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ड्रोन शक्ति भारत 2030 तक बनेगा वैश्विक हब

याद हो, कुछ साल पहले तक ड्रोन महंगे सैन्य उपकरण या छोटे खिलौनों के रूप में देखे जाते थे, लेकिन अब इनकी रूपरेखा बदल चुकी है। दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में स्थितियों में काफी बदलाव आया है क्योंकि ड्रोन, जिसे आधिकारिक तौर पर सुदूर चालित हवाई प्रणाली यानि रिमोटली पाइलेटेड एरियल सिस्टम (RPS) के रूप में जाना जाता है, कई उद्योगों के अनुप्रयोगों के लिए एक व्यावहारिक समाधान के रूप में सामने आया है।

ड्रोन के प्रति नजरिये में बदलाव का मुख्य कारण

ड्रोन के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव का मुख्य कारण है- ड्रोन की लागत प्रभावी तरीके से मांग के अनुसार उड़ान के जरिए डिजिटल डेटा देने की क्षमता। हालांकि ड्रोन का विकास, अपनाने का तरीका और उपयोग अभी अपनी प्रारंभिक अवस्था में ही है। लेकिन यह भी सच है कि ड्रोन नए तरीकों पर आधारित प्रभावी समाधान प्रदान कर रहे हैं, जो कागज और कलम से संचालित होने वाले पुराने तरीकों के स्थान पर परिचालन को डिजिटल युग में ले जा रहे हैं।

ड्रोन कई प्रतिष्ठानों का बने अभिन्न अंग

पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन कई सरकारी और निजी प्रतिष्ठानों का अभिन्न अंग बन गए हैं, विशेषकर उद्योग के क्षेत्रों में, जो नई तकनीक को अपनाने में हमेशा असफल रहते हैं, कारण चाहे जो भी रहे हों। ड्रोन कुशल और समयबद्ध तरीके से काम कर रहे हैं और इस तरह से काम करने के पारंपरिक तरीकों के बेहतर विकल्प के रूप में सामने आए हैं।

ड्रोन के प्रयोग

ड्रोन के कुछ मौजूदा प्रयोगों में निगरानी और सुरक्षा, महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों का निरीक्षण और निगरानी, सर्वेक्षण एवं लॉजिस्टिक्स आदि शामिल हैं। ये अनुप्रयोग कई उद्योग क्षेत्रों से संबंधित हैं, जैसे रक्षा और आतंरिक सुरक्षा, कृषि, तेल और गैस, ऊर्जा व उपयोगिता, दूरसंचार, भू-स्थानिक सर्वेक्षण, खनन, निर्माण, परिवहन आदि। भारत में इन क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक को अपनाने की प्रक्रिया प्रारंभिक अनुसंधान चरण से एक ऐसे चरण में पहुंच गयी है, जहां व्यापार जगत को यह अनुभव हुआ है कि इसकी क्षमता व संभावना का उचित उपयोग किया जा सकता है। अब व्यापार जगत इसे अपनाने के लिए तैयार है।

₹15,000 करोड़ से बड़ा हो जाएगा ड्रोन बाजार

आज, भारत में ड्रोन का उपयोग सटीकता से खेती के लिए फसल की निगरानी तथा सैकड़ों किलोमीटर लम्बी गैस पाइप लाइनों का निरीक्षण करने से लेकर सीमा पर सुरक्षा प्रदान करने एवं समय पर महत्वपूर्ण स्वास्थ्य आपूर्ति करने से जुड़े क्षेत्रों में किया जा रहा है। भारत सरकार स्वामित्व योजना के हिस्से के रूप में भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल रूप देने, खदानों तथा राजमार्ग निर्माण में ड्रोन सर्वेक्षण के उपयोग को अनिवार्य करने और कृषि में बदलाव के लिए ड्रोन शक्ति व किसान ड्रोन पहल को बढ़ावा देने के क्रम में ड्रोन के व्यापक उपयोग के माध्यम से इस तकनीक का प्रारंभिक उपयोग शुरू कर चुकी है। एस्टेरिया एयरोस्पेस के निदेशक और सह-संस्थापक नील मेहता के अनुसार उपयोग के विविध क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए अनुमान है कि देश में ड्रोन और संबंधित समाधानों का बाजार अगले 3-4 वर्षों में 15,000 करोड़ रुपए से अधिक का हो जाएगा।

2030 तक वैश्विक ड्रोन हब बनाने का लक्ष्य

इस उभरते और रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्र की क्षमता को स्वीकार करते हुए सरकार ने इस दशक के अंत तक भारत को वैश्विक ड्रोन का हब बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसे ध्यान में रखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने ड्रोन नियम 2021 से शुरू करते हुए देश में ड्रोन के निर्माण और परिचालन को उदार बनाने के लिए कई नीतियों और विनियमों को पेश किया है। ड्रोन प्रौद्योगिकी की क्षमता, आपूर्ति और प्रसार को बढ़ाने के लिए उद्योग जगत को इसी समर्थन की आवश्यकता थी।

