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टूंडला DTM अवैध वेंडर्स के संरक्षक है या स्टाॅफ के विरोधी ? CIT स्टेशन काट रहे फरारी

टूंडला DTM अवैध वेंडर्स के संरक्षक है या स्टाॅफ के विरोधी ? CIT स्टेशन काट रहे फरारी

अवैध वेंडर्स की गिरफ्तारी ने टूंडला रेलवे स्टेशन के कामर्शियल अफसरों की कलई खोलकर रख दी है। अवैध वेल्डिंग के आरोप में पकड़े गए वेंडर्स प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी मौजूद काट रहे हैं। खुलेआम स्टेशन और ट्रेनों में फिर अवैध वेल्डिंग का गोरखधंधा शुरू कर चुके हैं। परंतु, ट्रेन से इन्हें पकड़ने वाले सीआईटी दल के मुखिया सीआईटी स्टेशन पुलिस की पकड़ से बचने के लिए फरारी काट रहे हैं। कामर्शियल वाले रेल अफसरों की अराजकता का आलम यह है कि कर्मचारियों से यदि कोई गलती हुई भी तो विभागीय कार्रवाई का अधिकार होने के बावजूद सिविल पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने के साथ निलंबन और स्थानांतरण के रूप में “पुरस्कार” दिया है। टिकट चेकिंग स्टाॅफ के बीच यह मुद्दा आग में घई जैसा काम कर रहा है।

आगे बढ़ने से पहले यह बता दें कि उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक प्रमोद कुमार ने कुछ महीने पहले कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर अचानक ट्रेन से उतर कर प्लेटफार्म पर अवैध बिल्डिंग का मामला पकड़ा था। इस मामले में कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी। इसके बाद उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय मैं प्रयागराज, झांसी, आगरा मंडलों के कमर्शियल अफसरों और कर्मचारियों के पेच कसे थे। डिवीजन से लगातार अवैध वेंडर के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बनाया जा रहा था। लेकिन जोल मुख्यालय और मंडल मुख्यालय से दूर दराज वाले स्टेशनों पर तैनात आईआरटीएस अफसरों ने अलग ही धुन पकड़ ली। टूंडला स्टेशन पर हुआ विवाद भी अवैध वेंडर्स से होने वाली काली कमाई में पड़े व्यवधान का नतीजा है।

ट्रेन से पकड़े गए 10 अवैध वेंडर्स को सीआईटी दफ्तर में उत्पात मचाकर छुड़ाने, स्टेशन के वेंडर्स आरके फूड के मैनेजर समेत कई पर प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद टूंडला के सीआईटी लाइन सीपी गर्ग समेत कई पर क्रास एफआईआर जीआरपी ने आनन-फानन में दर्ज किया।

असली घटनाक्रम इसके बाद हुआ। इन्हीं में अब तक हुई पुरानी घटनाओं के तार भी जुड़े हैं। फिलहाल, आरोप है कि जांच के लिए बुलाए गए रेल कर्मचारियों पर डीटीएम संजय कुमार के निर्देश से सिविल पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई। इसमें सीआईटी सीपी गर्ग के खिलाफ एसटी-एसटी का मुकदमा भी है। इस मामले में पुलिस सीपी गर्ग की तलाश कर रही है। गिरफ्तारी से बचने के लिए अवैध वेंडर्स की गिरफ्तारी कराने वाला रेलकर्मी अब फरारी काट रहा है। सूत्रों का दावा है कि इसी बीच गर्ग का तबादला प्रयागराज डिवीजन मुख्यालय कर दिया गया है। अन्य सीआईटी के कार्य भी बदल दिए गए हैं।

डीटीएम कार्यालय के सहायक अधीक् महिला कर्मी के साथ अभद्रता, अरुण कुमार को जाति सूचक शब्द इस्तेमाल करने और दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए एफआईआर कराई है।

सवाल यह उठ रहा है कि यदि कर्मचारियों ने जांच में असहयोग किया तो उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए रेलवे अफसरों को तमाम अधिकार हैं। इसमें बर्खास्तगी जैसा अधिकार भी है। इसका इस्तेमाल करने के बजाए डीटीएम ने एससी-एसटी करवाकर मामले को पेचीदा करने की जरूरत क्यों समझी ? गिरफ्तारी के लिए अवैध वेंडर्स पर दबाव क्यों नहीं बनाया जा रहा है ? पूरा दबाव अवैध वेंडर्स को पकड़ने वाले रेलकर्मियों पर ही क्यों है ? क्या इससे अन्य स्टेशनों के रेलकर्मी अवैध वेंडर्स को पकड़ने की हिम्मत जुटा सकेंगे ? क्या यह कदम अवैध वेंडर्स का उत्साह बढ़ाने वाला साबित नहीं होगा ?

ऐसे सैकड़ों सवाल हैं जो यह आशंका बढ़ाते हैं कि अवैध वेंडर्स की धरपकड़ से काली कमाई में व्यवधान आ रहा था। सो, वेंडर्स बेरोकटोक काम कर सकें और अन्य कर्मचारियों को भी सबक मिले कि रास्ते का कांटा बने तो सीपी गर्ग की तरह नौकरी करना मुश्किल हो जाएगा।

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