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ज्ञानवापी केस पर दोनों पक्षों में चले तर्कों के तीर, 30 को फिर सुनवाई

वाराणसी जिला अदालत में ज्ञानवापी केस के औचित्य पर गुरुवार को सुनवाई शुरू हुई तो मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता अभय नाथ यादव ऊंची आवाज में दलीलें रखने लगे। इस पर हिंदू पक्षकार के वकील हरिशंकर जैन ने एतराज जताते हुए कहा कि मेरा स्वास्थ ठीक नहीं है। कृपया तेज आवाज में न बोलें।

मुस्लिम पक्ष ने कहा कि नियम 7/11 के तहत हिन्दू पक्ष के सूट को खारिज किया जाना चाहिए। इसे सुनने की भी जरूरत नहीं है। मस्जिद परिसर से बरामद “पत्थर” को शिवलिंग बताकर लोगों के बीच अफवाह फैलाई जा रही है कि वो शिवलिंग है। यह इसलिए ताकि हिंदू लोगों की भावनाओं को इस मामले के साथ जोड़ा जा सके।

मुस्लिम पक्ष ने तर्क दिया कि ऐतिहासिक तथ्यों और 1991 के उपासना स्थल कानून के तहत भी हिन्दू पक्ष की ये याचिका सुनवाई योग्य नही है। जिला कोर्ट में हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन और मुस्लिम पक्ष के वकील अभयनाथ यादव के बीच बहस हुई। मुस्लिम पक्ष के वकील अभय यादव ने फव्वारा वाली दलील को आगे बढ़ाते हुए कहा कि परिसर में शिवलिंग का नामोनिशान नहीं है। वहां तो वाजूखाने के हौज में फव्वारा है। शिवलिंग मिलने की अफवाह फैलाई गई है। वर्शिप एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला भी मुस्लिम पक्ष ने दिया।

हिन्दू पक्ष के लकील हरिशंकर जैन ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के मुकदमे की सुनवाई के समय भी कहा गया कि वहां तो कोई मंदिर नहीं मस्जिद है, लेकिन सचाई सारी दुनिया के सामने है। जैन के अलावा हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी और शिवम गोंड भी बहस में  शामिल हुए।

सूट योग्यता को लेकर फैसला आ जाए, फिर अपनी बात रखेंगे। हिंदू पक्षकारों की ओर से विष्णु जैन ने कहा कि सबसे पहले सूट योग्यता को लेकर फैसला आ जाये, उसके बाद वो शिवलिंग होने, उसे नुकसान पहुंचाने, स्वरूप बदलने की कोशिश करने जैसे मुद्दों पर अपनी बात को रखेंगे।
फिलहाल, मुस्लिम पक्षकारों ने कहा कि उनकी दलील अभी बाकी हैं। लिहाजा, सोमवार को तय हुई अगली सुनवाई के दौरान भी शुरुआत मुस्लिम पक्षकार के वकील की दलीलों से ही होगी। इसके बाद हिंदू पक्षकार अपनी बात रखते हुए मुस्लिम पक्षकार की दलील की काट रखेंगे। यानी हिंदू पक्षकारों को अपनी अर्जी में लिखे गए तथ्यों से ये साबित करना होगा कि उनकी याचिका सुनवाई के सर्वथा योग्य है। सोमवार को दोपहर 2 बजे सुनवाई आगे जारी रहेगी।

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