांई बन गई है। उन्होंने कहा कि प्रो. पांडेय की यह पुस्तक इस खांई को पाटने का काम करेगी. ऐसा मेरा विश्वास है।

प्रारंभ में संस्कार भारती प्रयागराज के अध्यक्ष योगेन्द्र मिश्र ने अतिथियों को पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया। समारोह में पूर्व न्यायमूर्ति सुधीर नारायण अग्रवाल, वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र पाठक, डॉ आभा त्रिपाठी, श्री रंजन शुक्ला, संतोष कुमार आदि अनेक लोग उपस्थित थे. कार्यक्रम का संयोजन सुशील राय ने किया था।

(डाॅ प्रदीप भटनागर के फेसबुक वाॅल से)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.