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देश में सेमीकंडक्टर सेक्टर के विकास की संभावनाएं अपार

देश में सेमीकंडक्टर सेक्टर के विकास की संभावनाएं अपार

अपनी नीतियों के माध्यम से केंद्र सरकार का यह निरंतर प्रयास रहा है कि ऐसा माहौल बने कि भारत में सेमीकंडक्टर जैसे नए सेक्टर्स के विकास की संभावनाएं बढ़ जाएं। बीते कुछ समय की बात करें तो देश के सेमीकंडक्टर सेक्टर में जबरदस्त उछाल आया है। याद हो कैबिनेट ने 15 दिसंबर 2021 को भारत में सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास के लिए कार्यक्रम को मंजूरी दी थी और बेहद कम समय में भारत ने तेजी से इस क्षेत्र में कार्य किया है। अब भारत सरकार चाहती है कि इस क्षेत्र में देश नए-नए कीर्तिमान स्थापित करे।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन

इसके लिए भारत सरकार ने ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ भी शुरू किया है। जी हां, केंद्र सरकार पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के अपने महत्वपूर्ण उद्देश्य पर केंद्रित है और यह सुनिश्चित करती है कि यह भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को उत्प्रेरित करे। इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर्स में आत्मनिर्भरता की इस दृष्टि को पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा और गति दी गई।

इस वर्ष सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम को सेमीकंडक्टर के विकास और हमारे देश में डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास के लिए 76,000 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय के साथ मंजूरी दी जा चुकी है। कार्यक्रम का उद्देश्य सेमीकंडक्टर्स, डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग और डिजाइन इकोसिस्टम में निवेश करने वाली कंपनियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। यह वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की बढ़ती उपस्थिति का मार्ग प्रशस्त करने का काम करेगा।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) को डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के भीतर एक स्वतंत्र व्यापार प्रभाग के रूप में स्थापित किया गया है, जिसमें अर्धचालक विकसित करने और विनिर्माण सुविधाओं और अर्धचालक डिजाइन पारिस्थितिकी तंत्र को प्रदर्शित करने के लिए भारत की दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने और चलाने के लिए प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता है। सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले उद्योग में वैश्विक विशेषज्ञों के नेतृत्व में आईएसएम योजनाओं के कुशल, सुसंगत और सुचारू कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगा।

सेमी-कंडक्टर्स की खपत 110 बिलियन डॉलर पार करने की उम्मीद

यूं तो छोटे से बड़ा हर व्यवसाय देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है लेकिन जहां बात आती है सेमीकंडक्टर जैसे नए सेक्टर्स की तो वहां भारत के संदर्भ में अभी और काम होना बाकी है। इस क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं।

सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स की नींव हैं। इसलिए सेमीकंडक्टर को किसी भी इलेक्ट्रॉनिक सामान का डीएनए भी कहा जाता है। ज्ञात हो, भारत में सेमी-कंडक्टर्स की खपत 2026 तक 80 बिलियन डॉलर और 2030 तक 110 बिलियन डॉलर को पार करने की उम्मीद है।

युवा एंटरप्रेन्योर को प्रोत्साहन मिलना जरूरी

यही कारण है कि सरकार इस क्षेत्र में युवा एंटरप्रेन्योर को काफी प्रोत्साहित कर रही है। दरअसल, सरकार चाहती है कि सामान्य परिवार का युवा भी इस सेक्टर से जुड़े ताकि देश के साथ-साथ उनकी तरक्की भी हो सके।

देश में केंद्र सरकार द्वारा लाई गई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानि PLI योजना ने पुराने सेक्टरों में ‘मेक इन इंडिया’ का उत्साह तो भरा ही है साथ ही सेमीकंडक्टर जैसे नए सेक्टर्स के विकास की संभावनाएं भी बनी हैं।

बिजनेस करने का मिल रहा हौसला

ऐसी सरकारी योजनाओं से देश में अब उन लोगों को भी अपना बिजनेस करने का हौसला मिल रहा है, जो कभी इसके बारे में सोचते तक नहीं थे। स्टार्ट अप इंडिया से वो इनोवेशन, वो टैलेंट भी आज यूनिकॉर्न के सपने साकार होते देख रहा है, जिसको कभी रास्ता नहीं दिखता था।

जीवंत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना जरूरी

जी हां, अब नई विश्व व्यवस्था बन रही है जिसमें भारत को इस अवसर का लाभ अवश्य ही उठाना चाहिए। आज भारत में तकनीक और जोखिम लेने की भूख है। ऐसे में भारत में एक जीवंत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना अब हमारी जिम्मेदारी है। भारत मजबूत आर्थिक विकास की ओर अग्रसर है। हमारे पास दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला स्टार्टअप इकोसिस्टम है। हर कुछ हफ्तों में नए यूनिकॉर्न आ रहे हैं।

भारत के पास सेमी-कंडक्टर डिजाइन का एक असाधारण टैलेंट पूल

केवल इतना ही नहीं 21वीं सदी की जरूरतों के मुताबिक देश युवाओं के कौशल और प्रशिक्षण में भारी निवेश किया जा रहा है। हमारे पास सेमी-कंडक्टर डिजाइन का एक असाधारण टैलेंट पूल है, जो दुनिया के 20% इंजीनियर को बनाता है।

बेंगलुरु में सेमीकॉन इंडिया कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में पीएम मोदी ने भारत के सेमी कंडक्टर प्रोद्योगिकियों के लिए एक आकर्षक निवेश गंतव्य होने के छह कारण गिनाए हैं-

  1. भारत 1.3 बिलियन नागरिकों को जोड़ने के लिए डिजिटल इंफ्रा का निर्माण कर रहा है।
  2. हम अगली प्रोद्योगिकी क्रांति के नेतृत्व का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं-5G,AI,IoT,स्वच्छ ऊर्जा आदि
  3. भारत मजबूत आर्थिक विकास की ओर अग्रसर है
  4. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में व्यापक सुधार किए गए हैं
  5. 21वीं सदी की जरूरतों के मुताबिक युवाओं के कौशल व प्रशिक्षण में भारी निवेश किया गया है
  6. हमारे विनिर्माण क्षेत्र को बदलने की दिशा में कई बड़े कदम उठाए गए हैं

आज भारत के पास इतना कुछ है। हमें बस अपने आत्मविश्वास को, आत्मनिर्भरता के अपने जज्बे को मजबूत करना है। ये आत्मविश्वास तभी आएगा जब विकास में सबकी भागीदारी होगा, सबका प्रयास लगेगा।

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