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दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था

दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था

भारतीय अर्थव्यवस्था 2022 में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने को तैयार है। जी हां, हालिया आंकड़े इसी ओर इशारा कर रहे हैं। वित्त वर्ष चालू वित्त वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही को ही ले लीजिए, जिसमें जनवरी-मार्च की अवधि के दौरान भारत की विकास दर अनुमान से अधिक 4.1 प्रतिशत रही है। यह स्पष्ट करती है कि भारतीय इकोनॉमी दुनिया में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रही है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के लगातार मिलते रहे संकेत

याद हो, जनवरी माह में आई आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट भी भारतीय अर्थव्यवस्था की हेल्थ में सुधार होने का हाल बयां कर रहे थे। दरअसल, आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2021-22 में कहा गया था कि आगामी दिनों में भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ेगी, और हुआ भी ठीक ऐसा ही। अच्छी बात यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था उस रफ्तार से भी तेज गति से आगे बढ़ी है जितना कि अनुमान लगाया जा रहा था।
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक की वर्ष 2022-23 के लिए जीडीपी वृद्धि में क्रमशः 8.7 प्रतिशत और 7.5 प्रतिशत के हालिया अनुमान से की जा सकती है। 25 जनवरी 2022 को जारी आईएमएफ के हालिया विश्व आर्थिक आउटलुक वृद्धि अनुमान के अनुसार, वर्ष 2021-22 और 2022-23 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी के 9 प्रतिशत की दर से और 2023-24 में 7.1 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। यह भारत को इन तीनों वर्ष में पूरी दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में पेश करता है।

वित्त-वर्ष 2021-22 में 8.7% रहा ग्रोथ रेट

वित्त वर्ष 2021-22 में भारतीय इकोनॉमी ने उम्दा प्रदर्शन किया है और 8.7 प्रतिशत की विकास दर को छू भी लिया है। इस तरह भारत दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली इकोनॉमी बन गया। इससे उन तमाम रिसर्च एजेंसियों के अनुमान गलत साबित हुए जो ये दावा कर रहे थे कि भारत की अर्थव्यवस्था की गति धीमी पड़ जाएगी। उल्टा हुआ यूं कि भारत की अर्थव्यवस्था विकसित देशों से भी तेज गति से आगे बढ़ रही है।

अमेरिका-चीन से आगे रहा भारत

आने वाले वर्षों में भारत की विकास दर अमेरिका और चीन से भी ज्यादा रहेगी जो कि देश के लिए पॉजिटिव माहौल तैयार करती है। वाकई भारत ने इस बात को साबित भी कर दिखाया है। भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार अपने विकास की गति को बढ़ा रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में भी विकास दर अनुमान से अधिक 4.1 प्रतिशत रही।

कोरोना के बावजूद नहीं थमा देश का विकास

यहां तक कि कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन ने पूरी दुनिया में जब अपने पैर पसारे थे, उस समय भी भारत की विकास यात्रा प्रभावित नहीं हुई। जबकि कई आर्थिक विशेषज्ञ यह अनुमान लगा रहे थे कि ओमिक्रोन के प्रभाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरू होने के चलते विकास दर कम रहेगी, लेकिन पूंजीगत खर्च और निर्यात के अच्छे प्रदर्शन से अर्थव्यवस्था में मजबूती कायम रही। चौथी तिमाही में कुल जीडीपी 40.78 लाख करोड़ रही, जबकि तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में जीडीपी 38.21 लाख करोड़ रुपए थी। वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही की जीडीपी 39.18 लाख करोड़ रुपए थी।

सर्विसेज को छोड़कर तमाम सेक्टरों में प्रदर्शन रहा बेहतर

वित्त वर्ष 2021-22 में होटल, ट्रांसपोर्ट जैसे संपर्क से चलने वाले सर्विस सेक्टर को छोड़कर बाकी तमाम सेक्टर में भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन कोरोना पूर्व के वित्त वर्ष 2019-20 से बेहतर रहा। सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की जीडीपी 1,47,35,515 करोड़ रुपए रही, जबकि वित्त वर्ष 2020-21 में देश की जीडीपी 1,35,58,473 करोड़ रुपए तो वित्त वर्ष 2019-20 में 1,45,15958 करोड़ रुपए की थी। वित्त वर्ष 2021-22 में निजी खपत भी कोरोना पूर्व के वित्त वर्ष से आगे निकल गई। मैन्यूफैक्चरिंग, माइनिंग,कंस्ट्रक्शन, फाइनेंस, प्रोफेशनल्स सर्विसेज जैसे सभी सेक्टर का प्रदर्शन बेहतर दिखा।

विकास दर में मजबूती कायम रहने का अनुमान

वैश्विक रूप से प्रतिकूल परिस्थिति के बावजूद चालू वित्त वर्ष 2022-23 में भी भारतीय विकास दर में मजबूती कायम रहने का अनुमान है। सरकार की और से महंगाई पर काबू पाने के लिए किए जा रहे उपाय और खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार निर्यात में लगातार बढ़ोतरी निजी उपभोग के साथ सरकारी पूंजीगत खर्च में इजाफा जैसे कारणों से भारत की स्थिति कई देशों से काफी बेहतर है।

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