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क्या भारत और ईरान का इस्लाम अलग है ? हिजाब पर भिन्न हैं दावे

क्या भारत और ईरान का इस्लाम अलग है ? हिजाब पर भिन्न हैं दावे

दिल्ली : कर्नाटक से उठा हिजाब विवाद इन दिनों फिर पूरे देश भर में चर्चाओं का केंद्र बिंदु बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर लगातार दसवें दिन सुनवाई शुरू कर चुका है। कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हिजाब समर्थक और कर्नाटक सरकार के फैसले का बचाव कर रहे अधिवक्ताओं के बीच तर्क-वितर्क जारी है। इस बीच ईरान में हिजाब के खिलाफ महिलाओं के उठ खड़े होने से यह नया सवाल खड़ा हो गया है कि क्या भारत और ईरान में इस्लाम धर्म की मान्यताएं अलग-अलग चलती है ? दोनों देशों में इस्लाम की परंपराएं क्या अलग-अलग हैं?

हिजाब प्रतिबंध सुनवाई के दसवां दिन है। सुप्रीम कोर्ट कर्नाटक HC के फैसले को चुनौती देने वाली अपीलों के एक बैच की सुनवाई कर रहा है। जिसने सरकारी स्कूलो और कॉलेजों में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से बरकरार रखा।

मुस्लिम पक्ष से अधिवक्ता दवे ने दस्तावेज़ उच्च न्यायालय के समक्ष उनके स्वयं के प्रस्तुतीकरण से प्रमाणित होता है। अधिवक्ता दवे ने कहा कि एसजी और एजी के लिए अदालत को यह बताना सही नहीं है कि यह एक निराधार दस्तावेज है। सरकार का अपना दस्तावेज सरकार ने अस्वीकार कर दिया है।

यहां गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार ने स्कूलों में हिजाब पहनने पर रोक लगा दी है। एससी में कर्नाटक सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराजन ने कहा वह बता देना चाहते हैं कि राज्य सरकार ने किसी धार्मिक पहलू को नहीं छुआ है। बहुत हल्ला हो रहा है कि हिजाब पर रोक लगा दी गई है। ऐसा नहीं है। राज्य में हिजाब पर कोई प्रतिबंध नहीं है और न ही राज्य सरकार का ऐसा कोई इरादा है। स्कूल धर्मनिरपेक्ष जगह है। वहां यूनीफार्म तय हैं और उसी में आना होगा। केवल कक्षा को छोड़कर हिजाब पहनने पर कहीं रोक नहीं है।

इस मुद्दे को तूल देने वाले मुस्लिम पक्ष का दावा है कि हिजाब इस्लाम का हिस्सा है। इस्लाम की परंपरा है।

दूसरी ओर मुस्लिम देश ईरान में जागना पहनने पर पुलिस हिरासत में 22 वर्षीय महशा अमीनी की मौत के बाद पूरे देश में महिलाएं सड़क पर उतर चुकी है। महिलाओं का कहना है कि हिजाब इस्लाम का हिस्सा नहीं है। मुस्लिम महिलाओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में हिजाब को जला डाला। विरोध में अपने बाल भी कटवा दिए। इन प्रदर्शनों के कारण अब तक करीब 7 लोगों की मौत हो चुकी है। कट्टर माने जाने वाले कुर्दिश इलाके में महिलाएं हिंसक प्रदर्शन कर यह मांग कर रही हैं कि उन्हें हिजाब जैसा कट्टरवादी प्रतिबंध स्वीकार नहीं है।

इस्लामिक देश ईरान में मुस्लिम महिलाएं हिजाब के खिलाफ सड़क पर हैं। जबकि भारत में मुस्लिम समाज के अगुवा इसे अनिवार्य बनाने की मांग पर तुले हैं। फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है कि स्कूल यूनीफार्म पर हिजाब पहनने की छूट होगी या कक्षाओं में सभी बच्चे एक जैसे समान दिखें।

फिलहाल, इस मामले में कट्टरवादी संगठन पीएफआई का हाथ माना जा रहा है। आतंकवादियों के समर्थक इस संगठन के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर एनआईए, ईडी जैसी संस्थाएं जांच कर रही हैं। फिरभी मुसलमानों में इस संगठन की बढ़ती पैठ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए लगातार चिंता का कारण बन रही है। इसके खिलाफ कमरतोड़ कार्रवाई की घड़ी अब करीब आ रही है।

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