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प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व से अवधारणा तक पहुंचने का विवरण देती किताब

प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व से अवधारणा तक पहुंचने का विवरण देती किताब

डॉ स्वदेश सिंह

नई दिल्ली

केंद्र में मोदी सरकार को आए आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। दो साल के कोरोना संकट के बाद, इस वर्ष हम महामारी से आगे के बारे में सोच पा रहे हैं। यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि सरकार ने इस अवधि के दौरान कल्याणकारी योजनाओं, नीतियों और कार्यक्रम की पहल के संदर्भ में संतोषजनक कार्य किया है। इसके अलावा, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता पर सरकार के जोर ने राष्ट्रीय पुनर्निर्माण की यात्रा को एक सही दिशा प्रदान की है। सरकार या उसके किसी भी सदस्य के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे हैं, जो विकास नीतियों और कार्यान्वित परियोजनाओं के बड़े पैमाने को ध्यान में रखते हुए एक बड़ी उपलब्धि है।सरकार के सामने कोरोना महामारी एक बड़ी और अभूतपूर्व चुनौती बनकर आई। लगातार परिवर्तनशील वायरस को समझने से लेकर वैक्सीन के विकास तक, वैक्सीन के लगाने से लेकर सभी प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत तक, इस संकट के कई पहलुओं को सरकार द्वारा रोका गया, जिन्होंने मृत्यु, तबाही और निराशा के सामने तत्परता, जवाबदेही और पहल दिखायी। ख़ासकर सामाजिक संरचना में सबसे निचले स्तर पर रहने वालों को राहत और सहायता कार्य में निर्विवाद रूप से प्राथमिकता मिली। इन प्रयासों का ही परिणाम था कि क्रमिक लॉकडाउन के गंभीर प्रभावों के बावजूद अर्थव्यवस्था तेजी से पटरी पर आ गई है।केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए कार्यों की नींव गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके 13 साल के कार्यकाल के दौरान रखी गई थी। इन वर्षों के दौरान, उन्होंने विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों केपरीक्षण और उन्हें कारगर बनाने के लिए गुजरात को एक प्रयोगशाला के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने एक निवेश अनुकूल जीवंत गुजरात विकसित करने के लिए राज्य की व्यावसायिक क्षमता और सांस्कृतिक समृद्धि का दोहन किया। कच्छ और भुज जैसे कम विकसित क्षेत्रों को भी विकास के दायरे में लाया गया। महिलाओं और आदिवासियों के विकास को प्राथमिकता दी गई और शिक्षा क्षेत्र को सुर्खियों में लाया गया। नतीजतन, गुजरात ने इनके कार्यकाल के संपूर्ण समय के दौरान दहाई में विकास दर देखा।’मोदी @ 20, सपने हुए साकार’ मोदी@20, ड्रीम्स मीट डिलीवरी का हिंदी संस्करण है जो हाल ही में जारी एक पुस्तक है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में रहने के दो दशकों का पूरा विवरण देती है। यह पुस्तक उन लोगों द्वारा लिखे गए लेखों का एक संग्रह है, जिन्होंने या तो मोदीजी के साथ मिलकर काम किया है (जैसे अमित शाह, नृपेंद्र मिश्रा, अजीत डोवल, एस जयशंकर) या डोमेन विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में विकास बड़ा काम किया है (जैसे पीवी सिद्धू, अमीश त्रिपाठी, अनुपम खेर और देवी शेट्टी)।

