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चीन को चुनौती देने लगे भारतीय खिलौने, निर्यात में धमाका

चीन को चुनौती देने लगे भारतीय खिलौने, निर्यात में धमाका

चीनी खिलौनों को पछाड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को भारतीय उद्यमियों ने दिल से लगा लिया है। दो साल में ही भारतीय खिलौनों के निर्यात ने 61% से अधिक तेजी पकड़ ली है। आश्चर्यजनक तरीके से आयात में भारी गिरावट आई है।

पिछले तीन साल में भारतीय खिलौना बाजार में आई जबरदस्त तेजी पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई के प्रयासों से ही संभव हुई है। केंद्र सरकार ने देश में खिलौना बाजार से जुड़े तमाम खिलौना निर्माताओं और कारोबारियों को प्रोत्साहित किया है।

खिलौना निर्यात में हुई 61.39 % की बढ़ोतरी

जानकारी के मुताबिक एचएस कोड 9503, 9504 एवं 9503 के लिए खिलौना निर्यात वित्त वर्ष 2018-19 के 202 मिलियन डॉलर की तुलना में वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 326 मिलियन डॉलर रहा जो 61.39 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है। एचएस कोड 9503 के लिए, खिलौना निर्यात बढ़कर वित्त वर्ष 2018-19 के 109 मिलियन डॉलर की तुलना में वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान बढ़ कर 177 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया।

खिलौना आयात में हुई 70.35% की कमी

वहीं देश में खिलौनों के आयात की बात करें तो जो खिलौने भारत विदेश से खरीदता था अब उसमें भारी कमी आई है। एचएस कोड 9503, 9504 एवं 9503 के लिए भारत में खिलौनों का आयात वित्त वर्ष 2018-19 के 371 मिलियन डॉलर की तुलना में वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 110 मिलियन डॉलर रहा जो 70.35 प्रतिशत की कमी दर्शाता है। एचएस कोड 9503 के लिए, खिलौना आयात में और तेजी से कमी आई है जो वित्त वर्ष 2018-19 के 304 मिलियन डॉलर की तुलना में वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान घट कर 36 मिलियन डॉलर पर आ गया। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ भारत का खिलौना बाजार भी तेजी से फल-फूल रहा है। महज तीन साल के भीतर भारत के खिलौना बाजार में यह तेजी आई है।

वैश्विक बाजार में भारतीय खिलौना उद्योग की हिस्सेदारी

भारतीय खिलौना उद्योग का अनुमान 1.5 अरब डॉलर है जो वैश्विक बाजार हिस्सेदारी का 0.5% है। भारत में खिलौना निर्माता ज्यादातर एनसीआर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और मध्य भारतीय राज्यों के समूहों में स्थित हैं। बाजार का 90% हिस्सा असंगठित है। वहीं MSME क्षेत्र से करीब 4,000 खिलौना उद्योग इकाइयों जुड़ी हैं। माना जा रहा है कि भारतीय खिलौना उद्योग 2024 तक 2-3 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है। भारतीय खिलौना उद्योग वैश्विक उद्योग के आकार का केवल 0.5% है जो एक बड़े संभावित विकास अवसर का संकेत देता है। वैश्विक औसत 5% के मुकाबले घरेलू खिलौनों की मांग 10-15% बढ़ने का अनुमान है। इसी दिशा में भारत उम्मीद से भी ज्यादा तेजी से काम कर रहा है।

PM मोदी की भारतीय खिलौना स्टोरी की रीब्रांडिंग की अपील कर गई काम

अगस्त 2020 में ‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने ‘भारतीय खिलौना स्टोरी की रीब्रांडिंग’ की अपील की थी और घरेलू डिजाइनिंग को सुदृढ़ बनाने तथा भारत को खिलौनों के लिए एक वैश्विक विनिर्माण हब के रूप में बनाने के लिए बच्चों के लिए सही प्रकार के खिलौनों की उपलब्धता, खिलौनों का उपयोग सीखने के संसाधन के रूप में करने, भारतीय मूल्य प्रणाली, भारतीय इतिहास और संस्कृति पर आधारित खिलौनों की डिजाइनिंग करने पर जोर दिया था।

तत्पश्चात भारतीय खिलौना उद्योग को सरकार की कई सारी युक्तियों से लाभ पहुंचा है और इसके परिणाम ‘मेक इन इंडिया’ प्रोग्राम की सफलता प्रदर्शित करती है। उन्होंने यह भी कहा कि आयात मुख्य रूप से खिलौनों के कुछ कंपोनेंट तक सीमित रह गए।

खिलौना क्षेत्र के लिए भारत सरकार द्वारा की गई युक्तियां :

