National Wheels

गीतांजलि श्री के खिलाफ कार्यवाही होने के पर्याप्त कारण: अनिल सिंह विसेन

गीतांजलि श्री के खिलाफ कार्यवाही होने के पर्याप्त कारण: अनिल सिंह विसेन

ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह,प्रयागराज

भारत की हिंदी भाषा की पहली अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार प्राप्त करने वाली लेखिका गीतांजलि श्री के विवादित उपन्यास रेत समाधि से संबंधित विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर और वर्तमान में उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डॉ गिरीश चंद्र त्रिपाठी के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिवक्ता अनिल सिंह बिसेन भी शिकायतकर्ता संदीप पाठक के समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि हम एक कानूनी सलाहकार की तरह से ही नहीं बल्कि हर एक स्तर से संदीप पाठक की मदद करेंगे,उन्होंने कहा कि भारत का संविधान अनुच्छेद 25 में सभी को धर्म के स्वतंत्रता का अधिकार देता है, जिसके अनुसार देश के लोग अपने अपने धर्म के प्रति आस्था व पूजा अर्चना के लिए स्वतंत्र हैं परंतु इसका मतलब यह नहीं है कि कोई किसी धर्म का मजाक उड़ाए उन्होंने कहा कि आईपीसी की धारा 295 ए में यह स्पष्ट रूप से लिखा गया है की विद्वेष पूर्ण आशय होना, जानबूझकर के कोई ऐसा कार्य करना या करने का आशय जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती हो जिसका लिखित या दृश्य दिखा कर जो व्यक्ति किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाएगा या वर्ग विशेष के लोगों के खिलाफ ऐसा कार्य करेगा उनके खिलाफ 3 वर्ष का सजा व जुर्माने का प्रावधान है। अनिल सिंह विसेन ने कहा कि जैसा की जानकारी मिली है कि हाथरस सादाबाद थाना इंचार्ज के द्वारा संदीप पाठक से कहा गया कि उपन्यास का प्रकाशक राजकमल प्रकाशन दिल्ली का है इसलिए दिल्ली में एफ आई आर दर्ज होनी चाहिए उन्होंने कहा कि सादाबाद थाना इंचार्ज के ऊपर भी कार्यवाही होनी चाहिए क्योंकि वह लगातार झूठ बोल रहा है। न्याय के मूल सिद्धांत के विपरीत कार्य कर रहा है और लोगों को गुमराह कर रहा है।विधि के जानकार विषेश ने कहा कि विधि के अनुसार हमारी धार्मिक भावना जिस जगह पर भी आहत हो रही है हम वहीं पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए स्वतंत्र हैं, देशभर में कहीं पर भी। उन्होंने कहा कि यदि मुकदमा दर्ज नहीं होता है तो संदीप पाठक जी को 156 (3) के तहत जिला न्यायालय में जाकर मुकदमा दर्ज करना चाहिए और जैसा भी सहयोग होगा हम और हमारी पूरी टीम करने के लिए तैयार है।

क्या है मामला?

मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले और प्रयागराज में पले बढ़े व शिक्षा प्राप्त करने वाले वर्तमान में हाथरस के निवासी संदीप पाठक ने बताया कि उन्होंने गीतांजलि श्री की उपन्यास रेत समाधि को पढ़ा जिसमें पेज संख्या 222 पर उसने हिन्दू धर्म के भगवान शिव और पार्वती के ऊपर अभद्र टिप्पणी और अश्लील बातें लिखी हैं। इसी आधार पर उन्होंने हाथरस के सादाबाद थाने में उपन्यासकार गीतांजलि श्री के ऊपर मुकदमा दर्ज कराने का प्रयास किया परंतु मुकदमा दर्ज नहीं किया गया, संदीप पाठक ने बताया कि इसके अलावा महिलाओं के ऊपर भी अभद्र टिप्पणी का प्रयोग गीतांजलि श्री के द्वारा अपने उपन्यास में किया गया है। उन्होंने कुछ दिनों पहले बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के कुलपति रह चुके गिरीश चंद्र त्रिपाठी से मुलाकात की थी और उनके समर्थन में लगातार प्रयागराज के सामाजिक कार्यकर्ता राजनीतिक लोग व अधिवक्ता आ गए हैं संदीप पाठक ने बताया कि वह 14 सितंबर को पुरी पीठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती से प्रयागराज में मुलाकात कर अपनी बात रखेंगे उन्होंने कहा कि ये सनातन धर्म के खिलाफ सरासर अन्याय है और जानबूझकर के इस तरह का कृत्य किया जा रहा है संदीप पाठक ने इसके पीछे विदेशी साजिश भी बताया है कुछ दिनों पहले संदीप पाठक के कारण ही आगरा में प्रस्तावित गीतांजलि श्री का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया था।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.