निबंधों को पांच खंडों में बांटा गया है, जिनमें से पहले का शीर्षक ‘पीपल फर्स्ट’ है। पिछले आठ वर्षों में सरकार द्वारा सभी योजना, रणनीति और क्रियान्वयनों में लोगों को सबसे आगे लाया है। सरकार का नारा शुरू से ही ‘सबका साथ, सबका विकास’ रहा है और बाद में ‘सबका विश्वास’ और ‘सबका प्रयास’ तक बढ़ा दिया गया। यह इसी दृष्टिकोण का परिणाम है कि महिलाएं, गरीब और युवा कई सरकारी योजनाओं के प्राथमिक लाभार्थी बन गए हैं, जिससे सशक्तिकरण के मामले में व्यापक प्रभाव पड़ा है। इस खंड के लेखों में, पीवी सिंधू का एक लेख है, जो युवाओं और महिलाओं का प्रतिनिधित्व करता है- दोनों को ही सरकार के नीति निर्माताओं द्वारा प्राथमिकता दी गई है।’एकता और विकास की राजनीति’ शीर्षक वाला दूसरा खंड देश की एकता और अखंडता की दिशा में किए गए प्रयासों के बारे में बात करता है। विविधता में एकता और एकता में विविधता दोनों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सरकार ने लगातार ‘एक भारत, श्रेष्ठभारत’ का नारा बुलंद किया है। इस खंड एक महत्वपूर्ण निबंध गृह मंत्री अमित शाह का है जो लंबे समय से मोदीजी के सहयोगी रहे हैं। अमित शाह ने न केवल मोदी की नीतियों और कार्यक्रमों को फलते-फूलते देखा है, बल्कि उनके साथ एक अनूठी पहल भी की है। शाह लिखते हैं, “गुजरात में उनके कई कार्यक्रम, उदाहरण के लिए, दक्षिण गुजरात से नर्मदा के जल को सौराष्ट्र में लाना, एक दूरदर्शी अवधारणा थी। उस अवधारणा को मूर्त रूप देने का काम एक से अधिक चुनावी चक्रों में चला। मोदी ने न केवल अगले चुनाव बल्कि अगले दशक और अगली पीढ़ी के गुजरात के लिए काम किया। उम्मीदों के मुताबिक भाजपा अगले दशक और अगली पीढ़ी के लिए गुजरात के विकास और आकांक्षाओं का राजनीतिक वाहक भी बन गई।‘जनधन और सभी के लिए अर्थव्यवस्था’ अगला खंड है जहां मोदी के आर्थिक परिप्रेक्ष्य का अन्वेषण किया जाता है। आर्थिक पुनरुत्थान के लिए कौशल विकास और गति पर ध्यान केंद्रित किया गया है। उदय कोटक ने अपने निबंध में लिखा है कि कैसे व्यवसाय और कॉर्पोरेट क्षेत्र राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकते हैं। शमिका रवि का निबंध पांच प्रमुख ‘सूक्ष्म क्रांतियों’ जिन्होंने आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाया हो पर आधारित है।चौथा खंड शासन में नए प्रतिमानों की उपस्थिति की ओर इंगित करता है। प्रस्तुत लेख इस पर चर्चा करते हैं कि कैसे पिछले कुछ वर्षों में शासन को अलग-अलग तरीकों से परिभाषित किया गया है जिससे दृष्टिकोण में बदलाव आया है। देवी शेट्टी हाल के महामारी परिदृश्य और इसके सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार के दृष्टिकोण के बारे में बात करते हैं, जबकि नंदन नीलेकणि चर्चा करते हैं कि कैसे पिछले आठ वर्षों में शासन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता के लिए प्रौद्योगिकी का व्यवस्थित और लगातार उपयोग किया गया है। अशोक गुलाटी कृषि क्षेत्र के बारे में विचार करते हैं और सरकारी पहल की सराहना करते हैं साथ ही वे बताते हैं कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।पीएम मोदी के साथ प्रधान सचिव के रूप में काम कर चुके नृपेंद्र मिश्रा लिखते हैं, “एक राजनेता और एक असाधारण नेता के रूप में, प्रधानमंत्री मोदी के पास न केवल लोगों के लिए एक दृष्टि थी, बल्कि उस दृष्टि को वास्तविकता में ज़मीन पर उतारने की क्षमता भी प्रदर्शित की गई थी। एक भव्य योजना को साकार रूप देने के लिए उन्होंने छोटे-छोटे कार्यक्रम बनाए, व्यवहारिक कदम उठाए।” वसुधैव कुटुम्बकम शीर्षक वाले अंतिम खंड में कुछ उत्कृष्ट विचारोत्तेजक लेख भी शामिल हैं। पिछले आठ वर्षों में, भारत ने दुनिया में खुद को पुनः स्थापित किया है। भाईचारा और सह-अस्तित्व भारतीय चिंतन के पुराने नियम रहे हैं। दुनिया महामारी और युद्ध के समय में मार्गदर्शन के लिए भारत की बढ़ी हुई भूमिका देख रही है। इस संदर्भ में अजीत डोवल लिखते हैं कि कैसे इस दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रमुखता मिली है। नेशन फर्स्ट की भावना के साथ कभी सीमाओं और सैनिकों के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं करने के विचार को स्वीकृति मिली है। मनोज लाडवा और भरत बरई ने भारत को एक उभरती हुई वैश्विक परिघटना के रूप में चर्चा की है। अंतिम लेख में, एस जयशंकर ऐतिहासिक विदेश नीति पहलों का प्रत्यक्ष विवरण देते हैं।यह पुस्तक मोदी के एक व्यक्तित्व से एक अवधारणा के रूप में विकसित होने की कहानी है जिसे एकसंकलन के रूप में उपयुक्त रूप से लिखा गया है। विभिन्न क्षेत्रों के लेखक पुस्तक में एक अद्वितीय वस्तुनिष्ठता लाते हैं, जो उक्त घटना में योगदान करने के कारण एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। मोदी के व्यक्तित्व पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, यह पुस्तक एक तर्कसंगत दृष्टिकोण लेती है और विभिन्न क्षेत्रों पर मोदी के प्रभाव पर चर्चा करती है। यह पुस्तक उस विशाल कार्य को पूरा करने में सफल है जिसे करने के लिए उसने निर्धारित किया था – इन बीस वर्षों को समझना जिसने भारत को दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार कर एक युवा ऊर्जावान राष्ट्र में बदल दिया है।

(लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज में राजनीति शास्त्र पढ़ाते हैं व भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके हैं।)

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