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जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा, किसी चिराग़ का अपना मकां नहीं होता

मशहूर शायर वसीम बरेलवी का यह उम्दा शेर जैसे हमारी यशस्वी कुलपति महोदया के लिए ही लिखा गया है। आप जहां भी रहीं आपने उस संस्था का कायाकल्प कर दिया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय का गृह विज्ञान विभाग , रज्जू भैया विश्वविद्यालय की भव्य इमारतें और अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 100 नए शिक्षको की नियुक्ति करके आपने साबित कर दिया कि आप जिस भी संस्थान से जुड़ेंगी उसे बुलंदी पर पंहुचा देंगी ।

गुरुवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नार्थ हॉल में नव नियुक्त शिक्षको का इंटरेक्शन प्रोग्राम सम्पन्न हुआ । ज्ञात को कि हाल ही में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कई विभागों के साक्षात्कार सम्पन्न हुए थे ,जिसके पश्चात विश्वविद्यालय को 100 से ज्यादा नवनियुक्त शिक्षक प्राप्त हुए हैं।

नार्थ हॉल में सम्पन्न हुए इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो संगीता श्रीवास्तव ने की। नवनियुक्त शिक्षकों को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि आज विश्वविद्यालय को सौ नए शिक्षक मिले हैं , जल्द ही हमारे बीच पाँच सौ नए शिक्षक होंगे । शिक्षा समाज और जीवन को बदलने का सबसे बड़ा औजार है । शिक्षकों को जीवन पर्यंत सीखना होता है। एक अच्छा शिक्षक जीवनपर्यंत अच्छा छात्र होता है । मूक, स्वयंम और गूगल के दौर में हमारे चारों ओर सूचना तो है पर शिक्षक के बिना ज्ञान और जीवन मूल्य अर्जित नहीं किया जा सकता । पंडित मदन मोहन मालवीय , हरिवंश राय बच्चन, मुंशी प्रेमचंद, चंद्रशेखर, फिराक गोरखपुरी, न्याय मूर्ति वी येन खरे , प्रो रज्जू भैया , ज़ाकिर हुसैन जैसे न जाने कितने महापुरुष, न्यायविद, साहित्यकार इस विश्वविद्यालय से जुड़े रहे । यह साहित्य , कला और राजनीति का शहर है । यह संगम का शहर है । मैं इस शहर में और इस विश्वविद्यालय में आप समस्त शिक्षको का स्वागत करती हूँ। आप सारे नए शिक्षक न सिर्फ एक महान विरासत से जुड़ रहे हैं, बल्कि आप सबों को आनेवाले वक्त में नई विरासत का निर्माण भी करना है । करीब 38 सालों बाद विश्वविद्यालय में सौ नए शिक्षको की नियुक्ति हुई है । कुलपति प्रो संगीता श्रीवास्तव ने आगे कहा कि हमें अपने अपने विभागों में टीम भावना के साथ कार्य करना चाहिए । कुलपति ने फैकल्टी रिक्रूटमेंट सेल के महत्वपूर्ण कार्य के लिए प्रो धनंजय यादव, प्रोफेसर आशिष सक्सेना और आशिष खरे का धन्यवाद भी किया।

कोई चलता है पद चिन्हों पर , कोई पद चिन्ह बनाता है।
बस वही सूरमा वीर पुरुष , दुनिया में पूजा जाता है ।।

औसत लोगों का जीवन यूँ ही बीत जाता है, जो सूरमा और दृढ़ निश्चय के स्वामी होते हैं वे नए पद चिन्ह बनाते हैं । नया इतिहास बनाते हैं । कुलपति प्रो संगीता श्रीवास्तव के बढ़ते कदम नए इतिहास का सृजन कर रहे हैं ।

कुलपति के संबोधन से पहले नवनियुक्त शिक्षकों को विश्वविद्यालय के अतीत और वर्तमान का परिचय देते हुए राजनीति शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर पंकज कुमार ने कहा कि यह अत्यंत ही गर्व का पल है कि आज हमारे बीच सौ से अधिक नए शिक्षक हैं । कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव ने कोरोना के बेहद विपरीत परिस्थितियों में कार्यभार ग्रहण किया था । विश्वविद्यालय की प्रगति के लिए कुलपति महोदया निरंतर कार्यरत हैं । प्रोफेसर पंकज कुमार ने आगे कहा कि मेरे युवा साथियों आपसे विश्वविद्यालय को बहुत उम्मीदें हैं । आने वाले 35 साल आपके हैं । इलाहाबाद विश्वविद्यालय देश की अत्यंत प्राचीन संस्थाओं में से एक है। आज आप 135 साल पुराने इतिहास से जुड़ रहे हैं । मैं आप सबको अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करता हूँ ।

डीन रिसर्च, प्रोफेसर एस आई रिज़वी ने इस दौरान अपने संबोधन में कहा कि पठन पाठन के साथ ही नए शिक्षकों को शोध पर भी पर्याप्त ध्यान देना चाहिए । एक अच्छा शोधार्थी ही अच्छा शिक्षक हो सकता है । प्रोफेसर रिज़वी ने नए शिक्षको को यूजीसी स्टार्टअप ग्रांट , रिसर्च पेपर और रिसर्च प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी ।

कार्यक्रम के आरंभ में प्रो नीना कोहली , प्रो भूमिका कार, प्रो संजय दत्ता रॉय, प्रो राम सेवक दुबे, प्रो बनलता मोहंती ने विभागाध्यक्ष के तौर पर क्रमशः मनोविज्ञान, सीबीसीएस, अंग्रेजी, संस्कृत और जूलॉजी विभाग के नव नियुक्त शिक्षको का औपचारिक परिचय दिया । सेंटर फॉर थिएटर एंड फ़िल्म के नव नियुक्त शिक्षक भी इस दौरान उपस्थित रहे । विश्वविद्यालय में पहली बार अस्तित्व में आए दीनदयाल उपाध्याय चेयर के नव नियुक्त प्रोफेसर का परिचय प्रोफेसर पंकज कुमार ने दिया ।

इस कार्यक्रम का संचालन डॉ जया कपूर ने किया। कार्यक्रम के आरंभ में संगीत विभाग के छात्रों द्वारा विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया गया । कार्यक्रम के दौरान कुलसचिव प्रो नरेंद्र शुक्ल, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो शिव मोहन , कुलानुशासक प्रो हर्ष कुमार, प्रो वंदना शर्मा, प्रो धनंजय यादव, प्रो आशिष सक्सेना, प्रो प्रशांत घोष आदि शिक्षक उपस्थित रहे । डॉ जया कपूर ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में शिक्षकों को संबोधित करते कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव।

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