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द्रवित होकर गोली चलाने वाला ही सच्चा क्रांतिकारी -अखिलेश श्रीवास्तव

द्रवित होकर गोली चलाने वाला ही सच्चा क्रांतिकारी -अखिलेश श्रीवास्तव

नेशनल व्हील्स और हिंदुस्तानी एकेडमी के तत्वावधान में नेशनल व्हील्स के क्रांतिकारी विशेषांक का विमोचन भी हुआ

 

प्रयागराज  नेशनल व्हील्स और हिंदुस्तानी एकेडमी के तत्वावधान में शुक्रवार को देश को आजाद कराने वाले क्रांतिकारियों को याद याद किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने आजादी के दीवानों के अनछुए पहलुओं को याद किया । इस अवसर पर नेशनल व्हील्स के क्रांतिकारी विशेषांक का विमोचन भी किया गया।

मुख्य वक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के विषय पर परिचर्चा का काम प्रयागराज से ही शुरू किया जाए। कहा कि 1857 से 1947 तक 90 साल तक देश को आजाद कराने के लिए सतत प्रयास किया गया। गुंडा , माफिया , डान , बदमाश कभी क्रांतिकारी नहीं होता है। क्रांतिकारी हमेशा ईमानदारी , निष्ठावान , नैतिकवान होता है। 90 साल में एक भी अपराधी क्रांतिकारी नहीं बना , सभी क्रांतिकारी पवित्र मन से सराबोर थे। सभी क्रांतिकारी सत्ता परिवर्तन के साथ वैचारिक क्रांति भी चाहते थे। प्रयागराज की धरती क्रांति की धरती है । यह धरती चंद्रशेखर आजाद , लाल पद्मधर जैसे वीरों की धरती है। उन्होंने कहा कि जो द्रवित होकर गोली चलाता है वह क्रांतिकारी होता है और जो क्रूर होकर गोली चलाता है वह आतंवादी होता है। यदि हिंसक क्रांति न होती तो अहिंसक आंदोलन सफल न होता। हिंसक और अहिंसक क्रांति एक दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि पूरक थे।

मुख्य अतिथि चौधरी राघवेंद्र नाथ सिंह ने कहा कि 1857 में मेरठ से उठी चिंगारी इलाहाबाद में तीन-चार दिन बाद ही पहुंच गई। यहां के क्रांतिकारियों ने पूरे इलाहाबाद को अपने कब्जे में ले लिया था , अंग्रेजों को क्रांतिकारियों से मुक्त कराने के लिए बाहर के जिलों से सेना बुलानी पड़ी। चंद्रशेखर आजाद की मौत न होती यदि उनको लेकर मुखबिरी न की गई होती। श्री सिंह ने कहा कि उनके परिवार ने भी देश की आजादी में महत्ती भूमिका निभाई है । उनके चाचा भी क्रांतिकारी थे । उन्होंने कहा कि वही देश विकास के पथ पर आगे बढ़ता है जिसके दिल में राष्ट्र प्रेम की भावना कूट-कूट कर भरी हो।

सीए डॉ. पवन जायसवाल ने उन दीवानों को याद किया जिनके दम पर हिंदुस्तान आजाद हुआ। बताया कि वह शासकीय और व्यक्तिगत तौर से विभिन्न स्थानों की यात्रा करते रहते हैं। इस दौरान देख रहा हूँ कि आजादी की 75वें साल पर देश वास्तव में विकास कर रहा है। युवाओं में विश्वास जगा है कि वे अब देश के विकास के लिए काफी कुछ कर सकते हैं।

इविंग क्रिश्चियन कालेज के अर्थशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ . उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि आज भारत के हर नागरिक का कर्तव्य है कि हिंदुस्तान को आगे ले जाने के लिए किसी न किसी रूप में योगदान दे। मैं अर्थशास्त्र का अध्यापक हूं , इसलिए इतिहास और आज की स्थिति को देखता हूँ तो लगता है कि इस वक्त हम तेजी से विकास कर रहे हैं। आज जो मुखरता आई है वह यहां के नागरिकों के विश्वास को प्रकट करता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया की व्यवस्था को लीड करेगा। विश्वास ही हिंदुस्तान को पुराना गौरव हासिल करने में सहायता करेगा। उन्होंने महंगाई को भी विस्तार से समझाया।

अध्यक्षता कर रहे आयुर्वेदाचार्य एसके राय ने कहा कि मैं बलिया का रहने वाला हूं , इसलिए मंगल पांडेय और चित्तू पांडेय की याद का आना स्वाभाविक है। उनकी याद आते ही बाहें फड़फड़ाने लगती है। कहा कि क्रांतिकारी वही होता है जिनमें सतोगुण गुण होता है , जिनको देखते ही तन और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। भारत मानसिक , शारीरिक और आध्यात्मिक दृष्टि से समृद्ध देश है।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे डां राजेश सिंह ने कहा कि देश 15 अगस्त को आजाद हो गया लेकिन उनके पहले से हम 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस मनाते आए हैं । इसीलिए 26 जनवरी का अस्तित्व बना रहे , सो इस तारीख को गणतंत्र दिवस के रूप में चुना गया। आजादी की इतिहास की बातें कहने को तो बहुत है लेकिन सुभाषचंद्र बोस का एक वाक्या बताना चाहता हूं । वह जर्मनी में थे। सुभाष जी से मिलने कई लोग आए , जो हिटलर के हमशक्ल थे लेकिन सुभाष जी ने किसी से बात नहीं किया , एक व्यक्ति आया और सुभाष बाबू के कंधे पर हाथ रखकर हाल पूछा तो सुभाष चंद्र ने हिटलर के साथ गर्मजोशी से बात करना शुरू किया। तब हिटलर ने पूछा कि आपने मुझे कैसे पहचाना। सुभाष जी ने कहा कि उनके कंधे पर सिर्फ असली हिटलर ही हाथ रख सकता है। भारत में ऐसे वीरों की कमी नहीं है , इन्हीं के दम पर हिंदुस्तान आजाद हुआ। आजादी के दीवानों तो दुनिया से विदा ले चुके हैं , वो हकीकत बताने के लिए उपलब्ध नहीं हैं , इसलिए अब इतिहासकारों को सही इतिहास बताने की जरूरत है न कि गलत सूचना देकर लोगों को बरगलाने की।

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