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पहल : ‘अडॉप्ट पीपल विद टीबी’

पहल : ‘अडॉप्ट पीपल विद टीबी’

सबका साथ-सबका विकास के साथ ही अगर सबका विश्वास हो तो भारत बड़े से बड़े लक्ष्य को पार कर सकता है। इसी सूत्र के साथ अब भारत ने देश से तपेदिक यानि टीबी को हराने और देश को 2025 तक टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए केंद्र सरकार टीबी मरीज को गोद लेने की पहल की शुरुआत करने जा रही है।

वर्ष 2025 तक देश को टीबी से मुक्त बनाने के लक्ष्य को सफल बनाने के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अब क्षय रोग से पीड़ित लोगों को गोद लेने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत कोई भी स्वयंसेवी संस्था, औद्योगिक इकाई या संगठन, राजनीतिक दल या कोई व्यक्ति टीबी के मरीज को गोद ले सकेगा, ताकि वह उसका समुचित इलाज करा सके। इस योजना को ‘अडॉप्ट पीपल विद टीबी’ कहा जा रहा है।

दरअसल अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में या लापरवाही की वजह से टीबी के मरीज बीच में ही अपना इलाज छोड़ देते हैं। टीबी का इलाज करीब 6 महीने तक चलता है, साथ ही व्यक्ति को खान-पान का विशेष ध्यान रखना होता है, जिससे उसके अंदर संक्रमण से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता बढ़े। इलाज पूरा न होने और दवा सही समय पर न खाने से मरीज के अंदर का टीबी वायरस खत्म नहीं होता और दूसरे भी संपर्क में आकर संक्रमित हो सकते हैं। ऐसे में सरकार की गोद लेने की यह पहल भारत को टीबी मुक्त करने में बड़ा योगदान देगी।

मरीजों के इलाज और खानपान का खर्च उठा सकेंगे

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने इस योजना के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि देश को तपेदिक से मुक्त बनाने की दिशा में मंत्रालय इस रोग से पीड़ित मरीजों को अपनाने का अभियान शुरू करने जा रहा है। लोग सामाजिक दायित्व के तहत मरीजों के इलाज और खानपान का खर्च उठा सकेंगे। इसके लिए स्टेक होल्डर और समाज के लोगों का आह्वान किया जाएगा।

मेड इन इंडिया” ‘सी-टीबी’ त्वचा परीक्षण होगा लॉन्च

केंद्रीय मंत्री डॉ मंडाविया ने घोषणा की कि इस साल के अंत में ‘सी-टीबी’ नामक एक नया स्वीकृत “मेड इन इंडिया” टीबी संक्रमण त्वचा परीक्षण लॉन्च करेंगे। उन्होंने बताया कि कम लागत वाला यह किट अन्य अत्यधिक मामलों वाले देशों के लिए काफी लाभकारी होगा। डॉ. मंडाविया ने टीबी को खत्म करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और सभी से “टीबी समाप्त” लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हर स्तर पर सहयोग और सहयोग करने का आग्रह किया।

टीबी संक्रमण का पता करने के दो तरह के परीक्षण

दरअसल, टीबी संक्रमण का पता करने के दो तरह के परीक्षण होते हैं- रक्त परीक्षण और त्वचा परीक्षण। रक्त परीक्षण के लिए मरीज के शरीर से रक्त लेकर परीक्षण किया जाता है। त्वचा परीक्षण के लिए तरल पदार्थ की एक कम मात्रा बांहों की त्वचा के नीचे रखा जाता है। डॉक्टर या नर्स को त्वचा परीक्षण के परिणाम दिखाने के लिए दो या तीन दिनों में वापस आने की आवश्यकता होगी। यदि टीबी परीक्षण पॉजिटिव निकला तो इसका मतलब है कि आपके शरीर में टीबी के कीटाणु है, और आपका डॉक्टर आप में टीबी की बीमारी है कि नहीं, यह सुनिश्चित करने के लिए छाती का एक्स-रे करने के लिए कह सकता है।

कोरोना काल में भी टीबी से लड़ रहा देश

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग माध्यम से 35वीं स्टॉप टीबी पार्टनरशिप बोर्ड की बैठक को संबोधित डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों जैसे माननीय संसद सदस्यों, राज्यों में विधानसभाओं के माननीय सदस्यों, शहरी स्थानीय निकायों के सदस्यों और जमीनी स्तर पर पंचायत प्रतिनिधियों को टीबी के लिए जागरूकता बढ़ाने और उसके निवारण में सक्रिय रूप से शामिल कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश में आपदा को अवसर में बदलने के लिए कई नई पहल की गई हैं, जैसे कोरोना के साथ टीबी का ‘द्वि दिशात्मक परीक्षण’, घर-घर टीबी का पता लगाने के अभियान, उप-जिला स्तरों पर तेजी से आणविक निदान का पैमाना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल उपकरणों का उपयोग शामिल है

टीबी से मुक्ति के लिए केंद्र सरकार ने उठाए कई अहम कदम

केंद्र सरकार ने 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने का संकल्प लेते हुए इस बीमारी के खिलाफ एक जन आंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए केंद्र सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। समाज में टीबी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 12 हजार से अधिक टीबी चैंपियंस को प्रशिक्षित किया गया। देश में 4.39 लाख से अधिक टीबी उपचार समर्थकों अपने योगदान दे रहे हैं। वही निक्षय पोषण योजना के जरिए टीबी रोगियों को पूरक पोषण दिया जा रहा है। 2021 में 13.57 लाख टीबी रोगियों को डीबीटी के माध्यम से 294.88 करोड़ की सहायता भी जारी की गई थी। इसके अलावा RNTCP के तहत सभी रोगियों को टीबी रोधी दवाओं सहित नि:शुल्क निदान और उपचार की सुविधा भी प्रदान की गई है।

भारत में टीबी के लिए बजट आवंटन में पिछले 5 वर्षों में चार गुना वृद्धि
भारत में टीबी के लिए बजट आवंटन में बीते 5 वर्षों में चार गुना वृद्धि देखी गई है। उच्च-गुणवत्ता वाली दवाओं, डिजिटल तकनीक, निजी क्षेत्र और समुदायों के बीच स्वास्थ्य प्रणाली के भीतर सभी स्तरों पर टीबी सेवाओं को एकीकृत करके देश में टीबी की घटनाओं और मृत्यु दर में तेजी से गिरावट लाने के लिए इनका इस्तेमाल किया गया है।”

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