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केदारनाथ, बद्रीनाथ धाम, आदिशंकराचार्य धाम में PM मोदी ने नवाए शीश, फिर माणा गांव से उत्तराखंड को दीं ₹3400 करोड़ की सौगातें

केदारनाथ, बद्रीनाथ धाम, आदिशंकराचार्य धाम में PM मोदी ने नवाए शीश, फिर माणा गांव से उत्तराखंड को दीं ₹3400 करोड़ की सौगातें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को उत्तराखंड के माणा में 3400 करोड़ रुपये से अधिक की सड़क और रोपवे परियोजनाओं की आधारशिला रखी। परंतु, इससे पहले दिन में, प्रधानमंत्री ने केदारनाथ जाकर श्रीकेदारनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की। वे आदि गुरु शंकराचार्य समाधि स्थल भी गए और मंदाकिनी आस्थापथ तथा सरस्वती आस्थापथ पर चल रहे कार्यों की समीक्षा की। प्रधानमंत्री बद्रीनाथ भी गए और श्रीबद्रीनाथ मंदिर में दर्शन एवं पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने अलकनंदा रिवरफ्रंट पर चल रहे कार्यों की समीक्षा की।

प्रधानमंत्री ने मंदिरों में दर्शन और पूजा- अर्चना करने के बाद आनंद की भावना व्यक्त की। उन्होंने कहा, “आज बाबा केदार और बद्री विशाल के दर्शन करके मन प्रसन्न हो गया, जीवन धन्य हो गया। ये क्षण चिरंजीवी हो गए।” अपनी पिछली यात्रा के दौरान बोले गए शब्दों को याद करते हुए कि यह दशक उत्तराखंड का होगा, प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि बाबा केदार और बद्री विशाल उन शब्दों को आशीर्वाद देंगे। उन्होंने कहा, “आज, मैं इन नई परियोजनाओं के साथ उसी संकल्प को दोहराने के लिए आपके बीच यहां हूं।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “माणा गांव, भारत के अंतिम गांव के रूप में जाना जाता है। लेकिन मेरे लिए सीमा पर बसा हर गांव, देश का पहला गांव है और सीमा के पास रहने वाले लोग देश के मजबूत रक्षक हैं।”

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, “21वीं सदी के विकसित भारत के निर्माण के दो प्रमुख स्तंभ हैं। पहला, अपनी विरासत पर गर्व और दूसरा, विकास के लिए हर संभव प्रयास। आज उत्तराखंड इन दोनों स्तम्भों को मजबूत कर रहा है।”

दो रोपवे, केदारनाथ से गौरीकुंड और हेमकुंड रोपवे के बारे में चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने बाबा केदारनाथ, बद्री विशाल और सिख गुरुओं के आशीर्वाद को इसकी प्रेरणा एवं प्रगति का श्रेय दिया।

प्रधानमंत्री ने पर्वतमाला योजना पर प्रकाश डाला, जो पहाड़ी राज्यों की कनेक्टिविटी में सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत उत्तराखंड और हिमाचल में रोपवे के विशाल नेटवर्क का निर्माण शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों की धारणा को बदलने की आवश्यकता पर बल दिया जैसा कि सैन्य प्रतिष्ठान ने किया था। उन्होंने कहा, “हम प्रयास कर रहे हैं ताकि इन क्षेत्रों में एक जीवंत जीवन हो जहां विकास का उत्सव मनाया जा सके।” प्रधानमंत्री ने कहा कि माणा से माणा दर्रे तक जो सड़क बनेगी, उससे क्षेत्र को काफी लाभ होगा। उन्होंने कहा कि जोशीमठ से मलारी रोड के चौड़ीकरण से आम लोगों के साथ-साथ हमारे जवानों का भी सीमा तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा।

उत्तराखंड के लिए क्यों जरूरी हैं ये रोपवे

केदारनाथ में रोपवे लगभग 9.7 किलोमीटर लंबा होगा और गौरीकुंड को केदारनाथ से जोड़ेगा, जिससे दोनों स्थानों के बीच यात्रा का समय वर्तमान में 6-7 घंटे से घटकर केवल 30 मिनट रह जाएगा। हेमकुंड रोपवे गोविंदघाट को हेमकुंड साहिब से जोड़ेगा। यह लगभग 12.4 किलोमीटर लंबा होगा और यात्रा के समय को एक दिन से कम करके केवल 45 मिनट तक ही सीमित कर देगा। यह रोपवे घांघरिया को भी जोड़ेगा, जो फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान का प्रवेश द्वार है।

लगभग 2430 करोड़ रुपये की कुल लागत से विकसित, रोपवे यात्रा को सुरक्षित, संरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए परिवहन का एक पर्यावरण के अनुकूल साधन होगा। इन महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं का विकास होने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्र में आर्थिक विकास को गति मिलेगी और रोजगार के अनेक अवसर पैदा होंगे।

इस यात्रा के दौरान करीब एक हजार करोड़ रुपये की सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया गया। दो सड़क चौड़ीकरण परियोजनाएं – माणा से माणा दर्रा (एनएच07) और जोशीमठ से मलारी (एनएच107बी) तक – हमारे सीमावर्ती क्षेत्रों में हर मौसम के अनुकूल सड़क संपर्क प्रदान करने की दिशा में एक और कदम होगा। कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के अलावा, ये परियोजनाएं रणनीतिक दृष्टि से भी फायदेमंद साबित होंगी।

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