भविष्य में प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर

इस क्षेत्र के द्वारा देश के युवाओं के लिए नए जमाने के रोजगार के अवसर भी पैदा किए जा रहे हैं। ड्रोन उद्योग के विकसित होने से निकट भविष्य में प्रत्यक्ष रोजगार के 10,000 से अधिक अवसरों के पैदा होने की संभावना है, जिनमें ड्रोन पायलट, डेटा विश्लेषक, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर विकास व विनिर्माण, रख-रखाव एवं रिपेयर तकनीशियन शामिल हैं।

एक बड़ा संभावित बाजार, सॉफ्टवेयर और समाधान संबंधी विकास में एक मजबूत ताकत तथा ड्रोन-सेवा प्रदाता के लिए तकनीकी कार्यबल की उपलब्धता आदि कारणों से भारत के पास ड्रोन-आधारित समाधान के निर्माण एवं वितरण के लिए उपयुक्त प्लेटफॉर्म और संसाधन मौजूद हैं। नई ड्रोन और ड्रोन-प्रतिरोधी प्रौद्योगिकियों के परीक्षण के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी में विशिष्ट और सैंडबॉक्स परीक्षण स्थल बनाना तथा दृष्टि से परे (BVLOS) परिचालन जैसे जटिल संचालन के परीक्षण से जुड़े अवसर, इस विकास को गति दे सकते हैं एवं वैश्विक कंपनियों को आकर्षित कर सकते हैं।

कल-पुर्जों के निर्माण इकोसिस्टम को करना होगा आकर्षित 

भारत को कल-पुर्जों के निर्माण इकोसिस्टम (बैटरी, इलेक्ट्रिक मोटर, इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स और सेंसर) को भी आकर्षित करना चाहिए, जिससे ड्रोन उत्पादों के निर्माण में और इसे बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी। इस प्रकार यह क्षेत्र विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होगा। ड्रोन, मुख्य रूप से मोबाइल फोन और बिजली चालित वाहनों का मिश्रण होता है, इसलिए इन क्षेत्रों में कल-पुर्जों के निर्माण को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि ड्रोन निर्माण को भी जरूरी बढ़ावा मिल सके।

ड्रोन अंतिम उपयोगकर्ता के लिए भी हो उपयोगी

भारत में ड्रोन क्षेत्र का भविष्य उज्ज्वल है। अगले कुछ वर्षों में ड्रोन को कितने बड़े पैमाने पर अपनाया जाता है, यह महत्वपूर्ण है। उद्योग जगत को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ड्रोन अंतिम उपयोगकर्ता के लिए उपयोगी हो तथा एक जिम्मेदार व सुरक्षित तरीके से ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ावा मिले।

2030 तक भारत बनेगा ड्रोन हब लीडर

पीएम मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली के प्रगति मैदान में देश के सबसे बड़े ड्रोन उत्सव ”भारत ड्रोन महोत्सव 2022” का उद्घाटन किया। इस बीच पीएम मोदी ने कार्यक्रम के दौरान किसान ड्रोन पायलटों से बातचीत की और ओपन एयर ड्रोन उड़ान प्रदर्शन का अवलोकन भी किया। केवल इतना ही नहीं पीएम मोदी ने इस क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप्स के लोगों से भी बातचीत और चर्चा की।

स्टार्टअप सहित 1,600 से अधिक प्रतिनिधि पहुंचे

इस दो दिवसीय महोत्सव में सरकारी अधिकारियों, विदेशी राजनयिकों, सशस्त्र बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, निजी कंपनियों और ड्रोन स्टार्टअप आदि सहित 1,600 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। महोत्सव में 70 एग्जिबिटर अपने ड्रोन तकनीक को प्रदर्शित करने जा रहे हैं।

ड्रोन टेक्नॉलॉजी को लेकर भारत में अद्भुत उत्साह

उधर, ड्रोन महोत्सव में पीएम मोदी ने कहा कि ”ड्रोन टेक्नॉलॉजी को लेकर भारत में अद्भुत उत्साह देखने को मिल रहा है। यह ऊर्जा भारत में ड्रोन सर्विस और ड्रोन आधारित इंडस्ट्री की लंबी छलांग का प्रतिबिंब है। यह भारत में रोजगार सृजन के एक उभरते हुए बड़े सेक्टर की संभावनाएं दिखाती है।”

आत्मनिर्भर भारत की पहचान

दरअसल, आत्मनिर्भर भारत की तरफ बड़े कदम की ओर ड्रोन तकनीक बड़ी भूमिका निभाने वाली है। महोत्सव में अन्य कार्यक्रमों के अलावा ड्रोन पायलट प्रमाणपत्र का वर्चुअल वितरण, उत्पादों की लॉन्चिंग, पेनल चर्चा, उड़ान प्रदर्शन, मेड इन इंडिया ड्रोन टैक्सी प्रोटोटाइप की प्रदर्शनी आदि को भी शामिल किया गया है।

क्या होता है ड्रोन?

