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नर्सिंग कॉलेजों में चल रहा है फर्जीवाड़ा, मान्यता से जुड़े 37 हजार पन्ने गायब, सरकार से जवाब तलब


MP News: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नर्सिंग कॉलेजों के फर्जीवाड़े से जुड़े मामले में गुरुवार को जबलपुर हाईकोर्ट (Jabalpur High Court) में सुनवाई के दौरान एक बड़ा खुलासा हुआ. प्रदेश के 453 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता के सभी रिकॉर्ड में से 37 हजार 759 पन्ने गायब हैं. हाईकोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई है. अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि आखिर ये पन्ने कहाँ गायब हो गए हैं? इस याचिका पर चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की खंडपीठ ने 11 जुलाई को फिर से सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं. अगली सुनवाई पर सरकार को स्पष्टीकरण देना होगा.

नर्सिंग कॉलेजों के रिकॉर्ड पेश किए गए

लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने प्रदेश के फर्जी नर्सिंग कॉलेजों को चुनौती देते हुए एक जनहित याचिका दायर की थी. पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के आदेश पर मध्य प्रदेश सरकार ने नर्सिंग काउंसिल में रखे हुए प्रदेश के 453 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता के समस्त रिकॉर्ड कोर्ट में पेश किए. हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को रिकॉर्ड के निरीक्षण की अनुमति दी थी. रिकॉर्ड के निरीक्षण के बाद विशाल बघेल ने अपनी निरीक्षण रिपोर्ट कोर्ट में पेश की. रिपोर्ट में बताया गया कि नर्सिंग काउंसिल द्वारा कोर्ट में पेश किए गए रिकॉर्ड में से 37 हजार 759 पन्ने गायब हैं. इनका उल्लेख मान्यता की फाइलों में तो है, लेकिन वास्तिवकता में वो कागज नहीं हैं.

कोर्ट ने दिए ये निर्देश

याचिकाकर्ता की निरीक्षण रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. रिपोर्ट में ऐसे 80 कॉलेजों की सूची भी पेश की गई है, जिसमें प्राचार्य और अन्य शैक्षणिक स्टाफ को एक ही समय में एक से अधिक संस्थाओं में कार्यरत दर्शाया गया है. ऐसे अनेक कॉलेजों की फोटो पेश की गई है, जो एक ही भवन में अलग-अलग पाठ्यक्रमों की मान्यता लेकर संचालित हो रहे हैं. याचिकाकर्ता की ओर से वकील आलोक वागरेचा ने 2020-21 के नर्सिंग कॉलेजों द्वारा ऑनलाइन फार्म में भरे गए शैक्षणिक स्टाफ और अन्य दस्तावेज सॉफ्ट कॉपी में मांगे हैं. कोर्ट ने काउंसिल को समस्त रिकॉर्ड का एक्सेस याचिकाकर्ता को प्रदान करने के निर्देश दिए. इस मामले में नर्सिंग काउंसिल की ओर से ग्वालियर हाईकोर्ट की तर्ज पर 453 नर्सिंग कॉलेजों की जांच के लिए कमेटी बनाने का आग्रह किया गया. इस आग्रह को हाईकोर्ट ने इसे नकार दिया.

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