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 02 दिसंबर 2019 प्रत्येक खेप का नमूना परीक्षण करना अधिदेशित किया था और जब तक गुणवत्ता परीक्षण सफल नहीं होता, बिक्री की अनुमति नहीं दी थी। विफलता की स्थिति में, खेप को या तो वापस भेज दिया जाता है या आयातक की कीमत पर उसे नष्ट कर दिया जाता है।
टॉयज एचएस कोड 9503 पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) फरवरी, 2020 में 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी गई है।
सरकार ने 25 फरवरी 2020 को खिलौना ( गुणवत्ता नियंत्रण ) आदेश जारी किया था जिसके माध्यम से खिलौनों को 01 जनवरी 2021 से अनिवार्य भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) प्रमाणीकरण के तहत ला दिया गया है। गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) के अनुसार, प्रत्येक खिलौना  भारतीय मानक की आवश्यकताओं के अनुरूप होगा तथा बीआईएस ( अनुरूपता आकलन ) विनियमन, 2018 की स्कीम-1 के अनुसार बीआईएस से एक लाइसेंस के तहत मानक चिन्ह धारण करेगा। यह क्यूसीओ घरेलू विनिर्माताओं तथा विदेशी विनिर्माताओं, जो अपने खिलौनों का भारत में निर्यात करना चाहते हैं, दोनों पर ही लागू है।
खिलौनों पर क्यूसीओ को 11.12.2020 को संशोधित किया गया था जिससे कि विकास आयुक्त ( कपड़ा मंत्रालय ) के साथ पंजीकृत कारीगरों द्वारा विनिर्मित्त तथा बेची जाने वाली वस्तुओं और आर्टिकल्स को और पैटेंट, डिजाइन तथा ट्रेडमार्क महानियंत्रक के कार्यालय द्वारा भौगोलिक संकेतक के रूप में पंजीकृत स्वामी और अधिकृत उपयोगकर्ताओं को भी छूट दी जा सके।
बीआईएस ने 17 दिसंबर 2020 को विशेष प्रावधान किए जिससे कि एक वर्ष के लिए बिना परीक्षण सुविधा वाली खिलौना बनाने वाली सूक्ष्म स्तर की इकाइयों को लाइसेंस प्रदान किया जा सके और इन-हाउस सुविधा स्थापित करने पर जोर न दिया जा सके।
बीआईएस ने खिलौनों की सुरक्षा के लिए घरेलू विनिर्माताओं को 843 लाइसेंस प्रदान किए हैं जिसमें से 645 लाइसेंस गैर-बिजली वाले खिलौनों के लिए प्रदान किए गए हैं तथा 198 लाइसेंस बिजली वाले खिलौनों के लिए प्रदान किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 6 लाइसेंस अंतरराष्ट्रीय खिलौना विनिर्माताओं को प्रदान किए गए हैं।

GI टैग वाले खिलौनों का प्रदर्शन

नई दिल्ली के प्रगति मैदान में 2-5 जुलाई 2022 तक आयोजित टॉय बिज बी2बी ( बिजनेस टू बिजनेस ) अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के 13वें संस्करण के दौरान 96 प्रदर्शकों ने पारंपरिक प्लश खिलौनों, निर्माण उपकरण खिलौनों, गुड़िया, बिल्डिंग ब्लौक्स खिलौनों, बोर्ड गेम्स, पजल्स, इलेक्ट्रोनिक खिलौनों, शिक्षाप्रद खिलौनों, राइड-ऑन से लेकर विविध उत्पाद वर्ग प्रदर्शित किए। सभी खिलौना उत्पाद ‘मेड इन इंडिया’ उत्पाद थे जो लघु, मझोले तथा बड़े उद्यमों द्वारा घरेलू रूप से विनिर्मित्त थे। जीआई टैग वाले खिलौने जैसे कि चेन्नापटना, वाराणसी आदि का भी प्रदर्शन किया गया।

वोकल फॉर लोकल’ को मिला बढ़ावा

प्रदर्शनी में भारतीय लोकाचार तथा मूल्य प्रणाली पर आधारित खिलौनों का प्रदर्शन किया जा रहा है जो ‘वोकल फॉर लोकल’ थीम का विधिवत समर्थन करते हैं। प्रत्येक खिलौना वर्ग के पास किफायती और हाई-एंड संस्करण हैं। यह 2019 में आयोजित प्रदर्शनी के 12वें संस्करण की तुलना में एक महत्वपूर्ण बदलाव है जिसमें 116 स्टॉल थे और 90 स्टॉल केवल आयातित खिलौनों का प्रदर्शन कर रहे थे। इस प्रदर्शनी में भारत के 3,000 से अधिक आगंतुकों तथा सऊदी अरब, यूएई, भूटान, अमेरिका आदि से अंतरराष्ट्रीय खरीदार शिष्टमंडल ने भाग लिया। कुछ इस प्रकार भारत सरकार लगातार भारतीय खिलौना बाजार के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है और इसके नतीजे महज तीन साल के भीतर ही हमें देखने को भी मिल रहे हैं।

पीएम मोदी ने यह कहा था

देश में 85% खिलौने विदेशों से मंगाए जाते हैं। पिछले 7 दशकों में भारतीय कारीगरों और भारतीय विरासत की जो उपेक्षा हुई है। उसका परिणाम ये है कि भारत के बाज़ार से लेकर परिवार तक में विदेशी खिलौने भर गए हैं। सिर्फ खिलौना नहीं आया है, एक विचार प्रवाह हमारे घर में घुस गया है।

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