‘ड्रोन’ यानि ‘अनमैंड एरियल व्हीकल’ जिसे हम मानव रहित विमान भी कहते हैं। यह आकार में बहुत छोटे होते हैं और ये रिमोट से संचालित होते हैं। वैसे यह विमान जैसा दिखता है लेकिन विमान नहीं है। इसे आप एक रोबोट के तरीके से समझिए जो कि उड़ सकता है। प्राय: इसको बैटरी चार्ज के जरिए उड़ाया जा सकता है।

वर्तमान में कितना महत्वपूर्ण ?

ड्रोन देश की वर्तमान स्थिति के परिपेक्ष में कितना महत्वपूर्ण है, यदि इसे गहराई से समझना है तो सबसे पहले हमें समझना होगा कि देश की जियो पॉलिटिकल कंडिशन कैसे बदल रही है। जी हां, जब हम अपने देश में हो रहे परिवर्तनों को बारीकी से समझेंगे तो हमें समझ में आएगा कि ड्रोन वर्तमान स्थिति के परिपेक्ष में कितना महत्वपूर्ण है।

ड्रोन का इस्तेमाल

आज के समय में ड्रोन का इस्तेमाल एग्रीकल्चर से लेकर डिफेंस में किया जा रहा है। डिफेंस में खासतौर से इन्हें स्ट्रेटजिकली इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही साथ रोजमर्रा की जो हमारी इंडस्ट्री है उनमें भी ड्रोन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा पुलिसिंग में भी ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी रखने के लिए किया जा सकता है।

भविष्य में फ्यूचर ड्रोन का

वैसे देखा जाए तो भविष्य ड्रोन का ही है। आने वाले वक्त में आपको माइक्रो लेवल पर किस तरीके से मैनेजमेंट संभालना है, उन सब स्थितियों में किन सब चीजों पर आप निगाह रख सकते हैं, उसमें ड्रोन बहुत अहम भूमिका निभाएंगे। ड्रोन एग्रीकल्चर की यदि हम बात करें तो सरकार जिस तरीके से बात कर रही है कि किसानों की आय को बढ़ाया जाए और उन्हें एक ऐसे लेवल पर ले जाकर खड़ा किया जाए जहां वे आंत्रप्रेन्योरशिप की तरफ से आगे बढ़ें तो इन सबमें ड्रोन काम आता है। इसके अलावा यदि किसान को अपने खेत में फसल का जायजा लेने के लिए एरियल व्यू यानि आसमान से उसे देखने की जरूरत है तो ड्रोन इसे साकार कर सकता है। वहीं यदि फसलों पर कीटनाशकों व फर्टिलाइजर का छिड़काव भी करना है तो ड्रोन इसमें बहुत अहम रोल अदा करते हैं।

फील्ड को रेगुलराइज करने की सरकार की कोशिश

इन सारी प्रगतियों को देखते हुए लगातार सरकार इस चीज की कोशिश कर रही है कि बेहतर पॉलिसी के जरिए इस पूरे फील्ड को रेगुलराइज किया जाए और जो नए-नए स्टार्टअप आ रहे हैं उसमें इन सबको इंवॉल्व किया जाए क्योंकि अगर टेक्नोलॉजी की हम बात करें तो टेक्नोलॉजी के मामले में हमारे स्टार्टअप वर्ल्ड क्लास टेक्नोलॉजी लेकर चल रहे हैं। लेकिन किस तरीके से वर्ल्ड क्लास मार्केट में जगह बनाई जाए और किस तरह से हमारे स्टार्टअप्स को वहां बेहतर माहौल मिले केंद्र सरकार इन सब चीजों की तैयारी में लगी है।

सरकार की ओर से एक कोशिश यह भी हो रही है कि सरकार की ओर से जितने भी सरकारी PSU हैं या डिफेंस PSU की बात करें या गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन हैं, पुलिसिंग की बात करें तो उनमें कोलैबोरेटिव मोड में कई तरह के स्टार्टअप हैं, उनको लेकर आगे बढ़ा जा सकता है, ये सारी कोशिशें सरकार की ओर से की जा रही है।

नई ड्रोन पॉलिसी 2021

सरकार की ओर से ‘नई ड्रोन पॉलिसी-2021’ लाई गई। इसका विजन पूरे देश में बेहतर इंसेंटिव के जरिए न केवल प्रोडक्शन को बढ़ाया जाए बल्कि तकनीक को भी बढ़ाने का है। नई ड्रोन पॉलिसी 2021 यह भी कहती है कि देश के तमाम क्षेत्र लगातार मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरें और भारत ड्रोन मैन्युफैक्चरर के बतौर जाना जाएं।

तभी तो यह उत्सव सिर्फ ड्रोन का नहीं, बल्कि नए भारत-नई गवर्नेंस का उत्सव है। ऐसे में वाकयी ड्रोन टेक्नोलॉजी को लेकर भारत में जो उत्साह देखने को मिल रहा है, वो अद्भुत है। खासतौर से युवाओं में ड्रोन को लेकर खासा उत्साह है। ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने से युवाओं को भी काफी प्रोत्साहन मिल रहा है।

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