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पहली ऐसी सरकार है जो नजरअंदाज ‘वीरों’ को दे रही सम्मान

जतिन चतुर्वेदी

प्रतापगढ़। आजादी के अमृत महोत्सव के परिप्रेक्ष्य में प्रतापगढ़ के तुलसी सदन हादी हाल में वीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती के अवसर पर काव्य पाठ एवं संवाद का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा कि वीर सावरकर जैसे तमाम क्रांतिकारियों का जो सपना था, उसको देश की नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार साकार कर रही है। डॉ महेंद्र सिंह ने इस अवसर पर कहा कि आजादी के बाद एक ऐसी सरकार आई है जो ऐसे लोगों को इतिहास में स्थान दे रही है जिनको नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर एक ऐसी शख्सियत थे जिन्हें दो-दो बार आजीवन कारावास की सजा हुई। उन्होंने भारत माता के लिए अपने पूरे जीवन को निछावर कर दिया।

डॉक्टर महेंद्र सिंह ने कहा कि जब देश में कोई भी व्यक्ति 1857 के स्वतंत्रता आंदोलन को स्वतंत्रता आंदोलन कहने के लिए तैयार नहीं था उस परिस्थिति में 1857 की क्रांति को पहला स्वतंत्र संग्राम कहने वाले वीर सावरकर थे। इस अवसर पर डॉ महेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय पत्रिका “नेशनल व्हील्स” के वीर सावरकर विशेषांक का विमोचन भी किया।

कार्यक्रम के आयोजक बृजेंद्र सिंह व अनिल उदय तिवारी ने सभी का धन्यवाद दिया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ दिनेश सिंह रहे,भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश त्रिपाठी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कवियित्री डॉ नीलिमा मिश्रा, डॉक्टर समाज शेखर , डॉक्टर अजय मिश्रा आदि ने संबोधित किया। इस अवसर पर ट्रक ट्रांसपोर्ट यूनियन के जिला अध्यक्ष विजय सिंह, अजीत नगर के सभासद अनिल सिंह, नेशनल व्हील्स पत्रिका के संपादक रणविजय सिंह, पत्रकार सौरभ सिंह सोमवंशी, भाजपा युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष अंशुमान सिंह व अन्य लोग आदि उपस्थित रहे।

नेशनल फर्स्ट होता तो देश विभाजन न होता – योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में कहा कि वीर सावरकर की बात को कांग्रेस ने माना होता तो देश विभाजन की त्रासदी से बच जाता। उस समय का नेतृत्व अगर दृढ़ इच्छाशक्ति से काम लेता तो यह नहीं होता। नेशन फर्स्ट की नीति को अपनाया होता तो विभाजन नहीं होता। चीन हमला न करता, आतंकवाद नहीं फैलता। हमारे सैनिक जीतते थे पर हम तुष्टीकरण के लेबल पर हार जाते थे। केंद्रीय सूचना आयुक्त उदय माहूरकर और चिरायु पंडित की पुस्तक “वीर सावरकर” का उनकी जयंती पर विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले अंग्रेजों ने फिर आजादी के बाद जिन लोगों के हाथों में सत्ता आई उन्होंने वीर सावरकर की प्रतिभा को छिपाने का प्रयास किया। अटल सरकार में सेल्यूलर जेल में वीर सावरकर की प्रतिमा लगाई गई थी जिसे कांग्रेस सरकार ने हटा दिया। सावरकर ने हिंदू शब्द और हिंदुत्व की परिभाषा दी दुर्भाग्य से सत्तारूढ़ दलों ने सावरकर की तुलना जिन्ना से भी करने का प्रयास किया तब सावरकर ने इसका खंडन भी किया और कहा जिन्ना सिर्फ मुस्लिम की बात करता है फिर मेरी दृष्ट संपूर्ण में म कहता हूं कि जो नियम हिंदू पर लागू हो वही मुस्लिम और अन्य पर भी। योगी आदित्यनाथ ने कहा विचार कभी मरते नहीं। शब्द ब्रह्म का प्रतीक होते हैं। सास्वत और सत्य दृष्ट का ही आज वृहद और लघु रूप देखने को मिल रहा। पिछली सदी में दुनिया में वीर सावरकर के समान कोई अन्य पैदा नहीं हुआ था। वीर सावरकर को एक ही जन्म में दो बार आजीवन कारावास मिला। आजादी के बाद जो सम्मान सावरकर को मिलना चाहिए था नहीं मिला।

प्राथमिक विद्यालयों के पाठ्यक्रम में भी आएं स्वातंत्र्यवीर

139वीं जयंती पर प्रयागराज में भी स्वातंत्र्यवीर सावरकर खूब याद किए गए। हिंदुस्तानी अकैडमी में अतिथियों ने वीर सावरकर के व्यक्तित्व कृतित्व का वर्णन किया। एकेडमी के अध्यक्ष डॉ उदय प्रताप सिंह ने कहा 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में वीर सावरकर की भूमिका पर एक किताब आनी चाहिए वह शस्त्र और शास्त्र दोनों में पारंगत थे उनकी गाथा बच्चे भी जाने इसलिए वीर सावरकर की भूमिका को प्राथमिक पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाना चाहिए।  उधर, महाकाल लोक सेवा मंडल के पंजाबी कॉलोनी स्थित सभागार में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के प्रोफेसर जयंत खोत ने कहा सावरकर ने जिस नीति, संयम और संघर्ष का प्रदर्शन करते हुए जलयान से समुद्र में छलांग लगाई, वह उनके साहसी व्यक्तित्व का परिचायक है। उनके सामने विलक्षण, अद्भुत और अद्वितीय शब्द भी कमतर प्रतीत होते हैं। देश को स्वतंत्रता दिलाने में उनका संघर्ष अतुलनीय है। वह भारतीय संस्कृत में रचे बसे कट्टर देशभक्त, समाजसेवी, शिक्षाविद, रचनाकार के रूप में प्रत्येक देशवासी के मन और मस्तिष्क में सर्वदा के लिए अमर हो चुके हैं।

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